पटना। दिल्ली चुनाव में भाजपा ने 27 साल बाद वापसी करते हुए पुर्ण बहुमत से सरकार (delhi election result)बना रही है. पार्टी को चुनाव में 48 सीटों पर सफलता मिली है. जबकि आम आदमी पार्टी को सिर्फ 22 सीटों पर सफलता मिली. 12 साल तक सत्ता में रहने के बाद जनता ने आम आदमी पार्टी को दिल्ली की सत्ता से बाहर का रास्ता दिखाया है. चलिए जानते हैं ऐसा कैसे हुआ.
तिहरे हमले से ‘ब्रांड केजरीवाल’ को नुकसान
दिल्ली विधानसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की आक्रामक रणनीति ने आम आदमी पार्टी (AAP) के लिए मुश्किलें खड़ी कर दीं. AAP के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को प्रवर्तन निदेशालय (ED) और केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) की जांच के चलते जेल भेजा गया, जबकि BJP ने इसे बड़े चुनावी मुद्दे के रूप में उठाया. इसके अलावा, केजरीवाल के सरकारी बंगले के रेनोवेशन पर 45 करोड़ रुपये खर्च किए जाने को लेकर भी BJP ने जोरदार हमला बोला.
मिडिल क्लास पर BJP का फोकस
दिल्ली की 67% आबादी मिडिल क्लास से ताल्लुक रखती है. पिछले चुनावों में इस वर्ग ने AAP को एकतरफा समर्थन दिया था, लेकिन इस बार BJP ने इसे अपने चुनाव प्रचार का मुख्य केंद्र बना लिया.
AAP ने अपने घोषणापत्र में केंद्र सरकार से इनकम टैक्स स्लैब की सीमा को 7 लाख रुपये से बढ़ाकर 10 लाख रुपये करने की मांग की थी. लेकिन चुनाव से महज तीन दिन पहले केंद्र सरकार ने बजट में 12 लाख रुपये तक की आय को टैक्स-फ्री कर दिया. इससे BJP को AAP से बड़ा आर्थिक राहत देने वाला दल साबित करने का मौका मिला. BJP ने अखबारों, सोशल मीडिया और रैलियों के जरिए इस फैसले का जमकर प्रचार किया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी अपने भाषणों में इसका उल्लेख कर वोटरों को लुभाने का प्रयास किया.
पूर्वांचली वोटर्स पर खास रणनीति
दिल्ली की कुल 3.38 करोड़ आबादी में 30% लोग उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड से हैं. इनका प्रभाव 70 में से 27 विधानसभा सीटों पर माना जाता है. BJP ने इस वर्ग को रिझाने के लिए विशेष रणनीति बनाई और AAP को उसके गढ़ में चुनौती दी. पिछले चुनाव में आप के 12 विधायक बिहार-पूर्वांचल से थे, लेकिन इस बार BJP ने इन सीटों पर पूरी ताकत झोंक दी.
delhi election result : केजरीवाल के खिलाफ चेहरा उतारा
BJP ने दिल्ली चुनाव में आम आदमी पार्टी (delhi election result) के सबसे बड़े चेहरे अरविंद केजरीवाल को हराने की रणनीति बनाई. इसके लिए पार्टी ने प्रवेश वर्मा को नई दिल्ली सीट से उतारा. प्रवेश वर्मा, दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री साहिब सिंह वर्मा के बेटे हैं और जाट समुदाय में प्रभावशाली माने जाते हैं. BJP ने उन्हें अघोषित रूप से मुख्यमंत्री पद का चेहरा बनाकर चुनाव लड़ा.
केजरीवाल की मुफ्त योजनाओं पर BJP का मास्टरस्ट्रोक
AAP सरकार(delhi election result) की मुफ्त योजनाओं को ‘रेवड़ी कल्चर’ कहकर घेरने वाले प्रधानमंत्री मोदी ने इस बार रणनीति बदली. BJP ने चुनाव प्रचार में स्पष्ट किया कि अगर वह सत्ता में आई तो किसी भी सरकारी योजना को बंद नहीं किया जाएगा. इसके उलट, BJP ने AAP से ज्यादा आर्थिक लाभ देने का वादा कर वोटर्स को अपनी ओर खींचा. AAP ने महिलाओं को 2100 रुपये देने का वादा किया था, जबकि BJP ने इसे बढ़ाकर 2500 रुपये कर दिया. 60-70 साल के बुजुर्गों के लिए भी 2500 रुपये देने का ऐलान किया. विधवा, दिव्यांगों और 70 साल से ऊपर के बुजुर्गों के लिए 3000 रुपये पेंशन देने की घोषणा की.
