Women Reservation Act : बिहार की राजनीति में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है. मुख्यमंत्री Nitish Kumar के संभावित तौर पर राज्य की राजनीति से हटकर दिल्ली की ओर रुख करने की चर्चाओं के बीच महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी एक बार फिर केंद्र में आ गई है. केंद्र की Narendra Modi Government अब 2029 के लोकसभा चुनाव से महिला आरक्षण कानून लागू करने के मूड में दिख रही है. मीडिया रिपोर्ट की मानें तो इस दिशा में केंद्रीय गृहमंत्री Amit Shah ने विभिन्न राजनीतिक दलों के साथ बातचीत भी शुरू कर दी है.
2011 जनगणना के आधार पर लागू हो सकता है आरक्षण
सरकार ने प्रस्ताव दिया है कि Nari Shakti Vandan Adhiniyam 2023 में संशोधन कर 2011 की जनगणना के आधार पर लोकसभा और विधानसभा सीटों की संख्या लगभग 50% बढ़ाई जाए. इसके बाद कुल सीटों में से एक-तिहाई महिलाओं के लिए आरक्षित कर दी जाए. अगर राजनीतिक दलों के बीच सहमति बनती है, तो मौजूदा संसदीय सत्र में ही संशोधन विधेयक लाया जा सकता है. अभी के कानून के अनुसार नई जनगणना और परिसीमन के बाद ही आरक्षण लागू होना है, जिससे इसमें देरी हो रही थी.
बिहार में सीटों की संख्या में बड़ा इजाफा संभव
अगर प्रस्ताव लागू होता है, तो बिहार में चुनावी गणित पूरी तरह बदल सकता है
लोकसभा (2029)
सीटें 40 से बढ़कर 60 (लगभग 20 महिला सांसद चुनी जाएंगी)
विधानसभा (2030)
सीटें 243 से बढ़कर 365 (करीब 122 महिला विधायक बनेंगी)
आम महिलाओं को मौका या राजनीतिक परिवारों को फायदा?
बिहार में पिछले कुछ वर्षों में महिलाओं, खासकर स्वयं सहायता समूहों (जैसे जीविका दीदियों) का राजनीति में अहम योगदान रहा है. लेकिन महिला आरक्षण लागू होने के बाद सबसे बड़ा सवाल यही रहेगा कि क्या साधारण पृष्ठभूमि की महिलाएं राजनीति में जगह बना पाएंगी? या फिर राजनीतिक परिवारों की महिलाएं ही ज्यादा लाभ उठाएंगी?
फिलहाल बिहार से लोकसभा में सिर्फ 5 महिला सांसद हैं, और वे सभी किसी न किसी राजनीतिक परिवार से जुड़ी हैं. आने वाले वर्षों में बिहार की राजनीति में महिलाओं की भागीदारी ऐतिहासिक रूप से बढ़ सकती है. हालांकि, यह बदलाव कितना समावेशी होगा, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि राजनीतिक दल टिकट वितरण में कितनी पारदर्शिता और विविधता अपनाते हैं.