पिछले दिनों कांग्रेस के बड़े नेता Sam Pitroda ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया। इस्तीफा दिया या दिलवाया गया इस पर अपने अपने तर्क हैं। लेकिन इसके पीछे वजह नेता द्वारा दिया गया एक कथित विवादित बयान हैं। नेता के बयान से पार्टी ने भी पल्ला छाड़ लिया। लेकिन चुनावी माहौल मे दूसरे पार्टियों को बना बनाया मुद्दा मिल गया और विरोधी पार्टी ने खूब भुनाया। लेकिन कांग्रेस के इस नेता ने ऐसा क्या कहा जिससे विवाद हुआ? ऐसा क्या कहा जिससे विवाद हुआ? यह नेता कौन हैं? ऐसे सभी सवालों के जबाव जानने के लिए यह पूरा लेख पढिए।
सत्यनारायण गंगाराम पित्रोदा Sam Pitroda बने
विवादों से हटकर थोड़ा पीछे चलते हैं। क्योंकि यही छिपा है भारत के इस राजनेता की असली कहानी। उड़ीसा के तीतलागढ़ के सामान्य परिवार में जन्म लेने वाले सत्यनारायण गंगाराम पित्रोदा के पिता की इच्छा थी कि वो अंग्रेजी और गुजराती में निपूर्ण हो। इसलिए उन्हें गुजरात जाना पड़ा। जिसके बाद भौतिकी शास्त्र में पहली श्रेणी में एमएससी पढ़ाई पूरी कर उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक्स में मास्टर की उपाधि लेने शिकागो के इलिनॉय इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी में दाखिला ली। जिसके बाद अमेरिकी संस्कृति मे में खुद को ढालते ढालते सत्यनारायण गंगाराम पित्रोदा Sam Pitroda बन गए। इस बीच वो …
- 1964- उच्य शिक्षा के लिए अमेरिका गए।
- 1966- शिकागो में GET कंपनी जॉइन की
- 1980 – वे वेस्कॉम के वाइस प्रेसीडेंट बने।
- 1981 – भारत लौटे
- 1984 – भारत में सी-डॉट (Centre For Development Of Telematics)की स्थापना की। इसके बाद उन्होंने भारत में टेलीफोन क्रांति के लिए पहले ग्रामीण एक्सचेंज और फिर बड़ा डिजिटल एक्सचेंज को विकसित किया। इसके अलावा उन्होंने भारत सरकार के साथ टेलिकम्युनिकेशन, वाटर, लिटरेसी, इम्यूनाइजेशन, डेयरी प्रोडक्शन और ऑयलसीड्स पर काम किया।
- 1991 – राजीव गांधी के मौत के बाद शिकागो लौट गए
- 1995 -वर्ल्ड टेल के अध्यक्ष बने
- 2005 -भारतीय ज्ञान आयोग के अध्यक्ष बने। पित्रोदा इस पद पर 2009 तक बने रहे।
- 2009 – मनमोहन सिंह का सलाहकार बने इसके साथ उन्हें भारत के कैबिनेट मंत्री का दर्जा भी दिया गया।
- 2013- पित्रोदा सेंट्रल यूनिवर्सिटी ओर राजस्थान के चेयर मैन बने।
- इस्तीफा से पहले तक वो इंडियन ओवरसीज कांग्रेस के अध्यक्ष थे।
सैम पित्रोदा वर्तमान में इंडिया फूड बैंक, द ग्लोबल नॉलेज इनिशिएटिव और द इंस्टीट्यूट ऑफ ट्रांसडिसिप्लीनरी हेल्थ जैसे अन्य पांच एनजीओ के फाउन्डर हैं और इसके लिए काम कर रहें हैं। सैम यूनाइटेड नेशंस ब्रॉडबैंड कमीशन फॉर डिजिटल डेवलपमेंट के फाउंडिंग कमिश्नर भी रह चूकें हैं। फिलहाल पित्रोदा इंटरनेशनल टेलीकम्युनिकेशन यूनियन के एम-पावरिंग डेवलपमेंट बोर्ड के अध्यक्ष हैं। इसके आलवा दुनियाभर में 100 से ज्यादा कंपनियों के पेटेंट्स दाखिल कर चूकें हैं। सैम ने अपने अनुभव और ज्ञान के आधार पर पांच किताबें लिखी हैं।
Sam Pitroda ने पहले भी दिया है विवादों भरा बयान
यह पहली दफा नहीं हैं जब कांग्रेस नेता ने विवादित बयान दिया हैं। इससे पहले कई बार सैम विवादों में रहें हैं।
