New Year Picnic spot : बिहार के कैमूर जिले में स्थित ऐतिहासिक मुंडेश्वरी धाम अब केवल धार्मिक आस्था का केंद्र ही नहीं, बल्कि एक लोकप्रिय पिकनिक और पर्यटन स्थल के रूप में भी अपनी अलग पहचान बना चुका है. खासकर नए साल के मौके पर यहां श्रद्धालुओं और पर्यटकों की भारी भीड़ उमड़ती है.हर साल 1 जनवरी को मंदिर के नीचे बाहरी क्षेत्र में जहां परिवार और युवा समूह पिकनिक मनाते नजर आते हैं, वहीं मंदिर परिसर में दर्शन-पूजन के लिए महिला-पुरुष भक्तों की लंबी कतारें लगती हैं. पंवरा पहाड़ी और उसके आसपास का इलाका पिकनिक स्पॉट के रूप में खासा लोकप्रिय है. यहां आने वाले लोग पारंपरिक बिहारी व्यंजनों जैसे लिट्टी-चोखा, पनीर और मशरूम की सब्जी, पकौड़े, जीरा राइस और पुलाव बनाकर उसका आनंद लेते हैं. खास बात यह है कि धाम क्षेत्र में लोग पूरी तरह शाकाहारी भोजन ही तैयार करते हैं.
मां मुंडेश्वरी वन्य प्राणी इको पार्क
मुंडेश्वरी धाम के समीप वन विभाग द्वारा विकसित मां मुंडेश्वरी वन्य प्राणी इको पार्क ने इस क्षेत्र के पर्यटन को नई ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया है. 14 एकड़ में फैले इस इको पार्क का उद्घाटन 24 सितंबर 2024 को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने किया था. उद्घाटन के बाद से ही यह पार्क सैलानियों के आकर्षण का बड़ा केंद्र बन गया है. आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल में 55,813, मई में 32,058, जून में 62,161, जुलाई में 40,191, अगस्त में 41,519, सितंबर में 17,686 और अक्टूबर में 46,108 पर्यटक इस पार्क का भ्रमण कर चुके हैं. चालू वित्तीय वर्ष में अब तक 3 लाख से अधिक सैलानी यहां पहुंच चुके हैं.
शारीरिक स्वास्थ्य और आध्यात्मिक चेतना का संदेश
इको पार्क में बाघ, हाथी, हिरण, भालू, बंदर और मोर की आकर्षक प्रतिमाएं, रंग-बिरंगे फूल, घने पौधे और हरियाली लोगों को अपनी ओर खींचती हैं. विशेष रूप से बंदर पार्क में स्थापित तीन बंदरों की प्रतिमाएं,एक कान बंद किए, दूसरा आंख और तीसरा मुंह बुरी बात मत सुनो, बुरी चीजें मत देखो और बुरा मत बोलो का संदेश देती हैं. यह इको पार्क स्थापत्य कला और पर्यावरण संरक्षण का बेहतरीन उदाहरण है. देश के सबसे प्राचीन मंदिरों में शुमार मां मुंडेश्वरी मंदिर के पास स्थित यह पार्क पारंपरिक रूपांकनों, मूर्तियों और सांस्कृतिक विरासत को सम्मान देने के साथ-साथ पर्यावरण-अनुकूल वास्तुकला को भी बढ़ावा देता है. इंद्रधनुषी पेर्गोला प्रवेश द्वार शांति और विविधता का प्रतीक हैं, जबकि सूर्य नमस्कार की मूर्तियां शारीरिक स्वास्थ्य और आध्यात्मिक चेतना का संदेश देती हैं.
इको-टूरिज्म का मजबूत पहचान
पार्क के मुख्य प्रवेश द्वार चट्टानों से बने मेहराब के रूप में हैं, जिन पर वन्यजीवों की आकृतियां उकेरी गई हैं. दूसरा प्रवेश द्वार पेड़ों के तनों और ऐतिहासिक आकृतियों से प्रेरित है, जो प्रकृति के बीच एक अनूठा अनुभव कराता है. बांस और धातु से बना पैदल पुल तथा वृक्ष-आश्रय संरचनाएं पर्यावरण संरक्षण, शिक्षा और सामुदायिक सहभागिता को मजबूती से जोड़ती हैं. कुल मिलाकर, मुंडेश्वरी धाम और उससे जुड़ा इको पार्क अब कैमूर जिले को धार्मिक पर्यटन के साथ-साथ इको-टूरिज्म के मानचित्र पर भी मजबूत पहचान दिला रहा है.