दक्षिण भारतीय शैली में तैयार किया गया है बिहार का यह मंदिर… जानिए भव्य नरसिंह बालाजी मंदिर की विशेषताएं

Narasimha balaji temple bihar : बिहार के भोजपुर जिले के कोइलवर प्रखंड के बहियारा गांव में दक्षिण भारत के प्रसिद्ध तिरुपति बालाजी मंदिर की तर्ज पर निर्मित नरसिंह बालाजी मंदिर बनकर तैयार हो गया है. यह मंदिर अपनी भव्यता, स्थापत्य शैली और मूर्तिकला के कारण क्षेत्र में विशेष आकर्षण का केंद्र बन गया है.मंदिर का निर्माण पूर्व सांसद आर.के. सिन्हा और उनके पुत्र ऋतुराज सिन्हा के प्रयासों से कराया गया है. करीब 11 करोड़ रुपये की लागत से बने इस मंदिर को लगभग एक वर्ष की अवधि में पूरा किया गया. निर्माण कार्य मई में भूमि पूजन के साथ शुरू हुआ था और 12 अप्रैल को इसकी प्राण प्रतिष्ठा निर्धारित है. इसके बाद मंदिर आम श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया जाएगा.

दक्षिण भारतीय शैली में निर्माण

मंदिर के निदेशक ए.के. सिंह के अनुसार इस मंदिर को पूरी तरह दक्षिण भारतीय वास्तुकला के अनुरूप तैयार किया गया है. निर्माण कार्य में दक्षिण भारत के आर्किटेक्ट, ठेकेदार और कारीगरों की महत्वपूर्ण भूमिका रही. मंदिर में इस्तेमाल किए गए पत्थर कर्नाटक और महाबलीपुरम सहित विभिन्न स्थानों से मंगाए गए हैं.

विशेष मूर्तियां आकर्षण का केंद्र

मंदिर में स्थापित प्रमुख विग्रहों में बालाजी, गणपति, बजरंगबली, महालक्ष्मी, लक्ष्मी नरसिंह और राम दरबार शामिल हैं. इन मूर्तियों को प्रसिद्ध मूर्तिकार अरुण योगीराज ने तैयार किया है, जो अयोध्या में रामलला की प्रतिमा बनाने के लिए भी जाने जाते हैं. मूर्तियों में दक्षिण भारत की परंपरा के अनुसार काले पत्थर का उपयोग किया गया है, जिससे मंदिर का स्वरूप और भी प्रामाणिक प्रतीत होता है.

मंदिर परिसर की विशेषताएं

मंदिर परिसर में मुख्य गर्भगृह के चारों ओर छोटे-छोटे मंदिर बनाए गए हैं. 6 आगे और 6 पीछे कुल मिलाकर 12 सहायक मंदिर हैं,. परिसर में लक्ष्मी नरसिंह, महालक्ष्मी, गणपति और राम दरबार के अलग-अलग मंदिर स्थापित किए गए हैं. गर्भगृह को विशेष रूप से भव्य और आकर्षक बनाया गया है, जो श्रद्धालुओं को दक्षिण भारत के मंदिरों जैसा अनुभव प्रदान करता है.

धार्मिक पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा

स्थानीय लोगों और प्रशासन का मानना है कि मंदिर के खुलने के बाद यहां श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या पहुंचेगी, जिससे क्षेत्र में धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा. भोजपुर में इस तरह का अनोखा मंदिर बनना न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह सांस्कृतिक और स्थापत्य दृष्टि से भी एक नया आकर्षण बनकर उभरेगा.

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