- लोकसभा चुनाव 2019 के दौरान 1984 के सिख दंगों को लेकर पूछे गए सवाल पर सैम ने बीजेपी पर हमला बोलते हुए कहा कि 1984 में क्या हुआ उसको छोड़िए, ये बताइए 2014 से 2019 तक क्या हुआ ? इस मुद्दे पर बात करिए। जिसके बाद उनके उस बयान पर काफी हंगामा हुआ। बाद में माफी मांगते हुए उन्होंने अपनी खराब हिन्दी को जिम्मेदार बताते हुए बयान वापस ली।
- उस साल सैम का एक और बयान चर्चा में रहा। सैम ने भारत के पुलवामा में हुए हमले को लेकर कहा कि हमलों का क्या हैं, होता रहता हैं। इससे पहले मुंबई में भी हुआ था। पुलवामा हमले में भारत के जवाबी कार्यवाई को उन्होंने गलत बताते हुए कहा था कि हम दुनियां से ऐसे नहीं जीत सकते। सैम के उस बयान से काफी हंगामा हुआ था।
- इसी साल पित्रोदा ने टेक्स को लेकर कहा था कि मध्यम वर्ग को स्वार्थी नहीं होनी चाहिए बल्कि उसे भी ज्यादा टेक्स के लिए तैयार रहना चाहिए। सैम के इस बयान पर भी पार्टी को स्पष्टीकरण देना पड़ा था।
- उससे पहले 2018 में सैम ने बीजेपी को घेरते हुए कहा था कि भारत में बेरोजगारी, मंहगाई, शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण समस्याओं पर कोई नहीं बोलता जबकि हर कोई राम हनुमान की बात करता हैं। मंदिर नहीं बना ऐसी बातें करता हैं। मंदिर बनने से लोगों को रोजगार नहीं मिलेगा। जिसके बाद वो एक बार फिर से चर्चा में आ गए।
Sam Pitroda के इस बयान से हुआ विवाद
दरअसल पिछले दिनों कांग्रेस के बड़े नेता और भारत में टेलीफोन क्रांति के जनक माने जाने वाले सैम पित्रोदा ने इंटरव्यू में अमेरिका में लागू इनहेरिटेंस टैक्स का ज़िक्र छेड़ते हुए कहा कि ऐसी व्यवस्था भारत में भी लागू होनी चाहिए। यह चुनावी मुद्दा तो बना लेकिन एक आम मतदाता को इसकी अधिक जानकारी की कमी और राजनीतिक पार्टियों के बड़े वोट बैंक का इस विषय से सीधे तौर पर संबंधित न होने के कारण यह एक बड़ा चुनावी मुद्दा नहीं बन सका, लेकिन बीजेपी ने इसे भुनाने की खूब कोशिश की। जिसके बाद बुध वार को एक बार फिर सैम पित्रोदा द्वारा अंग्रेज़ी अख़बार स्टेट्समैन को दिए गए उनके इंटरव्यू का एक हिस्सा सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। पित्रोदा उस इंटरव्यू में एक सवाल के जबाव में कहते दिख रहें हैं कि भारत जैसे विविधता से भरे देश को एकजुट रख सकते हैं, भारत के पूर्व में रहने वाले लोग चाइनीज़ जैसे दिखते हैं, देश के पश्चिम में रहने वाले अरब जैसे दिखते हैं, उत्तर में रहने वाले मेरे ख़्याल से गोरे लोगों की तरह दिखते हैं, तो दक्षिण में रहने वाले अफ़्रीकी जैसे लगते हैं। लेकिन इससे फ़र्क़ नहीं पड़ता, सभी भाई-बहन हैं। पित्रोदा ने कहा हम अलग-अलग भाषाओं, धर्मों और रीति-रिवाजों का सम्मान करते हैं। ये वही भारत है, जिस पर हमारा भरोसा है, जहां हर किसी का सम्मान है और हर कोई अपने आप से थोड़ा-बहुत समझौता करता है।
Sam Pitroda की गांधी परिवार से करीबी
सैम पित्रोदा का कांग्रेस खासकर गांधी परिवार से काफी करीबी रहा हैं। 1980 में भारत लौटे सैम को लेकर कहा जाता है कि उन्होंने इंदिरा गांधी के कहने पर ही अमेरिका की नागरिकता छोड़ भारत की नागरिकता ली थी। हालांकि उनके रिश्ते राजीव गांधी से काफी बेहतरीन थे। राजीव गंधी से उनकी नजदीकियों का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता हैं कि पूर्व प्रधानमंत्री के मृत्यु के बाद उन्होंने भारत छोड़ दिया। फिलहाल सैम शिकागो के इलिनोइस में अपनी पत्नी और दो बच्चों के साथ रह रहें हैं।