Online Ticket Booking : ऑनलाइन रेल टिकट बुकिंग में अब ऑटोमेशन टूल्स का इस्तेमाल करना महंगा पड़ सकता है. भारतीय रेलवे ने आईआरसीटीसी की वेबसाइट पर एआई आधारित प्रेडिक्टर सिस्टम लागू किया है, जो यह पहचान सकेगा कि टिकट किसी असली यूजर ने बुक किया है या फिर किसी बॉट और सॉफ्टवेयर की मदद से.
दलालों पर नकेल कसने की तैयारी
रेलवे के मुताबिक अवैध सॉफ्टवेयर के जरिए बड़े पैमाने पर टिकट बुकिंग करने वाले दलालों की बढ़ती गतिविधियों को रोकने के लिए यह कदम उठाया गया है. अधिकारियों का दावा है कि नए सिस्टम से आम यात्रियों के लिए कन्फर्म टिकट मिलने की संभावना करीब 40% तक बढ़ सकती है. रेलवे बोर्ड के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि यह पहल गोल्ड 2026 मिशन का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य टिकटिंग सिस्टम को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाना है.
एआई सिस्टम कैसे करेगा पहचान?
- टाइपिंग स्पीड पर नजर
बुकिंग के दौरान फॉर्म भरने की गति को मॉनिटर किया जाएगा. यदि कोई यूज़र उम्र, जेंडर जैसी जानकारी 4.2 सेकंड से कम समय में दर्ज करता है तो सिस्टम उसे संदिग्ध मान सकता है. रेलवे का कहना है कि सामान्य मानव व्यवहार में इतनी तेज एंट्री संभव नहीं होती.
- कट-पेस्ट और ऑटो-फिल ट्रैकिंग
एआई सिस्टम स्क्रिप्ट आधारित ऑटो-फिल, कट-पेस्ट पैटर्न और बाहरी टूल्स के उपयोग को भी पहचान सकेगा. यह पैटर्न अक्सर दलालों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले ऑटोमेशन सॉफ्टवेयर से मेल खाते हैं.
- बार-बार लॉगिन पर रोक
रेलवे अधिकारियों के अनुसार, यदि कोई यूज़र 30 मिनट में पांच से अधिक बार लॉगिन-लॉगआउट करता है तो उसकी आईडी 24 घंटे के लिए अस्थायी रूप से ब्लॉक की जा सकती है.
- लोकेशन मिसमैच पर अलर्ट
यदि आईपी एड्रेस की लोकेशन और रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर की लोकेशन में बड़ा अंतर पाया जाता है, तो ट्रांजैक्शन रोका जा सकता है. रेलवे का कहना है कि कई मामलों में सॉफ्टवेयर एक शहर से चलाया जाता है जबकि मोबाइल नंबर किसी अन्य स्थान का होता है.
अब तक 2.8 लाख अकाउंट ब्लॉक
रेलवे के मुताबिक पिछले एक महीने में करीब 2,80,000 संदिग्ध यूज़र अकाउंट ब्लॉक किए जा चुके हैं. अधिकारियों का कहना है कि यह अभियान अभी शुरुआती चरण में है और आने वाले समय में एआई सिस्टम को और मजबूत किया जाएगा.
यात्रियों के लिए क्या बदलेगा?
रेलवे का मानना है कि नए नियम और तकनीक से कन्फर्म टिकट की उपलब्धता में सुधार, दलालों द्वारा टिकट ब्लॉक करने की प्रवृत्ति में कमी, ऑनलाइन टिकटिंग सिस्टम अधिक सुरक्षित और पारदर्शी और संदिग्ध गतिविधियों पर त्वरित कार्रवाई हो सकेगी. इसके साथ साथ रेलवे का यह दावा है कि इस नई तकनीक से आम यात्रियों को बड़ी राहत मिलेगी और टिकट बुकिंग प्रक्रिया अधिक निष्पक्ष बनेगी.