Maner Sharif, Patna: बिहार की राजधानी पटना से महज कुछ ही दूरी पर बसा एक छोटा सा गांव, उस गांव पहुंचते ही आपको एक ऐसा मोड़ मिलेगा जहां हवाओं से कुछ अलग सी खुशबू आती है जो कभी, “मनियार मठन” यानी “संगीतमय नगर” के नाम से जाना जाता था, जहां हर पत्थर में इतिहास की गाथा छुपी है, और अजीबोगरीब घटनाएं आम बात हैं. आज वहीं जगह मनेर शरीफ के नाम से जाना जाता हैं.
संगीत की यात्रा या फिर गुरुवार की शाम
मनेर शरीफ का नाम ही उसकी संस्कृत की गवाही हैं. प्राचीन काल में यह स्थान संगीत और कल का केंद्र हुआ करता था समय के साथ जब यहां सूफी संतों का आगमन हुआ तो इस स्थान में एक नई पहचान बनाई “शरीफ” का प्रत्यय लगाने से यह मनेर शरीफ बन गया जो पवित्रता का प्रतीक है. वहीं दूसरी और स्थानीय लोग बताते हैं कि हर गुरुवार की शाम मनेर शरीफ में कुछ खास होता है. दरगाह की चारों ओर एक अजीब सी रौनक छा जाती है यहां की हवाओं में कुछ अलग सी ताकत होती है डॉक्टर के द्वारा लाई लाख घोषित मरीज भी यहां आकर ठीक हो जाते हैं क्या यह केवल विश्वास का कमाल है या कुछ और ? यह रहस्य आज भी अनसुलझे हैं.
अनूठी गाथा दो दरगाहों की
मनेर शरीफ की असली पहचान यहां स्थित दो प्रसिद्ध दरगाहों से है. बड़ी दरगाह में विश्राम कर रहे सूफी संत मखदूम याहिया मनेरी, जिन्होंने अपने पूरे जीवन काल में हजारों लोगों को दिलों के प्रेम और भाईचारे का पाठ पढ़ाया. वही छोटी दरगाह में मखदूम शाह दौलत की समाधि है जो अपनी आध्यात्मिक शिक्षाओं के लिए आज भी लोगों के बीच याद की जाती है. यह दोनों दरगाहें केवल धार्मिक स्थल नहीं है, बल्कि मुगलकालीन स्थापत्य कला के बेजोड़ नमूने हैं. इनकी दीवारों की नकाशी का सुंदर डिजाइन और मीनारों की बड़ी कारीगरी देखने वालों को मंत्रमुग्ध कर देती है. यहां का हर कोना इस बात का प्रमाण है कि कलाकारों ने इन पत्थरों में अपनी भावनाओं को पिरो दिया हैं.
वो कुआं और 700 साल पुराना पेड़
दरगाह एक कुआं है जो की पिछले 600 सालों से कभी सुख नहीं वहीं दूसरी ओर एक पेड़ है जिसकी उम्र कम से कम 700 साल बताई जाती है अजीब बात यह है कि यह पेड़ कभी पूरी तरह सूखता ही नहीं और ना ही कभी पूरी तरह से हरा भरा होता है. मौसम बदले या न बदले, यह पेड़ अपनी इसी अवस्था में रहता हैं. एक और यह कुआं है जो सुखा हो बाढ़ हो या गर्मी इसका जलस्तर हमेशा एक सा रहता है. स्थानीय लोगों का मानना है कि यह पेड़ दरगाह के संरक्षक संतों की आत्मा का प्रतीक है. वही कुंए को वैज्ञानिकों ने विशेष प्राकृतिक स्त्रोत से जोड़कर देखने की कोशिश की लेकिन यहां के लोगों के लिए यह संतों की कृपा का अक्षय भंडार है.
मनेर शरीफ से जुड़ी कहानियां
वैसे तो यहां काफी सारी कहानियां प्रसिद्ध है जैसे रातों रात बदल जाने वाली दीवारें, सपनों में मिलने वाले संदेश ,खुद से खुल जाने वाले दरवाजे. यहां के स्थानीय लोगों का मानना है कि कई बार दीवारों पर लिखी अरबी और फारसी की बातें रातों-रात साफ हो गई हो और नहीं लिखावट दिखाई देने लगी. और यहां आने वाले लोगों का दावा है कि, वह सपने में किसी बुजुर्ग को देखते हैं. जो उन्हें जिंदगी की समस्याओं का हल बताता है. दिलचस्प बात यह है कि अलग-अलग लोग एक ही तरह के सपने देखने का दावा करते हैं. वही छोटी दरगाह में एक लकड़ी का पुराना दरवाजा है जो कई बार खुद से खुल जाता है चौकीदारों ने कई बार इसे बंद किया है लेकिन कई बार सुबह या फिर से खुला मिला है और तकनीकी जांच में भी कोई खराबी नहीं मिली.
विश्वास या अंधविश्वास
मनेर शरीफ की इन अजीबोगरीब घटनाओं को लेकर दो राय हैं. एक तरफ वैज्ञानिक सोच रखने वाले लोग और दूसरी तरफ ऐसे लोग जिनका अटूट विश्वास है. यहां की प्राकृतिक घटनाओं या मानसिक भ्रम से जोड़कर देखते हैं . आज की तकनीकी युग में भी यहां हर धर्म के लोग एक श्रद्धा से आते हैं “गंगा जमुनी तहजीब” का जीता जागता उदाहरण है मनेर शरीफ.
चाहे यह सब सच हो या श्रद्धा का कमाल मानेर शरीफ आज भी रहस्य से भरा हुआ है . यहां आने वाला हर व्यक्ति कुछ ना कुछ अनुभव लेकर जाता है. शायद यही इस जगह की असली ताकत है. लोगों के दिलों में उम्मीद की एक छोटी सी किरण जगाना और जिंदगी में चमत्कारों के लिए जगह बनाना.