Tej prapat yadav : बिहार की राजनीति में सक्रिय नेता Tej Pratap Yadav ने हाल ही में एक साक्षात्कार में अपनी पार्टी की चुनावी हार और भविष्य की रणनीति पर खुलकर बात की. राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) से निष्कासन के बाद अपनी पार्टी जनशक्ति जनता दल (जेजेडी) के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में उन्होंने स्पष्ट किया कि हार से निराश होने की बजाय वे संगठन को और मजबूत करने पर ध्यान देंगे. एक मीडिया चैनल को दिए इंटरव्यू में तेज प्रताप यादव ने कहा कि उनके पिता Lalu Prasad Yadav भी कई बार चुनाव हारे, लेकिन उन्होंने कभी राजनीति का मैदान नहीं छोड़ा. उन्होंने कहा कि हार के बाद कोई फांसी नहीं लगाता, बल्कि और मजबूती से आगे बढ़ता है.
संगठन विस्तार पर जोर
तेज प्रताप ने बताया कि उनकी पार्टी ने विधानसभा चुनाव में 45 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे, जिनमें से 41 सीटों पर जमानत जब्त हो गई. इसके बावजूद उन्होंने इसे सीख के रूप में लेते हुए हर जिले में सदस्यता अभियान चलाने की योजना बनाई है. पार्टी का लक्ष्य प्रत्येक जिले में कम से कम एक लाख सदस्य जोड़ना है. उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी का चुनाव चिन्ह ब्लैकबोर्ड है, जिसे घर-घर तक पहुंचाने का अभियान शुरू किया जाएगा.
भविष्य की राजनीति और गठबंधन संकेत
तेज प्रताप यादव ने संकेत दिए कि उनकी पार्टी उन सभी दलों और नेताओं के साथ काम करने को तैयार है जो बिहार में शिक्षा सुधार और युवाओं के भविष्य निर्माण के लिए प्रयासरत हैं. उन्होंने जल्द ही राज्यव्यापी यात्रा शुरू करने की घोषणा भी की, जिसमें वे विभिन्न जिलों का दौरा करेंगे. इसके साथ साथ आरजेडी की हार पर उन्होंने कहा कि जयचंदों की वजह से पार्टी को नुकसान हुआ. वहीं बिहार की राजनीति पर बोलते हुए उन्होंने Nitish Kumar और Samrat Choudhary का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि अगर सत्ता में बदलाव होता है तो यह राजनीतिक परिस्थितियों का हिस्सा है और सम्राट चौधरी पर बड़ी जिम्मेदारी है कि वे कैसा प्रदर्शन करते हैं.
पारिवारिक मुद्दों पर भी बोले
अपनी बहन Rohini Acharya की नाराजगी पर तेज प्रताप यादव ने कहा कि उनके साथ गलत व्यवहार हुआ है. उन्होंने माना कि परिवार में मतभेद हो सकते हैं, लेकिन बड़ी बहन होने के नाते उन्हें मनाया जाना चाहिए.
छात्र राजनीति में सफलता का दावा
पटना विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनाव में अपनी पार्टी के तीन कार्यकर्ताओं की जीत पर उन्होंने कहा कि यह उनकी पार्टी के बढ़ते प्रभाव का संकेत है और आने वाले समय में इसका असर बड़े चुनावों में भी देखने को मिलेगा. तेज प्रताप यादव का यह बयान ऐसे समय में आया है जब बिहार की राजनीति में नए समीकरण बन रहे हैं और क्षेत्रीय दल अपनी रणनीति को पुनर्गठित करने में लगे हैं.