तकनीक पर भरोसा या आस्था का अंधविश्वास ! कुंभ के आयोजन पर क्यों उठ रहे सवाल ?

पटना। महाकुंभ (Mahakumbh 2025) जैसे भव्य और पवित्र आयोजन में आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल लाखों श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा के लिए किया जाता है. लेकिन, मंगलवार को हुई भगदड़ और अव्यवस्था ने प्रशासन की तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. आस्था और श्रद्धा के इस महापर्व में प्रशासनिक लापरवाही और अव्यवस्थाओं ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं. क्या कुंभ 2025 में व्यवस्था सुधारने के लिए कोई ठोस कदम उठाए जाएंगे, या फिर यह आयोजन भी तकनीक और आस्था के नाम पर अव्यवस्था की भेंट चढ़ जाएगा?

भगदड़ में गईं कई जानें, आंकड़ों पर सवाल

मौनी अमावस्या के अवसर पर संगम नोज पर हुई भगदड़ (Mahakumbh 2025) में आधिकारिक रूप से 30 श्रद्धालुओं की मौत और 60 के घायल होने की पुष्टि की गई है. हालांकि, कई रिपोर्ट्स इन आंकड़ों को लेकर संदेह जता रही हैं. घटना के 19 घंटे बाद प्रशासन द्वारा जारी आंकड़ों पर कई विशेषज्ञों और स्थानीय लोगों का मानना है कि वास्तविक संख्या कहीं अधिक हो सकती है.

Mahakumbh  :अव्यवस्थाओं की खुली पोल

यह सवाल उठ रहा है कि जिस आयोजन में आधुनिक तकनीक के जरिए करोड़ों लोगों की गिनती की जा सकती है, वहीं हादसे के बाद प्रशासन को यह तक नहीं पता कि कुल कितने लोग मारे गए, घायल हुए या लापता हैं. डिजिटल निगरानी और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के इस दौर में ऐसी लापरवाही चौंकाने वाली है.

Mahakumbh  में भीड़ को नियंत्रित करने में प्रशासन विफल क्यों?

तीन दिन पहले ही यह स्पष्ट हो गया था कि मौनी अमावस्या पर रिकॉर्ड तोड़ भीड़ उमड़ने(Mahakumbh 2025) वाली है. इसके बावजूद, स्थिति अनियंत्रित होने के बाद भी आर्मी को तैनात नहीं किया गया. कई पत्रकारों ने ट्वीट कर यह दावा किया कि मेला क्षेत्र पूरी तरह भगवान भरोसे छोड़ दिया गया था.

मीडिया रिपोर्ट्स में भी यह सवाल उठाया गया कि लाखों लोगों की जान जोखिम में डालकर क्यों कोई ठोस योजना नहीं बनाई गई? प्रशासनिक चूक की वजह से श्रद्धालु घंटों तक जाम में फंसे रहे, वहीं कुंभ में पहुंचे वीआईपी मेहमानों के लिए विशेष इंतजाम किए गए.

क्या कुंभ धार्मिक आयोजन से राजनीतिक इवेंट बन गया है?

सवाल यह भी है कि कुंभ जैसे धार्मिक पर्व को राजनीतिक इवेंट क्यों बना दिया गया? प्रशासन का मुख्य काम श्रद्धालुओं को सुविधाएं देना होता है, लेकिन वीआईपी सुरक्षा और कवरेज पर ज्यादा ध्यान दिया गया. अखबारों, चैनलों और सोशल मीडिया पर भीड़ प्रबंधन और अव्यवस्थाओं पर बहुत कम चर्चा हुई.

30 पीपा पुल बने, लेकिन श्रद्धालुओं के लिए केवल 2 क्यों खुले?

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रशासन ने 30 पीपा पुलों में से केवल 3 को ही खोला. श्रद्धालुओं को 8 से 10 किलोमीटर चलने के बाद भी संगम से वापस लौटाया गया, जिससे लोगों में आक्रोश फैल गया.

7500 करोड़ का बजट, लेकिन सुविधाएं नदारद

महाकुंभ 2025 (Mahakumbh 2025)के आयोजन में करीब 7,500 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है. उत्तर प्रदेश सरकार ने 5,435.68 करोड़ रुपये और केंद्र सरकार ने 2,100 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं. इतने बड़े बजट के बावजूद श्रद्धालुओं के लिए बुनियादी सुविधाओं का अभाव देखने को मिला. इस राशि में प्रत्येक तीर्थयात्री के लिए बारकोड वाले पास, मैपिंग, ट्रैकिंग, टेंट व्यवस्था और भीड़ नियंत्रण प्रणाली विकसित की जा सकती थी. उत्तराखंड में चारधाम यात्रा के दौरान हर यात्री का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य होता है, लेकिन कुंभ में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है.

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