lalu prasad yadav : सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया ने राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के प्रमुख लालू प्रसाद यादव को लैंड फॉर जॉब घोटाले में बड़ा झटका देते हुए उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर और उससे जुड़ी कार्यवाही को रद्द करने की मांग खारिज कर दी है. हालांकि अदालत ने उन्हें आंशिक राहत देते हुए कहा कि उन्हें हर सुनवाई में निचली अदालत में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने की आवश्यकता नहीं होगी.
कोर्ट ने क्या कहा
जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस एन. कोटेश्वर सिंह की बेंच ने स्पष्ट किया कि इस स्तर पर जांच और ट्रायल की प्रक्रिया को रोका नहीं जा सकता. अदालत ने कहा कि निचली अदालत को मामले के गुण-दोष के आधार पर सुनवाई जारी रखने का पूरा अधिकार है.
क्या है लैंड फॉर जॉब मामला
यह मामला उस समय का है जब लालू प्रसाद यादव रेल मंत्री थे. आरोप है कि रेलवे में ग्रुप-डी की नौकरियों के बदले उम्मीदवारों या उनके परिजनों से जमीन ली गई. इस मामले की जांच Central Bureau of Investigation कर रही है, जिसमें यादव परिवार के कई सदस्य भी आरोपी हैं.
निचली अदालत में कार्यवाही जारी
इससे पहले जनवरी 2026 में दिल्ली की राउज एवेन्यू स्थित विशेष CBI अदालत ने लालू यादव समेत 41 आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किए थे. अदालत ने टिप्पणी की थी कि यह मामला क्रिमिनल एंटरप्राइज की तरह संचालित किया गया, जिसमें सत्ता का दुरुपयोग कर अवैध लाभ लिया गया. अब इस केस की सुनवाई निचली अदालत में जारी रहेगी, जहां सबूतों और गवाहों के आधार पर आगे की प्रक्रिया चलेगी.
बिहार की राजनीति पर क्या पड़ेगा असर
इस फैसले का असर बिहार की राजनीति पर भी पड़ सकता है. राज्य में पहले से ही राजनीतिक हलचल तेज है, ऐसे में यह मामला विपक्ष के लिए बड़ा मुद्दा बन सकता है. वहीं राष्ट्रीय जनता दल ने इसे कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा बताते हुए कहा है कि वे आगे की रणनीति पर काम कर रहे हैं. सुप्रीम कोर्ट के फैसले से साफ है कि फिलहाल लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार को इस मामले में कानूनी लड़ाई जारी रखनी होगी. आने वाले समय में यह केस अदालत के साथ-साथ बिहार की राजनीति में भी अहम भूमिका निभा सकता है.