बलात्कार और डिजिटल रेप में क्या अंतर होता है, जानें मामले में दोषी को क्या मिलती है सजा

Digital rape : बीते दिनों आपने एक शब्द जरूर सूना या पढ़ा होगा डिजिटल रेप. क्या होता है डिजिटल रेप ? दरअसल यह एक गंभीर यौन अपराध है, जो पिछले कुछ सालों से भारतीय न्याय व्यवस्था में चर्चा का विषय बन गया है। हालांकि कई लोग इसे केवल ऑनलाइन अपराध मानते हैं, लेकिन इसका असल में मतलब कुछ और है।

क्या होता है डिजिटल रेप?

डिजिटल रेप में डिजिटल शब्द का उपयोग लैटिन शब्द digitus (उंगली) से लिया गया है. जिसका मतलब है कि इसमें उंगली या किसी अन्य वस्तु के जरिए महिला या लड़की के निजी अंगों (प्राइवेट पार्ट्स) में बिना उनकी सहमति से जबदस्ती करना। यह यौन हिंसा का एक रूप है, जिसे पहले बलात्कार की श्रेणी में नहीं माना जाता था। लेकिन अब भारतीय क़ानून में इसके खिलाफ कड़ी सज़ा का प्रावधान है।

इस अपराध को लेकर कानूनी बदलाव 2013 में निर्भया कांड के बाद हुए थे, जब भारतीय कानून ने यौन अपराधों के खिलाफ सख्त कदम उठाने का फैसला किया। जिसके बाद से अब digitus penetration को भी रेप माना जाता है,और दोषी के खिलाफ कड़ी सजा का प्रावधान है।

कानून में क्या हुआ है बदलाव

2013 से पहले भारतीय क़ानून में रेप की परिभाषा में सिर्फ पेनिस का penetration ही शामिल था। लेकिन निर्भया केस के बाद यौन अपराधों से संबंधित कानून में संशोधन किया गया। उसके बाद से उंगली या किसी अन्य वस्तु का penetration भी रेप के तहत आता है और इसे अपराध माना जाता है। डिजिटल रेप को आईपीसी की धारा 375 के तहत रेप माना जाता है। इससे दोषी व्यक्तियों के खिलाफ कड़ी सजा का प्रावधान है, जो पहले नहीं था।

डिजिटल रेप के मामलों में भारतीय क़ानून के तहत सजा कम से कम 10 साल और अधिकतम आजीवन कारावास हो सकती है। साथ ही 12 साल से कम उम्र की बच्ची के साथ इस अपराध के लिए 20 साल की सज़ा से लेकर मृत्युदंड तक की सजा का प्रावधान भी है।

पुलिस की भूमिका

ज्ञात हो कि डिजिटल रेप के मामलों में पुलिस को तत्काल कार्रवाई करनी होती है। यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि मेडिकल एग्जामिनेशन, फॉरेंसिक सैंपल, और सर्वाइवर का बयान समय पर लिया जाए। कई बार मेडिकल रिपोर्ट में यह लिखा जाता है कि प्राइवेट पार्ट्स पर कोई चोट नहीं है, जिससे केस कमजोर हो जाता है। लेकिन क़ानून के अनुसार,रेप के मामलों में चोट होना आवश्यक नहीं है।

क्यों हो रही चर्चा

दरअसल 13 अगस्त 2023 को उत्तर प्रदेश के गौतम बुद्ध नगर ज़िला न्यायालय ने डिजिटल रेप के एक मामले में दोषी व्यक्ति को आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई। उससे पहले,दिल्ली के साकेत कोर्ट ने अगस्त 2021 में प्रदीप कुमार नामक एक व्यक्ति को बीस साल की सज़ा सुनाई थी, जिसके खिलाफ चार साल की बच्ची के साथ डिजिटल रेप का आरोप था।

डिजिटल रेप जैसे अपराधों को समझना और समाज में इसे लेकर जागरूकता फैलाना बेहद ज़रूरी है। यह सिर्फ एक कानूनी मुद्दा नहीं,बल्कि एक गंभीर सामाजिक समस्या है,जिसे सही तरीके से समझा और हल किया जाना चाहिए। समाज में ऐसी घटनाओं को गंभीरता से लिया जाना चाहिए और सर्वाइवर को दोषी ठहराने की बजाय उनका समर्थन किया जाना चाहिए।

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