Bihar Crime : रिश्ते दो तरह के होते हैं..दूर के या फिर पास के लेकिन रिश्ते तो रिश्ते होते हैं. इन दिनों जिस रिश्ता की चर्चा खूब हो रही है…जिसमें बिहार और अपराध नंबर वन पर है और अगर यह रिश्ता सिस्टम के पसंद का हो तो फिर क्या ही कहने…हालांकि बिहार और अपराध का रिश्ता कोई नया नहीं है और सिस्टम पसंदीदा रिश्तेदार है. इसलिए तो यहां के अपराधियों की रसूख का अंदाजा इस बात से भी लगाया जाता है कि उनका पसंदीदा रिश्तेदार है कौन है. नतीजा यहां होने वाले अपराध पर सवाल सिर्फ अपराधियों पर नहीं, बल्कि पूरे प्रशासनिक तंत्र पर उठते हैं. राजनीति और अपराध में सिस्टम की मिलीभगत कितनी है. इसे आपको इन दो उदाहरणों से समझना होगा….
जब पटना की सड़कों पर मिली थी अर्धनग्न लाश
2 जुलाई 1999 की सुबह पटना के फ्रेजर रोड इलाके में एक मारुति ज़ेन कार से दो अर्धनग्न शव बरामद होते है. मृतकों की पहचान शिल्पी जैन और गौतम सिंह के रूप में होती है. जिसके बाद शिल्पी को अगवा किए जाने और उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म के बाद हत्या किए जाने के आरोप लगते हैं. जांच की शुरुआत में पुलिस मौत की वजह कार्बन मोनोऑक्साइड गैस बताती है, लेकिन पोस्टमार्टम और विसरा रिपोर्ट में जहर (एल्यूमीनियम फॉस्फाइड) की पुष्टि होती है. इसके बाद मामला सीबीआई को सौंपा जाता है. जिसकी जांच सरकारी फाइलों तक सिमटी हुई है. लेकिन जांच के दौरान कई सवाल उठे जैसे, संदिग्धों से डीएनए सैंपल नहीं लिए गए, फॉरेंसिक सबूतों को गंभीरता से नहीं परखा गया, राजनीतिक दबाव की चर्चाएं रहीं और आखिरकार यह मामला बिना किसी सजा के बंद हो गया. यह एक अपराध तथा संभावित दुष्कर्म-हत्या मामला था जिसमें निष्पक्ष जांच और फॉरेंसिक निष्कर्ष विवादित रहे और न्याय नहीं मिल पाया. यह वही दौर था जब बिहार में अपराध, अपहरण और दबंगई को लेकर देशभर में चर्चा होती थी. कई टिप्पणीकार इस दौर को कथित जंगलराज की संज्ञा देते हैं.
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शंभू गर्ल्स हॉस्टल में संदिग्ध मौत से रेप-हत्या तक
उस घटना के 27 साल बाद 10 जनवरी 2026 को पटना के शंभू गर्ल्स हॉस्टल में रहने वाली एक छात्रा की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई. शुरुआत में इसे नींद की गोलियां खाकर आत्महत्या बताया गया. लेकिन परिवार ने सीधे तौर पर आरोप लगाया कि यह आत्महत्या नहीं, बल्कि रेप और हत्या का है. परिजनों का आरोप है कि हॉस्टल प्रशासन ने घटना को दबाने की कोशिश की, पुलिस ने शुरुआती जांच में लापरवाही बरती, सीसीटीवी फुटेज देने में टालमटोल की गई और अस्पताल प्रबंधन ने सच्चाई छुपाने की कोशिश की. मामला तूल पकड़ने के बाद सरकार ने SIT का गठन किया और पोस्टमार्टम रिपोर्ट AIIMS पटना भेजी गई. रिपोर्ट में यौन उत्पीड़न और मारपीट के संकेत मिलने की बात सामने आई है. यह मामला संदिग्ध मौत के आरोप से बलात्कार तथा हत्या तक पहुँच चुका है, और अब अधिकारिक जांच जारी है. यह मामला संदिग्ध मौत के आरोप से बलात्कार तथा हत्या तक पहुँच चुका है, और अब अधिकारिक जांच जारी है. कई टिप्पणीकार इस दौर को कथित मंगलराज की संज्ञा देते हैं.
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सत्ता बदली, सिस्टम नहीं बदला?
कुल मिलाकर लालू यादव के राज में शिल्पी–गौतम कांड और नीतीश कुमार के राज में शंभू गर्ल्स हॉस्टल कांड दोनों मामलों में एक बात समान दिखती है. जिसमें शुरुआती स्तर पर सच को दबाने की कोशिश, प्रशासनिक लापरवाही, रसूखदारों का प्रभाव और पीड़ित परिवार को न्याय के लिए सड़क पर उतरने की मजबूरी. और जैसा कि होता है राजनीतिक दल एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं, लेकिन सवाल यह है कि क्या बिहार में आम नागरिक की बेटी सुरक्षित है? सच तो यह भी है कि राजनीतिक रसूखदारों को बचाने की कोशिश में बिहार के इतिहास में शिल्पी जैन आज भी एक अधूरी फाइल बनकर रह गईं. इसलिए अब शंभू गर्ल्स हॉस्टल की छात्रा के परिजन भी डर रहे हैं कि कहीं उनकी बेटी भी सिस्टम की भेंट न चढ़ जाए. 1999 में लालू यादव के शासनकाल में हुआ बहुचर्चित शिल्पी–गौतम कांड और अब 2026 में नीतीश कुमार के राज में सामने आया शंभू गर्ल्स हॉस्टल रेप-हत्या मामला, दोनों ही घटनाएं इस बात की ओर इशारा करती हैं कि सत्ता बदली, चेहरे बदले, लेकिन सिस्टम आज भी उसी जगह खड़ा है.