85 year old man jailed Bihar : बिहार के वैशाली जिले की एक अदालत ने 35 वर्ष पुराने हत्या के प्रयास और आर्म्स एक्ट से जुड़े मामले में 85 वर्षीय दीप राय को तीन वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है. हाल ही में पुलिस हिरासत में ले जाए जाते समय उनका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था, जिसके बाद यह मामला सुर्खियों में आ गया.
मानवीय आधार पर कम सजा
अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश मनोज कुमार तिवारी ने मंगलवार को सजा सुनाते हुए कहा कि दीप राय की उम्र 85 वर्ष है और वे शारीरिक रूप से अत्यंत कमजोर हैं. अदालत ने माना कि अधिक कठोर सजा उनके लिए जीवन के लिए खतरा बन सकती है, इसलिए मानवीय आधार पर उन्हें कम सजा दी गई. अदालत ने दीप राय पर 25,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया है. हालांकि उनके उम्र और खराब स्वास्थ्य को देखते हुए अदालत ने उन्हें प्रोविजनल जमानत (अंतरिम जमानत) भी प्रदान कर दी है
अन्य चार दोषियों को 10-10 साल की सजा
इस मामले में दीप राय के अलावा नकेश्वर राय (62), नरेश राय (60), उदकेश्वर राय (59) और जगदीश राय (50) को भी दोषी ठहराया गया था. अदालत ने इन चारों को भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 307 (हत्या का प्रयास) के तहत 10 वर्ष के कठोर कारावास और 25,000 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई. न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि यह घटना लगभग 35 वर्ष पुरानी है और मुकदमे में हुई असाधारण देरी स्वयं आरोपियों के लिए एक प्रकार की सजा रही है. इसी कारण अदालत ने अधिकतम दंड देने को उचित नहीं माना.
शीशा बिछाने के विवाद से शुरू हुआ था संघर्ष
रिपोर्ट के अनुसार यह मामला वैशाली जिले के राघोपुर गांव का है. घटना से एक दिन पहले गांव के रास्ते पर शीशे के टुकड़े (शिशा) बिछाने को लेकर विवाद हुआ था, जिसे ग्रामीणों ने हस्तक्षेप कर शांत करा दिया था. हालांकि अगले दिन विवाद फिर भड़क उठा. आरोप है कि जब ग्रामीणों ने सार्वजनिक रास्ते पर शीशे के टुकड़े बिछाने का विरोध किया, तो आरोपी वहां से चले गए और कुछ देर बाद राइफल, बंदूक तथा देसी कट्टों से लैस होकर लौटे. इसके बाद हुई फायरिंग में शंभू राय, उदेश राय, अदालत राय और रामसखी देवी गंभीर रूप से घायल हो गए. मेडिकल रिपोर्ट में गोली और छर्रों से हुए घावों की पुष्टि हुई थी.
35 साल बाद आया फैसला
मामले में प्राथमिकी 1991 में दर्ज की गई थी जबकि आरोपपत्र 1993 में दाखिल हुआ. इसके बावजूद मुकदमे की सुनवाई वर्षों तक लंबित रही और आरोपों का गठन वर्ष 2011 में किया गया. आरोपियों पर आईपीसी की धारा 147 (दंगा), 148 (घातक हथियार से लैस होकर दंगा), 149 (गैरकानूनी जमावड़े की सामूहिक जिम्मेदारी), 307 (हत्या का प्रयास) तथा आर्म्स एक्ट की धारा 27 के तहत मुकदमा चलाया गया. अभियोजन पक्ष ने अदालत में 10 गवाहों के बयान पेश किए, जिनके आधार पर अदालत ने 26 मई 2026 को पांचों आरोपियों को दोषी करार दिया था. सजा पर अंतिम फैसला 2 जून 2026 को सुनाया गया.
मुकदमे के दौरान दो आरोपियों की हुई मौत
इस मामले में शुरुआत में कुल सात आरोपी थे. लंबी न्यायिक प्रक्रिया के दौरान दो आरोपियों की मृत्यु हो गई. शेष पांच आरोपियों ने मुकदमे का सामना किया और अंततः अदालत द्वारा दोषी ठहराए गए.
सोर्स : मीडिया रिपोर्ट