चुनावी साल में शिक्षा और स्वास्थ्य पर सरकार की नजर, क्या डैमेज कंट्रोल कर रहे नीतीश कुमार ! 

पटना। बिहार में इस साल के अंत तक विधानसभा चुनाव होने हैं, और विपक्ष लगातार शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर सरकार पर निशाना साध रहा है. चुनावी माहौल को देखते हुए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (nitish kumar) अब इन दोनों क्षेत्रों में सुधार की दिशा में बड़े कदम उठा रहे हैं. सरकार ने शिक्षा और स्वास्थ्य विभाग को दुरुस्त करने के लिए कई अहम फैसले लिए हैं.

शिक्षा व्यवस्था में बदलाव

बिहार सरकार (nitish kumar) ने सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की नियुक्ति को लेकर नए मानक लागू करने का आदेश जारी किया है. नए नियमों के तहत, प्राथमिक विद्यालयों में न्यूनतम पांच शिक्षकों की तैनाती अनिवार्य कर दी गई है. वहीं, 121 से 150 छात्रों वाले स्कूलों में छह शिक्षक और इससे अधिक छात्रों वाले विद्यालयों में प्रत्येक 40 छात्रों पर एक अतिरिक्त शिक्षक नियुक्त किया जाएगा. कक्षा एक से आठ तक के स्कूलों में अब प्रधानाचार्य समेत न्यूनतम नौ शिक्षक होंगे. यदि छात्र संख्या 105 से अधिक होती है, तो प्रत्येक 35 छात्रों पर एक अतिरिक्त शिक्षक की नियुक्ति की जाएगी.

अस्पतालों में टोकन सिस्टम लागू

स्वास्थ्य विभाग ने राज्य के अस्पतालों में मरीजों की भीड़ को नियंत्रित करने और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए टोकन सिस्टम लागू करने की घोषणा की है. स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने कहा कि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों से लेकर जिला अस्पतालों तक इस नई व्यवस्था को लागू किया जाएगा. इस सिस्टम के तहत मरीजों को पर्ची के बजाय एक टोकन नंबर दिया जाएगा, जिसमें उस डॉक्टर का नाम भी दर्ज होगा जिससे उन्हें परामर्श लेना है.

क्या है nitish kumar का अगला प्लान

अस्पतालों में नर्सिंग डेस्क से लेकर दवा वितरण काउंटर तक टोकन सिस्टम लागू किया जाएगा. साथ ही, अस्पतालों में डिस्प्ले बोर्ड लगाए जाएंगे, जिन पर टोकन नंबर प्रदर्शित किया जाएगा ताकि मरीजों को अपनी बारी का सही समय पर पता चल सके. चुनावी साल में शिक्षा और स्वास्थ्य के मुद्दे पर घिरी बिहार सरकार अब इन क्षेत्रों में सुधार की दिशा में तेजी से काम कर रही है. देखना होगा कि इन प्रयासों का आगामी चुनावों में क्या असर पड़ता है.

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