यमुना सफाई का मुद्दा बना चुनावी हथियार
27 जनवरी को अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली में यमुना नदी की सफाई और पानी की आपूर्ति को लेकर अपने वादे पूरे न कर पाने के लिए जनता से माफी मांगी. उन्होंने BJP पर यमुना के पानी को जहरीला बनाने का आरोप लगाया. लेकिन BJP ने इस मुद्दे को लपक लिया और चुनाव आयोग में केजरीवाल के खिलाफ शिकायत दर्ज कर दी. इसके दो दिन बाद हरियाणा के मुख्यमंत्री ने केजरीवाल को चुनौती देते हुए यमुना का पानी पी लिया, जिससे BJP को इस मुद्दे पर बढ़त मिल गई.
delhi election result : BJP ने बदले 67% उम्मीदवार
BJP ने इस चुनाव में 68 उम्मीदवार उतारे, जिनमें से 46 नए चेहरे थे. पार्टी ने अपने 67% प्रत्याशी बदलकर नया संदेश दिया. पिछले एक साल में AAP के 50 से ज्यादा नेताओं ने BJP का दामन थामा, जिनमें विधायक, पूर्व विधायक और पार्षद शामिल थे. खासतौर पर मतदान से चार दिन पहले AAP के आठ विधायक BJP में शामिल हो गए. यह रणनीति पार्टी के लिए कारगर साबित हुई. जाट समुदाय को साधने की रणनीति हुई सफल. BJP ने इस चुनाव में 14% टिकट जाट नेताओं को दिए.
केजरीवाल सरकार में मंत्री रहे जाट नेता कैलाश गहलोत को BJP में शामिल कर टिकट दिया. पूर्व मुख्यमंत्री साहिब सिंह वर्मा के बेटे प्रवेश वर्मा को नई दिल्ली सीट से उतारा. दिल्ली की 10 सीटों पर जाट वोटर्स निर्णायक भूमिका में थे और BJP ने इन सभी सीटों पर जीत दर्ज की. पिछले चुनाव में ये सभी सीटें AAP के पास थीं.
भाजपा ने किया ध्रुवीकरण की राजनीति से परहेज
दिल्ली विधानसभा चुनावों के दौरान BJP ने हिंदू-मुस्लिम ध्रुवीकरण से दूरी बनाए रखी. लोकसभा चुनावों में PM मोदी ने घुसपैठिए जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया था, लेकिन इस बार वे गायब रहे. झारखंड और महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों में ‘बंटेंगे तो कटेंगे’ और ‘एक हैं तो सेफ हैं’ जैसे नारे लगे थे, लेकिन दिल्ली में इस रणनीति का इस्तेमाल नहीं किया गया. 3 जनवरी से 2 फरवरी के बीच PM मोदी ने दिल्ली में 5 रैलियां कीं, लेकिन किसी में भी हिंदू-मुस्लिम, घुसपैठिए या ध्रुवीकरण से जुड़े शब्दों का इस्तेमाल नहीं किया.
BJP की चुनावी रणनीति केजरीवाल पर भारी
BJP की चुनावी रणनीति केजरीवाल और AAP के लिए भारी पड़ी. तिहरे हमले,ED-CBI जांच, मिडिल क्लास पर फोकस और AAP की मुफ्त योजनाओं से बेहतर वादों के चलते BJP ने चुनावी बढ़त हासिल की. पूर्वांचली और जाट वोटर्स को साधने में भी पार्टी को सफलता मिली. इस बार BJP ने जहां AAP के गढ़ में सेंध लगाई, वहीं केजरीवाल को व्यक्तिगत तौर पर घेरने में भी कोई कसर नहीं छोड़ी. पार्टी ने उम्मीदवार बदलने, AAP नेताओं को तोड़ने और मुफ्त योजनाओं को नए सिरे से पेश करने की रणनीति अपनाई, जिसने उसे जीत की ओर अग्रसर(delhi election result) किया.