लोकसभा चुनाव 2024 के लिए मतदान खत्म हो चुके है। जिसके बाद 4 जून को 7 चरणों में हुए मतदान की गणना की जाएगी। लोकसभा चुनाव के लिए इस बार 7 चरणों में वोटिंग हुई। लगभग 80 दिनों तक चलने वाले लोकतंत्र के महापर्व का समापन 4 जून को नतीजों की घोषणा के साथ हो जाएगा। नतीजों से पहले लोकसभा चुनाव के परिणामों का दर्शाने के लिए आज शाम 6:30 बजे के बाद सर्वे एजेंसी द्वारा मतदान के दौरान परिणामों के लिए किए गए सर्वें समाने आएगा। जिसके बाद करीब करीब यह साफ हो जाएगा कि इस बार किसकी सरकार बनने वाली वाली। लेकिन उससे पहले चलिए जानते हैं, पिछले परिणाम और exit poll में कितना अंतर या समानता रही।
जब exit poll के आँकड़े गलत साबित हुए
सर्वे एजेंसीयों द्वारा किए गए सर्वे और नतीजें करीब करीब एक ही होती हैं। लेकिन कभी कभी इसमें अंतर देखने को मिलता है। लेकिन अतीत में ऐसा कम ही देखने को मिला हैं। ऐसे मौके जब एग्जिट पोल के आँकड़े गलत साबित हुए।
- 2004 लोकसभा चुनाव : एग्जिट पोल के आंकड़ों में NDA सरकार को बहुमत के साथ सत्ता में वापसी के संकेत दिए जा रहे थे। लेकिन जब परिणाम आया तो इसका उलट रहा। जब लोकसभा चुनाव 2004 के परिणामों का ऐलान हुआ तो कांग्रेस की नेतृत्व में UPA की सरकार बनी।
- 2015 दिल्ली विधानसभा चुनाव : चुनाव परिणाम से पहले एग्जिट पोल के आंकड़ों में राष्ट्रीय राजधानी में किसी भी पार्टी को बड़ी जीत के संकेत नहीं थे। सर्वें के आंकड़ों के अनुसार राजधानी में आम आदमी पार्टी को 50 के आस पास सीटें जीतने का अनुमान लगाया जा रहा था। ललेकिन जब परिणाम सामने आए तो दिल्ली में कुल 70 सीटों मे 67 सीटों के साथ आप की सरकार बनी, वो भी प्रचंड बहुमत के साथ।
- 2015 बिहार विधानसभा चुनाव : 2014 में लोकसभा चुनाव के बाद बीजेपी को बिहार से बाहर करने लिए पूरा विपक्ष एक साथ आकर चुनाव लड़ रहा था। चुनाव हुए और जब एग्जिट पोल के आँकड़े सामने आए तो किसी भी गठबंधन को बहुमत नहीं मिलेगा ऐसा अनुमान लगाए जा रहे थे। लेकिन जब परिणाम आए तो राज्य में राजद, कांग्रेस, और जदयू की महागठबंधन ने बीजेपी की एनडीए गठबंधन भारी अंतर से हरा दिया।
- 2017 यूपी विधानसभा चुनाव : 2012 में महज 12 सीट जीतने वाली पार्टी बीजेपी के जीत का अनुमान एग्जिट पोल में किए जा रहें थे। लेकिन जब परिणाम सामने आए तो बीजेपी को 300 सौ से ज्यादा सीटें।
2014 में एग्जिट पोल
2014 में देश का मूड काफी हद तक पूर्वानुमानित था, लेकिन उनके लिए संख्याओं का खेल समझना काफी जटिल था। चाणक्य को छोड़कर, किसी भी पोलस्टर ने एनडीए की 300+ सीटों की भविष्यवाणी नहीं की थी। अधिकांश एजेंसियों ने संकेत दिया कि एनडीए बहुमत के निशान से थोड़ा ऊपर सरकार बना रहा था। आठ एग्जिट पोल के औसत ने एनडीए के लिए 283 सीटों और यूपीए के लिए 105 सीटों की भविष्यवाणी की। जब नतीजे सामने आए, तो एनडीए ने 336 सीटें हासिल कीं, जिसमें अकेले बीजेपी ने बहुमत का आंकड़ा पार किया। भगवा पार्टी को 282 सीटें मिलीं। यूपीए को 60 और कांग्रेस को 44 सीटें मिलीं।
2019 में एग्जिट पोल
2019 के exit poll में भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए को 306 सीटें मिलने का अनुमान लगाया गया था, जबकि यूपीए को 120 सीटें दी गई थीं। हालांकि, एनडीए ने अनुमान के विपरीत 352 सीटें हासिल कीं। भाजपा ने अकेले 303 सीटें हासिल कीं। वहीं, कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूपीए को 93 सीटें मिलीं, जबकि कांग्रेस ने अकेले 52 सीटें हासिल कीं।
चुनाव आयोग की क्या है गाइडलाइंस?
रिप्रेजेंटेशन ऑफ पीपुल्स एक्ट 1951 के मुताबिक, चुनाव आयोग द्वारा जारी गाइडलाइंस के अनुसार चुनाव की अधिसूचना जारी होने के बाद जब तक आखिरी मतदान न हो जाए, एग्जिट पोल के आँकड़े सार्वजनिक नहीं किए जा सकते है। कई चरणों में हो रहें मतदान के दौरान जब तक सभी चरणों में वोटिंग खत्म नहीं हो जाती, तब तक किसी तरह का कोई एग्जिट पोल नहीं दिखाए जा सकते। आखिरी चरण में मतदान खत्म होने आधे घंटे बाद एग्जिट पोल के नतीजे सार्वजनिक किए जाते हैं। ज्ञात हो कि एग्जिट पोल को लेकर पहली बार 1998 में चुनाव आयोग ने गाइडलाइंस जारी की थीं।
लोकसभा चुनाव 2024 के exit poll के आँकड़े
1998 के आम चुनाव में चुनाव आयोग ने आर्टिकल 324 के तहत 14 फरवरी 1998 की शाम 5 बजे से 7 मार्च 1998 की शाम 5 बजे तक एग्जिट पोल या ओपिनियन पोल के नतीजों को टीवी एवं अखबारों में छापने या दिखाने पर रोक लगा दिया था। अगर कोई इस नियम का उलंघन करता हैं तो उसे 2 साल तक की कैद या जुर्माना या फिर एक साथ दोनों की सजा हो सकती है। इसलिए चुनाव प्रक्रिया के दौरान एग्जिट पोल या चुनाव से जुड़ा कोई भी सर्वे नहीं दिखाया जा सकता है। लोकसभा चुनाव 2024 के एग्जिट पोल के आँकड़े सावर्जनीक करने पर 19 अप्रैल 2024 सुबह 7 बजे से 1 जून 2024 शाम को 6:30 बजे तक मनाही है।