Kidney Disease : पेशाब में जलन, बार-बार पेशाब आना या हल्का दर्द इन लक्षणों को अक्सर लोग मामूली समझकर नजरअंदाज कर देते हैं. लेकिन डॉक्टरों का कहना है कि यूटीआई (यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन) को हल्के में लेना खतरनाक साबित हो सकता है. समय पर इलाज न होने पर यह संक्रमण किडनी तक पहुंचकर गंभीर रूप ले सकता है, जिसे Pyelonephritis (पाइलोनेफ्राइटिस) कहा जाता है.
क्या है पाइलोनेफ्राइटिस?
विशेषज्ञों के अनुसार पाइलोनेफ्राइटिस, यूटीआई का गंभीर रूप है, जिसमें संक्रमण सीधे किडनी को प्रभावित करता है. यह स्थिति कभी-कभी सेप्सिस का रूप भी ले सकती है, जहां बैक्टीरिया तेजी से खून में फैलने लगते हैं. ऐसे मामलों में मरीज का पल्स रेट बढ़ सकता है, ब्लड प्रेशर गिर सकता है और कई बार आईसीयू में भर्ती करने की नौबत भी आ सकती है.
किन लोगों को ज्यादा खतरा?
डॉक्टरों का कहना है कि डायबिटीज से पीड़ित लोग, मोटापे के शिकार मरीज, महिलाएं, बार-बार यूटीआई होने वाले लोग और किडनी स्टोन या प्रोस्टेट की समस्या से जूझ रहे मरीजों में यह जोखिम ज्यादा होता है. विशेषज्ञ बताते हैं कि डायबिटीज और मोटापे के मरीजों में एक और गंभीर स्थिति Emphysematous Pyelonephritis का खतरा बढ़ जाता है, जिसमें गैस बनाने वाले जीवाणु किडनी के भीतर विकसित हो जाते हैं.
क्या है इलाज?
गंभीर संक्रमण की स्थिति में मरीज को अस्पताल में भर्ती करना पड़ सकता है. डॉक्टरों के अनुसार इंजेक्शन के जरिए एंटीबायोटिक्स दी जाती हैं. इलाज 14 से 21 दिन तक चल सकता है. मरीज के ठीक महसूस करने के बाद भी पूरा कोर्स करना जरूरी है. भविष्य में संक्रमण से बचाव के लिए 12 से 16 सप्ताह तक प्रोफिलैक्टिक (रोकथाम) दवाएं दी जा सकती हैं. डॉक्टरों का जोर है कि एंटीबायोटिक्स केवल कल्चर और सेंसिटिविटी रिपोर्ट के आधार पर ही शुरू करनी चाहिए.
बचाव के लिए क्या करें?
- पेशाब को लंबे समय तक न रोकें.
- पर्याप्त पानी पिएं.
- पेशाब में जलन या दर्द होने पर तुरंत जांच कराएं.
- यूरिन रूटीन टेस्ट और कल्चर जांच अवश्य कराएं.
- डॉक्टर की सलाह के अनुसार सही मात्रा और सही अवधि तक दवा लें.
विशेषज्ञों का कहना है कि लापरवाही गंभीर जटिलताओं को जन्म दे सकती है. इसलिए पेशाब से जुड़े किसी भी असामान्य लक्षण को नजरअंदाज न करें और समय रहते चिकित्सकीय सलाह जरूर लें.