चुनावी हार और पारिवारिक कलह…राजद को जीत की पटरी पर लाने के लिए क्या है तेजस्वी का अगला प्लान ? 

Tejshvi yadav politics : करीब एक महीने की विदेश यात्रा के बाद राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव की बिहार वापसी को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। पार्टी के अंदर और बाहर यह चर्चा जोरों पर है कि बिहार आते ही तेजस्वी यादव आरजेडी में बड़े स्तर पर संगठनात्मक बदलाव और अनुशासनात्मक कार्रवाई की शुरुआत कर सकते हैं। इसे पार्टी के भीतर सफाई अभियान के तौर पर देखा जा रहा है।

चुनावी हार ने बढ़ाया दबाव

2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में आरजेडी को अपेक्षा के विपरीत करारी हार का सामना करना पड़ा। कभी सत्ता के बेहद करीब पहुंच चुकी पार्टी की ताकत सिमटकर सिर्फ 25 विधायकों तक रह गई। इस नतीजे ने न केवल पार्टी की रणनीति पर सवाल खड़े किए, बल्कि नेतृत्व और संगठन की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर बहस छेड़ दी।

भितरघात का आरोप, कार्रवाई की तैयारी

पार्टी सूत्रों के मुताबिक चुनाव के दौरान भितरघात और निष्क्रियता की शिकायतें लगातार सामने आई थीं। कहा जा रहा है कि पार्टी ने 300 से 400 नेताओं की एक सूची तैयार की है। इन नेताओं पर आरोप है कि उन्होंने चुनाव में पार्टी प्रत्याशियों के खिलाफ काम किया या जानबूझकर निष्क्रिय रहे। तेजस्वी यादव बिहार लौटते ही इन नेताओं से स्पष्टीकरण मांग सकते हैं, और संतोषजनक जवाब न मिलने पर पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाया जा सकता है।

संगठनात्मक ढांचे में भी फेरबदल संभव

आरजेडी में लंबे समय से यह आरोप लगता रहा है कि कई पदाधिकारी केवल नाम के लिए पद पर हैं। अब संकेत मिल रहे हैं कि निष्क्रिय और विवादित नेताओं को हटाकर युवा और सक्रिय कार्यकर्ताओं को आगे लाया जाएगा। आने वाले पंचायत चुनाव को देखते हुए पार्टी नेतृत्व संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने की रणनीति पर काम कर सकता है।

परिवार और पार्टी दोनों मोर्चों पर तेजस्वी को चुनौती

चुनावी हार के बाद लालू परिवार के भीतर भी मतभेद खुलकर सामने आए। बहन रोहिणी आचार्य ने सार्वजनिक तौर पर तेजस्वी यादव और उनके करीबी नेताओं पर सवाल उठाए। बड़े भाई तेज प्रताप यादव पहले से ही पार्टी लाइन से अलग चल रहे हैं। इन घटनाओं ने विपक्ष को आरजेडी पर परिवारवाद और आंतरिक कलह के मुद्दे पर हमला करने का मौका दिया है।

क्या राजद बदलेगी अपना प्रदेश अध्यक्ष ?

सबसे बड़ी अटकलें आरजेडी के बिहार प्रदेश अध्यक्ष मंगनीलाल मंडल को लेकर हैं।पार्टी के एक धड़े का मानना है कि मौजूदा नेतृत्व संगठन को संभालने में विफल रहा।ऐसे में बिहार अध्यक्ष बदलकर किसी आक्रामक और मजबूत चेहरे को जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है। हालांकि, इस पर अभी तक पार्टी की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।

तेजस्वी के सामने है बड़ी परीक्षा

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि तेजस्वी यादव के लिए यह वक्त नेतृत्व की असली परीक्षा है। अगर वे पार्टी के भीतर अनुशासन कायम करने और संगठन को नए सिरे से खड़ा करने में सफल होते हैं, तो आरजेडी 2025 के बाद की राजनीति में दोबारा मजबूती से लौट सकती है।लेकिन अगर आंतरिक मतभेद और गुटबाजी जारी रही, तो पार्टी की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं। अब सबकी नजरें इस पर टिकी हैं कि बिहार लौटने के बाद तेजस्वी यादव सिर्फ संदेश देंगे या वाकई आरजेडी में बड़े और कड़े फैसले लेते नजर आएंगे।

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