Vladimir Putin India visit : रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन एक बार फिर भारत दौरे पर हैं। यह उनका भारत का 10वां दौरा है। बीते ढाई दशकों में पुतिन के लगभग हर दौरे ने भारत–रूस रिश्तों को एक नई ऊंचाई दी है,चाहे वह रक्षा समझौते हों, ऊर्जा सहयोग, परमाणु डील या फिर वैश्विक राजनीति में रणनीतिक साझेदारी। वर्ष 2000 से लेकर 2025 तक, इन दौरों के दौरान कई ऐसे फैसले हुए जिन्होंने भारत की सुरक्षा और कूटनीति को नई मजबूती दी।
पहला दौरा: 2–5 अक्टूबर 2000
रूस के राष्ट्रपति पद का चुनाव जीतने के बाद पुतिन की यह पहली विदेश यात्रा थी। इस दौरान भारत और रूस के बीच रणनीतिक साझेदारी की नींव रखी गई।
दूसरा दौरा: 3–4 दिसंबर 2002
इस दौरे में पुतिन ने तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम से मुलाकात की। रक्षा और तकनीकी सहयोग को और मजबूत किया गया।
तीसरा दौरा: 3–5 दिसंबर 2004
तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के साथ बैठक में परमाणु ऊर्जा, रक्षा उत्पादन और अंतरिक्ष तकनीक पर सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी।
चौथा दौरा: 25–26 जनवरी 2007
पुतिन भारत के 58वें गणतंत्र दिवस समारोह के मुख्य अतिथि बने। यह किसी भी विदेशी नेता के लिए भारत का सबसे बड़ा कूटनीतिक सम्मान माना जाता है।
पांचवां दौरा: 24 दिसंबर 2012
इस दौरे में 13वां भारत–रूस शिखर सम्मेलन हुआ। इसमें रक्षा, परमाणु ऊर्जा और हेलीकॉप्टर डील जैसे कई अहम समझौते हुए।
छठा दौरा: 10–11 दिसंबर 2014
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से पुतिन की पहली आधिकारिक मुलाकात। इसी दौरान कोवल्डा पोर्ट प्रोजेक्ट और रक्षा सहयोग पर अहम करार हुआ।
सातवां दौरा: 15–17 अक्टूबर 2016 (गोवा)
यह दौरा BRICS समिट के दौरान हुआ। इसी बैठक में भारत को S-400 मिसाइल सिस्टम देने का ऐतिहासिक समझौता हुआ, जिसने भारत की वायु सुरक्षा को अभूतपूर्व मजबूती दी।
आठवां दौरा: 4–5 अक्टूबर 2018
19वां भारत–रूस शिखर सम्मेलन हुआ। दोनों देशों के बीच 2030 तक 2.55 लाख करोड़ रुपये के व्यापार का लक्ष्य तय किया गया।
नौवां दौरा: 6 दिसंबर 2021
कोविड के बाद पुतिन का पहला भारत दौरा। इस दौरान 21वां भारत–रूस शिखर सम्मेलन हुआ और भारत में AK-203 राइफल के संयुक्त निर्माण पर समझौता हुआ।
दसवां दौरा: 4–5 दिसंबर 2025
पुतिन का 23वें भारत–रूस शिखर सम्मेलन के लिए यह ऐतिहासिक दौरा है। इसमें यूक्रेन युद्ध, ऊर्जा आपूर्ति, रक्षा उत्पादन और भारत–रूस की रणनीति पर चर्चा होने की उम्मीद है।
क्यों खास है पुतिन का भारत प्रेम?
रूस भारत को अपना सबसे भरोसेमंद रणनीतिक साझेदार मानता है तो भारत को सबसे अत्याधुनिक रक्षा तकनीक रूस से मिलती है. S-400, ब्रह्मोस और परमाणु सबमरीन तकनीक इसकी मिसाल हैं. वैश्विक मंचों पर रूस अक्सर भारत के पक्ष में खड़ा रहता है.व्लादिमीर पुतिन के ये 10 दौरे सिर्फ औपचारिक यात्राएं नहीं, बल्कि भारत–रूस दोस्ती के मजबूत स्तंभ हैं। हर दौरे के साथ दोनों देशों के रिश्ते और रणनीतिक, और ताकतवर होते गए हैं।