Patna Mahavir Mandir : बिहार की राजधानी पटना का महावीर मंदिर , जिसे लोग आमतौर पर पटना हनुमान मंदिर भी केहते है , न केवल धार्मिक दृष्टि से, बल्कि सांस्कृतिक और सामाजिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान रखता है. यह मंदिर पटना जंक्शन रेलवे स्टेशन के ठीक सामने स्थित है और यहाँ रोज़ाना हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं. विशेषकर मंगलवार और शनिवार को यहां भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ती है.
क्यों की जाती है दो हनुमान प्रतिमा की पूजा ?
पटना महावीर मंदिर की सबसे खास बात यह है कि यहाँ दो हनुमान प्रतिमाओं की पूजा की जाती है. एक प्रतिमा दक्षिणमुखी हनुमान की है जबकि दूसरी उत्तरमुखी. मान्यता है कि दक्षिण मुखी हनुमान भक्तों के जीवन से संकट, रोग और नकारात्मक शक्तियों का नाश करते हैं, वहीं उत्तरमुखी हनुमान भक्तों को सुख, समृद्धि और शांति का आशीर्वाद देते हैं. इसी वजह से यहाँ दोनों प्रतिमाओं की एक साथ पूजा का विशेष महत्व है. कहा जाता है कि जो भक्त पूरे मनोयोग से दोनों प्रतिमाओं की आराधना करता है, उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं.
छोटे मंदिर से भव्य धरोहर तक की यात्रा
पटना का महावीर मंदिर कभी एक छोटा-सा स्थानीय मंदिर था. कहा जाता है कि आसपास के साधु-संत यहाँ पूजा-अर्चना करते थे. धीरे-धीरे स्थानीय लोगों की आस्था बढ़ी और यह स्थान धार्मिक केंद्र के रूप में पहचाना जाने लगा . ब्रिटिश दौर में पटना रेलवे स्टेशन के पास स्थित यह मंदिर यात्रियों और आम लोगों की आस्था का केंद्र बन गया. स्टेशन पर आने-जाने वाले लोग यहाँ रुक कर दर्शन करने लगे. इस तरह यह मंदिर पूरे क्षेत्र में प्रसिद्ध होने लगा . स्वतंत्रता के बाद मंदिर का महत्व और बढ़ गया. मंदिर के प्रबंधन और विकास के लिए महावीर स्थान न्यास समिति (ट्रस्ट) का गठन किया गया. इसी समय मंदिर का पुनर्निर्माण हुआ और इसे व्यवस्थित रूप दिया गया.
समाजसेवा की ओर कदम बढ़ाया गया 1980 से 1990 के समय , इस अवधि में मंदिर ट्रस्ट ने समाजसेवा और स्वास्थ्य सेवा की दिशा में बड़े कदम उठाए. सबसे बड़ा योगदान रहा महावीर कैंसर संस्थान और शोध केंद्र, पटना की स्थापना. इसके बाद अस्पताल और शिक्षा से जुड़े कई प्रोजेक्ट शुरू किए. आज पटना महावीर मंदिर उत्तर भारत के प्रमुख हनुमान मंदिरों में गिना जाता है. यहाँ प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं, जबकि मंगलवार और शनिवार को लाखों की भीड़ उमड़ पड़ती है. मंदिर की पहचान दो हनुमान प्रतिमाओं की पूजा, नैवेद्यम प्रसाद और समाज सेवा कार्यों से और भी खास हो गई है.
प्रसाद नैवेद्यम की क्या है विशेषता
महावीर मंदिर का एक और विशेष आकर्षण है यहाँ का नैवेद्यम प्रसाद. यह प्रसाद लड्डू के रूप में बनाया जाता है, जो पूरी तरह शुद्ध घी, बेसन और मिश्री से तैयार होता है. मंदिर के ट्रस्ट द्वारा इसे अत्यंत स्वच्छ और पारंपरिक विधि से बनाया जाता है. इस प्रसाद की इतनी लोकप्रियता है कि इसे देशभर में डाक द्वारा भी भेजा जाता है. कई श्रद्धालु तो विशेष रूप से यहाँ सिर्फ नैवेद्यम का प्रसाद लेने ही आते हैं.
पहचान से लोकप्रियता तक
पटना महावीर मंदिर का महावीर स्थान न्यास समिति (ट्रस्ट) न केवल मंदिर का संचालन करती है, बल्कि समाज सेवा और विकास के क्षेत्र में भी अग्रणी है. ट्रस्ट ने स्वास्थ्य, शिक्षा और धार्मिक धरोहरों को बढ़ावा देने के लिए कई संस्थान और परियोजनाएं शुरू की हैं. पटना का महावीर मंदिर यह साबित करता है कि जब आस्था और परंपरा समाजसेवा से जुड़ती है, तो वह केवल पूजा का स्थान नहीं रहती , बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा और शक्ति का स्रोत बन जाती है.