Indian army power : भारतीय सेना का संगठन दुनिया के सबसे मजबूत और अनुशासित सैन्य ढांचों में गिना जाता है. देश की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाए रखने के लिए सेना को छोटे से बड़े सैन्य समूहों में संगठित किया जाता है. आम तौर पर लोगों के मन में यह सवाल रहता है कि भारतीय सेना की युद्धक संरचना किस तरह से की जाती हैं. तो आपको बता दें कि भारतीय सेना में सैन्य इकाइयों का गठन एक तय क्रम के अनुसार किया जाता है जिसका युद्ध के मैदान में हर स्तर की अपनी अलग भूमिका और जिम्मेदारी होती है. इनका गठन कैसे किया जाता है. इस बारे में हम आपको इस लेख में पूरी जानकारी दे रहे हैं.
छोटे से बड़े क्रम में बनता है सेना का ढांचा
भारतीय सेना में सैन्य इकाइयों का गठन एक तय क्रम के अनुसार किया जाता है. यह क्रम इस प्रकार होता है. सेक्शन → प्लाटून → कंपनी → बटालियन → ब्रिगेड → डिवीजन → कोर → कमांड . युद्ध के मैदान में हर स्तर की अपनी अलग भूमिका और जिम्मेदारी होती है.
सीधे मोर्चे पर लड़ने वाली इकाई होती है कंपनी
सेना की कंपनी को एक छोटी लेकिन पूरी तरह युद्धक इकाई माना जाता है. इसमें आम तौर पर 100 से 140 सैनिक होते हैं. इनमें 3 से 4 अधिकारी और 90 से 130 जवान शामिल होते हैं. कंपनी की कमान आम तौर पर मेजर के हाथ में होती है. कई बार अनुभव के आधार पर कैप्टन को भी कंपनी कमांडर बनाया जाता है.
कंपनी का गठन कैसे होता है?
एक कंपनी में 3 से 4 प्लाटून होते हैं. एक प्लाटून में लगभग 30 से 35 सैनिक शामिल रहते हैं. यानी कंपनी पूरी तरह से युद्ध के लिए तैयार सबसे सक्रिय इकाई होती है, जो सीधे दुश्मन से मुकाबला करती है.
बड़े सैन्य ऑपरेशन की रीढ़ है बटालियन
सेना की बटालियन को एक पूर्ण युद्धक गठन माना जाता है. इसमें कुल 850 से 1000 सैनिक होते हैं. इनमें 25 से 30 अधिकारी और 800 से अधिक जवान शामिल रहते हैं. बटालियन की कमान कर्नल (Colonel) के पास होती है, जिन्हें कमांडिंग ऑफिसर (CO) कहा जाता है.
बटालियन का गठन कैसे होता है?
एक बटालियन में 4 से 5 कंपनियां शामिल होती हैं. इसके अलावा बटालियन में ये इकाइयां भी होती हैं
- हेडक्वार्टर कंपनी
- सपोर्ट यूनिट
- मेडिकल यूनिट
- लॉजिस्टिक्स और सप्लाई यूनिट
यही कारण है कि बटालियन किसी भी इलाके में लंबे समय तक स्वतंत्र सैन्य अभियान चलाने में सक्षम होती है.
क्यों जरूरी है यह सैन्य ढांचा?
सेना का यह ढांचा तेज और मजबूत कमांड सिस्टम तैयार करता है, जो युद्ध रणनीति को जमीन पर उतारने में मदद करता है, जिम्मेदारियों का साफ बंटवारा सुनिश्चित करता है और हर परिस्थिति में तेजी से कार्रवाई को संभव बनाता है. कंपनी और बटालियन भारतीय सेना की सबसे अहम युद्धक इकाइयां हैं. कंपनी जहां सीधे मोर्चे पर दुश्मन से टक्कर लेती है, वहीं बटालियन बड़े इलाके में पूरे सैन्य अभियान की तस्वीर तय करती है. इन दोनों इकाइयों की मजबूती ही देश की सीमाओं की सुरक्षा की गारंटी मानी जाती है.