Chief Justice of India : सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ जज जस्टिस सूर्यकांत सोमवार को भारत के 53वें चीफ जस्टिस (CJI) के रूप में शपथ लेंगे. वह मौजूदा CJI जस्टिस बी.आर. गवई की जगह लेंगे, जो रविवार शाम को रिटायर हो रहे हैं. जस्टिस सूर्यकांत को 30 अक्टूबर को अगला CJI नियुक्त किया गया था. वह लगभग 15 महीने तक इस पद पर रहेंगे और 9 फरवरी 2027 को 65 वर्ष की आयु में रिटायर होंगे.
हिसार के मिडिल-क्लास परिवार से सर्वोच्च न्यायालय तक का सफर
10 फरवरी 1962 को हरियाणा के हिसार में जन्मे जस्टिस सूर्यकांत साधारण परिवार से आते हैं. छोटे शहर से अपनी वकालत की शुरुआत करने वाले जस्टिस कांत ने आगे चलकर कई राष्ट्रीय महत्व के मामलों में निर्णायक भूमिका निभाई.उन्होंने 2011 में कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी से लॉ में मास्टर डिग्री की और फर्स्ट क्लास फर्स्ट का स्थान हासिल किया.
इन बड़े मामलों में अहम भूमिका
सुप्रीम कोर्ट में अपने कार्यकाल के दौरान जस्टिस सूर्यकांत कई संवैधानिक मामलों में शामिल रहे. वे अनुच्छेद 370 समाप्त करने से जुड़े फैसले का हिस्सा रहे और पेगासस स्पाइवेयर जांच,बिहार इलेक्टोरल रोल विवाद और देशद्रोह कानून (सेडिशन लॉ) पर रोक से जुड़े महत्वपूर्ण आदेशों में उनकी भूमिका रही. देशद्रोह कानून पर सुनवाई के दौरान उन्होंने उस आदेश पर सहमति दी जिसमें औपनिवेशिक काल के इस कानून के तहत नई FIR दर्ज करने पर रोक लगाई गई थी, जब तक कि सरकार इसकी समीक्षा पूरी न कर ले.
EC को बिहार के 65 लाख वोटर डेटा देने का आदेश
वोटर लिस्ट विवाद पर सुनवाई करते हुए उन्होंने चुनाव आयोग से कहा था कि वह ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से बाहर किए गए 65 लाख वोटरों की पूरी जानकारी सार्वजनिक करे. यह मामला बिहार में स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) के खिलाफ दायर कई याचिकाओं से जुड़ा था.
जेंडर जस्टिस और लोकतांत्रिक अधिकारों पर जोर
जस्टिस सूर्यकांत जमीनी लोकतंत्र और जेंडर इक्विटी के बड़े समर्थक रहे हैं. उन्होंने उस बेंच की अध्यक्षता की जिसने एक महिला सरपंच को गैर-कानूनी तरीके से हटाए जाने पर पुनः बहाल करने का आदेश दिया. उन्होंने बार एसोसिएशनों, जिसमें सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन भी शामिल है, में एक-तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित करने के निर्देश दिए थे.
प्रधानमंत्री सुरक्षा चूक की जांच का आदेश दिया
2022 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पंजाब यात्रा के दौरान सुरक्षा चूक मामले में भी जस्टिस सूर्यकांत उस बेंच में शामिल थे, जिसने पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज जस्टिस इंदु मल्होत्रा की अध्यक्षता में 5 सदस्यीय जांच समिति गठित की. बेंच ने कहा था कि ऐसे मामलों में ज्यूडिशियली ट्रेंड माइंड की आवश्यकता होती है.
हाई कोर्ट से सर्वोच्च न्यायालय तक
पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में लंबे कार्यकाल के दौरान जस्टिस सूर्यकांत ने कई महत्वपूर्ण फैसले दिए. उन्हें अक्टूबर 2018 में हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट का चीफ जस्टिस नियुक्त किया गया. इसके बाद वह सुप्रीम कोर्ट पहुंचे और तेज़ी से देश के शीर्ष न्यायाधीशों में गिने जाने लगे. सोमवार को शपथ के साथ ही जस्टिस सूर्यकांत भारत की न्यायपालिका के सर्वोच्च पद की जिम्मेदारी संभाल लेंगे, और आने वाले 15 महीनों तक महत्वपूर्ण संवैधानिक और राष्ट्रीय मुद्दों पर शीर्ष न्यायिक नेतृत्व का संचालन करेंगे.