Breast Cancer : दुनिया भर में ब्रेस्ट कैंसर (स्तन कैंसर) एक गंभीर और तेजी से बढ़ती स्वास्थ्य समस्या बनता जा रहा है। महिलाओं में यह सबसे आम कैंसर के रूप में सामने आ रहा है। ताज़ा आंकड़े बताते हैं कि वर्ष 2022 में दुनिया भर में करीब 2.3 मिलियन महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर के नए मामले सामने आए, जबकि इसी साल लगभग 6 लाख 70 हजार महिलाओं की मौत इस बीमारी के कारण हुई। यह जानकारी World Health Organization (WHO) की रिपोर्ट में सामने आई है।
भारत में भी स्थिति लगातार गंभीर होती जा रही है। हर साल देश में करीब 2 लाख नए ब्रेस्ट कैंसर के मामले दर्ज किए जा रहे हैं। चिंता की बात यह है कि अब यह खतरा सिर्फ अधिक उम्र की महिलाओं तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि 25 से 35 वर्ष की युवतियां भी इसकी चपेट में आ रही हैं।
क्यों बढ़ रहा है ब्रेस्ट कैंसर का खतरा?
विशेषज्ञों के मुताबिक बदलती जीवनशैली, खान-पान और हॉर्मोनल असंतुलन इसके प्रमुख कारण हैं। रिपोर्ट के अनुसार ब्रेस्ट कैंसर के बढ़ने के पीछे ये वजहें सामने आ रही हैं.इसमें
- देर से शादी और देर से मां बनना
आज की बदलती सामाजिक परिस्थितियों में महिलाएं देर से शादी और देर से मां बन रही हैं। इससे शरीर में लंबे समय तक एस्ट्रोजन हार्मोन सक्रिय रहता है, जो ब्रेस्ट कैंसर का खतरा बढ़ाता है।
- जंक फूड और अत्यधिक चीनी का सेवन
फास्ट फूड, ज्यादा मीठा और प्रोसेस्ड फूड हार्मोनल असंतुलन पैदा करता है, जिससे कैंसर का जोखिम कई गुना बढ़ जाता है।
- लंबे समय तक गर्भनिरोधक गोलियों और हार्मोनल दवाइयों का सेवन
विशेषज्ञों के मुताबिक लंबे समय तक हार्मोनल दवाइयों का उपयोग भी ब्रेस्ट कैंसर के खतरे को बढ़ाता है।
- शारीरिक निष्क्रियता
ऑफिस वर्क और कंप्यूटर पर लंबे समय तक बैठकर काम करने के कारण महिलाएं शारीरिक रूप से कम सक्रिय हो गई हैं, जो कैंसर का एक बड़ा कारण बन रहा है।
- तनाव और नींद की कमी
लगातार तनाव और पूरी नींद न लेना इम्यून सिस्टम को कमजोर करता है, जिससे शरीर की रोगों से लड़ने की क्षमता घट जाती है।
- फैमिली हिस्ट्री और जेनेटिक कारण
यदि मां या बहन को ब्रेस्ट कैंसर रहा हो, तो अन्य महिलाओं में इसका खतरा दोगुना तक बढ़ जाता है।
ब्रेस्ट कैंसर के वो लक्षण जिन्हें नजरअंदाज करना पड़ सकता है जानलेवा
डॉक्टरों का कहना है कि अगर समय रहते इन संकेतों पर ध्यान दिया जाए, तो जान बचाई जा सकती है जैसे कि स्तन या बगल में कठोर गांठ महसूस होना, निप्पल से असामान्य स्राव (डिस्चार्ज) या रंग बदलना, स्तन की त्वचा में गढ्ढे पड़ना या झुर्रियां आना, निप्पल का अंदर की ओर मुड़ना या दर्द होना या बगल या कंधे के पास सूजन होना, विशेषज्ञों के अनुसार, इन लक्षणों में से कोई भी दिखे तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
ब्रेस्ट कैंसर से बचने के क्या है उपाय
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि सही जीवनशैली अपनाकर ब्रेस्ट कैंसर के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है. इसके लिए आप संतुलित आहार (फल, हरी सब्जियां, फाइबरयुक्त भोजन और कम वसा वाला आहार) लें इसके साथ-साथ रोजाना 30 मिनट व्यायाम करें और तनाव कम करने के लिए ध्यान (Meditation) करें और पर्याप्त नींद लें. इसके साथ साथ 40 वर्ष से ऊपर की महिलाओं को हर 2 साल में एक बार मैमोग्राफी टेस्ट जरूरी है. शराब और धूम्रपान से दूरी बनाएं तथा जिन महिलाओं के परिवार में ब्रेस्ट कैंसर का इतिहास है, उन्हें 30 साल की उम्र से ही नियमित जांच शुरू कर देनी चाहिए।
कैसे करें सेल्फ ब्रेस्ट एग्जामिनेशन?
डॉक्टरों के अनुसार हर महिला को सेल्फ ब्रेस्ट एग्जामिनेशन की आदत डालनी चाहिए, आईने के सामने खड़े होकर दोनों स्तनों में कोई बदलाव, सूजन या रंग परिवर्तन तो नहीं, यह देखें. एक हाथ से दूसरे स्तन को गोलाई में हल्के हाथों से दबाकर गांठ की जांच करें,निप्पल को हल्के से दबाकर देखें कि कहीं खून या स्राव तो नहीं निकल रहा. यह जांच हर महीने पीरियड्स खत्म होने के 5 से 7 दिन बाद करनी चाहिए
समय पर जांच ही है सबसे बड़ा हथियार
डॉक्टरों का साफ कहना है कि ब्रेस्ट कैंसर का समय रहते पता चल जाए, तो इसका इलाज संभव है और मरीज की जान बचाई जा सकती है। जागरूकता, नियमित जांच और सतर्क जीवनशैली ही इस बीमारी से लड़ने का सबसे मजबूत हथियार बन सकती है।