Bengal politics : पुरानी और लोकप्रिय कहावत है,जिस ओर जवानी चलती है, उस ओर जमाना चलता है. लेकिन राजनीति में न जवानी मायने रखती है, न जमाना…यहां सबसे बड़ा होता हैं, नंबर का. जिसके पास जितना बड़ा नंबर वो उतना बड़ा खिलाड़ी. यह कोई अतिशयोक्ति नहीं, बल्कि भारतीय राजनीति की बार-बार सामने आती वास्तविकता है. तभी तो मध्यप्रदेश में चुनी हुई कांग्रेस को विपक्ष में बैठना पड़ा. बिहार में लंबे समय तक नीतीश की अगुआई में NDA की सरकार रही. वहीं महाराष्ट्र में दो प्रमुख राजनीतिक दल शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) में विभाजन हो गया. पारिवारिक, राजनीतिक और वैचारिक मतभेदों से उपजी बगावत ने इन दलों को दो खेमों में बाँट दिया, नंबरों के इस खेल के चश्मदीद उदाहरणों की कमी नहीं है, और अब इस फेहरिस्त में बंगाल भी जुड़ता नजर आ रहा है. वैसे सत्ता के लिए यह कोई नया खेल नहीं. जैसा कि बंगाल में हो रहा है.
स्पीकर ने ऋतब्रत बनर्जी को नेता प्रतिपक्ष की मान्यता दी
दरअसल, पश्चिम बंगाल की राजनीति में बुधवार को बड़ा घटनाक्रम तब सामने आया, जब विधानसभा स्पीकर रवीन्द्रनाथ बोस ने कथित तौर पर तृणमूल कांग्रेस (TMC) के बागी नेता ऋतब्रत बनर्जी को नेता प्रतिपक्ष (LoP) के रूप में मान्यता दे दी. यह फैसला पुर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा घोषित नेता प्रतिपक्ष शोभनदेब चट्टोपाध्याय के नामांकन के विपरीत है और इसे TMC के भीतर गहराते सत्ता संघर्ष का संकेत माना जा रहा है. ऋतब्रत बनर्जी गुट का दावा है कि TMC के 80 में से लगभग 60 विधायक उनके साथ हैं. इससे पहले बुधवार को बड़ी संख्या में विधायकों ने विधानसभा स्पीकर से मुलाकात कर खुद को पार्टी का वास्तविक विधायी गुट बताया और ऋतब्रत बनर्जी को नेता प्रतिपक्ष के रूप में मान्यता देने की मांग की. मीडिया सूत्रों के अनुसार स्पीकर ने उनकी दलीलों पर विचार करने के बाद ऋतब्रत बनर्जी को नेता प्रतिपक्ष के रूप में स्वीकार कर लिया और उन्हें विपक्ष के नेता के कार्यालय की जिम्मेदारी भी सौंप दी. ऋतब्रत बनर्जी गुट ने विधानसभा में अपनी नई टीम का भी ऐलान किया है. जावेद अहमद खान, शबीना यास्मीन, शीलू साह और संदीपन साह को उप नेता प्रतिपक्ष बनाया गया है, जबकि अखरूजमा को विधानसभा में TMC का मुख्य सचेतक (चीफ व्हिप) नियुक्त किया गया है.
पश्चिम बंगाल में TMC में बड़ा राजनीतिक संकट
हालांकि यह घटनाक्रम अचाकन नहीं है. विधानसभा चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद ममता बनर्जी ने पार्टी विरोधी गतिविधियों का आरोप लगाते हुए ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साह को निलंबित कर दिया था. इसके बाद पार्टी के भीतर असंतोष खुलकर सामने आने लगा और कई नेताओं ने नेतृत्व के खिलाफ आवाज उठाई. राजनीतिक जानकारों का मानना है कि चुनावी हार के बाद संगठन के भीतर बढ़ती नाराजगी ने इस बगावत को जन्म दिया.
ममता को ही बताया नेता
हालांकि ऋतब्रत बनर्जी ने ममता बनर्जी के खिलाफ खुला मोर्चा खोलने से इनकार किया है. नेता प्रतिपक्ष के रूप में मान्यता मिलने के बाद उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी ही उनकी नेता हैं और वे चाहते हैं कि वह पार्टी को दिशा देती रहें. उन्होंने कहा कि हम ममता बनर्जी का सम्मान करते हैं. हमारा उद्देश्य पार्टी को कमजोर करना नहीं बल्कि उसे मजबूत बनाना है. हम चाहते हैं कि वे हमारी मुख्य सलाहकार (चीफ एडवाइजर) की भूमिका निभाएं और हमें मार्गदर्शन देती रहें. इस दौरान ऋतब्रत बनर्जी ने तृणमूल कांग्रेस के महासचिव अभिषेक बनर्जी पर भी अप्रत्यक्ष हमला बोला. उन्होंने कहा कि विधानसभा का सदस्य नहीं होने के बावजूद किसी व्यक्ति द्वारा विधानसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर नेता प्रतिपक्ष नियुक्त करने का प्रयास उचित नहीं है. गौरतलब है कि मई में अभिषेक बनर्जी ने स्पीकर को पत्र भेजकर शोभनदेब चट्टोपाध्याय को नेता प्रतिपक्ष और अन्य नेताओं को विधानसभा में विभिन्न पदों पर नियुक्त करने की जानकारी दी थी.
चुनावी हार के बाद बढ़ा संकट
ऋतब्रत बनर्जी ने कहा कि उनका गुट केवल विरोध की राजनीति नहीं करेगा. उन्होंने कहा कि जहां जरूरत होगी वहां सरकार का विरोध किया जाएगा, लेकिन जनहित के अच्छे कार्यों की सराहना भी की जाएगी. उन्होंने यह भी कहा कि विपक्ष को विधानसभा के साथ-साथ जिलों में प्रशासन के साथ बेहतर संवाद स्थापित करने की जरूरत है. बता दें कि 4 मई 2026 को आए विधानसभा चुनाव परिणामों में TMC को बड़ी हार का सामना करना पड़ा था. पार्टी 80 सीटों पर सिमट गई, जबकि भाजपा ने 207 सीटें जीतकर सत्ता हासिल की. हार के बाद पार्टी के भीतर नेतृत्व को लेकर सवाल उठने लगे. कई नेताओं ने संगठनात्मक कमजोरियों, कथित परिवारवाद, निर्णय प्रक्रिया में केंद्रीकरण और चुनावी रणनीति को हार का कारण बताया.
क्या कहता है नंबर गेम?
पश्चिम बंगाल विधानसभा में TMC के कुल 80 विधायक हैं. किसी भी विधायी दल में विभाजन या अलग गुट के दावे को मजबूत करने के लिए दो-तिहाई समर्थन महत्वपूर्ण माना जाता है. यह संख्या 53 विधायकों के बराबर होती है. ऋतब्रत बनर्जी गुट का दावा है कि उसके पास 58 से 60 विधायकों का समर्थन है, जो दो-तिहाई के आंकड़े से अधिक है. इसी आधार पर वह खुद को विधानसभा में TMC का वास्तविक और वैध गुट बता रहा है. ऋतब्रत बनर्जी ने कहा कि हम ‘मैं’ नहीं बल्कि ‘हम’ में विश्वास करते हैं. दो-तिहाई से अधिक विधायकों ने हमारे दावे का समर्थन किया है और हमने सभी संवैधानिक प्रक्रियाओं का पालन किया है.