पटना। बिहार में बाढ़(Bihar flood )की स्थिति लगातार गंभीर होती जा रही है। सीमांचल सहित कई जिलों में हालात तेजी से बिगड़ रहे हैं। राज्य के सीमावर्ती इलाकों के कई हिस्से पूरी तरह तबाह हो चुके हैं। स्थानीय प्रशासन के अनुसार, अब तक बाढ़ से लगभग 50 लाख से 1 करोड़ लोग प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित हो चुके हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह संख्या और बढ़ सकती है। इस भयावह स्थिति को देखते हुए राज्य सरकार और स्थानीय लोगों ने केंद्र सरकार से बिहार की बाढ़ को राष्ट्रीय आपदा घोषित करने की मांग की है।
सीमांचल में रेल सेवाएं ठप
बाढ़ का सबसे बड़ा असर सीमांचल क्षेत्र में देखने को मिल रहा है, जहां रेल सेवाएं पूरी तरह से ठप हो गई हैं। कटिहार, पूर्णिया, अररिया, और किशनगंज जैसे जिलों में बाढ़ के कारण रेल पटरियों पर पानी जमा हो गया है, जिससे यात्रियों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। वहीं, चंपारण के टाइगर रिजर्व में बाढ़ का पानी भर जाने से वन्यजीवों और पर्यावरण पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है।
Bihar flood :तटबंध टूटने से हालात और बिगड़े
सीतामढ़ी, दरभंगा, और पश्चिमी चंपारण जैसे जिलों में बाढ़ ने तटबंधों को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचाया है। कई तटबंध टूट चुके हैं, जिससे बाढ़ का पानी रिहायशी इलाकों में तेजी से घुस रहा है। मुजफ्फरपुर के तटबंधों में भी रिसाव की खबरें सामने आ रही हैं, जिससे स्थिति और भी चिंताजनक हो गई है। स्थानीय प्रशासन द्वारा राहत और बचाव कार्य शुरू कर दिए गए हैं, लेकिन स्थिति पर पूरी तरह से काबू पाना अभी संभव नहीं हो पाया है।
पुल और स्टेट हाईवे को हुआ भारी नुकसान
बाढ़ के कारण चंपारण के कई पुलों को नुकसान पहुंचा है, जिससे परिवहन व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हो गई है। कई स्टेट हाईवे पूरी तरह बह गए हैं, जिससे स्थानीय लोग अपने घरों से बाहर निकलने में असमर्थ हो गए हैं। सड़कों के टूट जाने से राहत सामग्री और मेडिकल सुविधाएं पहुंचाने में भी काफी कठिनाइयां हो रही हैं।
Bihar flood को राष्ट्रीय आपदा घोषित करने की मांग
बिहार की इस भयावह स्थिति (Bihar flood )को देखते हुए लोगों ने राज्य सरकार और केंद्र सरकार से इसे राष्ट्रीय आपदा घोषित करने की अपील की है। स्थानीय नेताओं का कहना है कि राज्य की सीमाएं नेपाल से सटे होने के कारण यहां बाढ़ की समस्या साल-दर-साल विकराल रूप धारण करती जा रही है, और इससे निपटने के लिए केंद्र सरकार को व्यापक योजना और समर्थन की जरूरत है। बिहार की बाढ़ से हुए व्यापक नुकसान और प्रभावित जनसंख्या को देखते हुए, राज्य में आपातकालीन स्थिति उत्पन्न हो गई है। सीमांचल, चंपारण, सीतामढ़ी, और अन्य जिलों में लाखों लोग राहत और बचाव कार्यों पर निर्भर हैं। ऐसे में केंद्र सरकार से अपेक्षा की जा रही है कि वह जल्द से जल्द इसे राष्ट्रीय आपदा घोषित कर राहत कार्यों को और तेज़ी से अमल में लाए।