पटना। राजधानी पटना में आयोजित दो दिवसीय Makhana महोत्सव का उद्घाटन शनिवार को राज्य के कृषि मंत्री मंगल पांडेय ने किया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि महोत्सव का मुख्य उद्देश्य लोगों में मखाना की खेती के प्रति रुचि पैदा करना है। पांडे ने कहा कि जब भी विश्व स्तर पर मखाना का जिक्र होता है, तो बिहार का नाम अवश्य आता है। मखाना बिहार की पहचान बन चुका है। उन्होंने आगे बताया कि महोत्सव का उद्देश्य बिहार के मखाना की पहचान बढ़ाना और इसकी लोकप्रियता बढ़ाना है। बिहार सरकार किसानों के उत्पादन को बढ़ावा देने और उन्हें बाजार तक पहुंच प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि हमारे किसान समृद्ध हों। उन्होंने यह भी कहा कि बिहार दुनिया का 85 प्रतिशत मखाना पैदा करता है।
35,000 हेक्टेयर भूमि पर होती है खेती
ज्ञात हो कि फिलहाल बिहार में लगभग 35,000 हेक्टेयर भूमि पर मखाना की खेती होती है। इससे करीब 25,000 किसान प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से जुड़े है। इसको और बढ़ाने के लिए बिहार सरकार प्रयास कर रही हैं। सरकार के इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए मखाना उत्पादन और प्रसंस्करण को बढ़ाने के लिए आधुनिक मशीनरी के उपयोग को बढ़ावा देने की आवश्यकता है। इस महोत्सव की पहुंच और दृश्यता को व्यापक बनाने के लिए देश भर के अन्य राज्यों में भी इसका आयोजन किया जाएगा। महोत्सव में बिहार के विभिन्न जिलों के मखाना उत्पादकों ने अपने उत्पादों का प्रदर्शन किया। उपस्थित लोगों ने गुलाब जामुन, पेड़ा, लड्डू और बिस्कुट सहित मखाना से बने विभिन्न व्यंजनों का आनंद लिया।
Mithila Makhana के रूप में GI टैग
कृषि मंत्री ने इस बात पर भी प्रकाश डाला कि Mithila Makhana को भौगोलिक संकेत (GI) टैग दिया गया है, जो मखाना उत्पादन में बिहार की अद्वितीय स्थिति को रेखांकित करता है। इस कार्यक्रम में उत्पादन से संबंधित उन्नत तकनीकों का प्रदर्शन भी किया गया और मखाना क्षेत्र के विकास के लिए राज्य सरकार द्वारा उठाए गए प्रगतिशील कदमों को साझा किया गया। विशेष रूप से, मखाना मुख्य रूप से बिहार के दरभंगा, मधुबनी, सीतामढ़ी, पूर्णिया, कटिहार, सहरसा, मधेपुरा, सुपौल, अररिया और किशनगंज जिलों में उत्पादित किया जाता है।
(क्रेडिट – मीडिया इनपुट )