Sher Shah Suri tomb : बिहार के रोहतास जिले में स्थित सासाराम शहर न केवल इतिहास प्रेमियों के लिए, बल्कि पर्यटन के दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण केंद्र बनता जा रहा है. यहाँ का शेरशाह सूरी का मकबरा न केवल स्थापत्य कला का अद्भुत उदाहरण है, बल्कि यह मध्यकालीन भारत के प्रसिद्ध शासक शेरशाह सूरी की स्मृति में भी बना है. इसे अक्सर “भारत का दूसरा ताजमहल” कहा जाता है.
शेरशाह सूरी का मकबरा इतिहास और महत्व
शेरशाह सूरी (1486-1545) अफगान मूल के योद्धा और सूर वंश के संस्थापक थे. उन्होंने हुमायूँ को हराकर दिल्ली की सत्ता पर कब्जा किया और प्रशासनिक सुधारों के लिए जाने जाते हैं. उनकी मृत्यु 1545 में कालिंजर किले में तोप दुर्घटना के कारण हुई. मकबरे का निर्माण कार्य उनके पुत्र इस्लाम शाह सूरी द्वारा उनके निधन के बाद पूरा कराया गया. यह मकबरा अफगानी और इंडो-इस्लामिक स्थापत्य का एक उत्कृष्ट उदाहरण है.
आधुनिक पर्यटन का संगम है मकबरा
शेरशाह सूरी का मकबरा केवल मध्यकालीन स्थापत्य का प्रतीक नहीं है, बल्कि यह उस समय की प्रशासनिक और सांस्कृतिक उत्कृष्टता का जीवंत उदाहरण भी है. यह स्थल कृत्रिम झील के बीच एक टापू पर स्थित है, जिसमें झील के पानी में तैरती मछलियाँ इसे और जीवंत बनाती हैं. चारों दिशाओं से पत्थर के पुल मकबरे की भव्यता को और बढ़ाते हैं. मुख्य गुंबद चार छोटे गुंबदों से घिरा हुआ है और मकबरे की ऊँचाई लगभग 122 फीट है. इसके निर्माण में लाल बलुआ पत्थर और संगमरमर का उपयोग किया गया.
मकबरे के अंदर दीवारों पर कुरान की आयतें और जटिल नक्काशी देखने को मिलती हैं, जबकि खिड़कियों और दरवाजों से प्रवेश करने वाली प्राकृतिक रोशनी इसे दिव्य आभा प्रदान करती है. चारों ओर फैले बगीचे और pathways इसे न केवल दर्शनीय बनाते हैं, बल्कि पर्यटकों और शोधकर्ताओं के लिए आदर्श स्थल भी हैं.
सांस्कृतिक हब में विकसित में बिहार की यह धरोहर
समय के साथ यह धरोहर संरक्षण की आवश्यकता बन गई. भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने इसे संरक्षित किया और बिहार सरकार की पहल से इसे आधुनिक पर्यटन स्थल और सांस्कृतिक हब में विकसित किया गया. 2010 में विकास योजना शुरू हुई, 2014 में मकबरे का आधिकारिक संरक्षण और पर्यटन शुरू हुआ, और 2016 में स्थाई परिसर का निर्माण किया गया. आज यह स्थल न केवल ऐतिहासिक महत्व रखता है, बल्कि झील, मछलियाँ और आधुनिक सुविधाओं के साथ पर्यटकों के लिए पूरी तरह तैयार है.
स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और अवसर
इस परियोजना का लाभ केवल पर्यटकों तक सीमित नहीं रहेगा. स्थानीय युवाओं और महिलाओं को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे. होटल व्यवसाय, गाइडिंग, परिवहन और हस्तशिल्प में उनकी भागीदारी बढ़ेगी. इस प्रकार, यह परियोजना सासाराम और आसपास के क्षेत्रों के सांस्कृतिक, सामाजिक और आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान देगी.
ऐतिहासिक और सांस्कृतिक प्रतीक
शेरशाह सूरी का मकबरा सिर्फ इतिहास का स्मारक नहीं, बल्कि सासाराम और बिहार की सांस्कृतिक, स्थापत्य और सामाजिक धरोहर का जीवंत प्रतीक है. हर पत्थर, नक्काशी, झील और तैरती मछलियाँ मध्यकालीन कला और प्रशासनिक दूरदर्शिता की याद दिलाती हैं. आधुनिक पर्यटन सुविधाओं और संरक्षित बगीचों के साथ, यह स्थल अब पर्यटकों, शोधकर्ताओं और छात्रों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बन चुका है. इतिहास से आधुनिक पर्यटन तक…शेरशाह सूरी का मकबरा सासाराम की पहचान बना रहा है.