Deep daan on kartik Purnima: कार्तिक पूर्णिमा की रात का दीपदान सिर्फ धार्मिक परंपरा नहीं बल्कि जीवन के अंधकार को मिटाने और आत्मा में दिव्य प्रकाश जगाने का माध्यम है। यह कार्तिक पूर्णिमा की रात नदी की लहरों पर जब हजारों दीपक तैरते हुए आगे बढ़ते हैं, मानो आकाश के तारे धरती पर नजर आने लगते हैं या केवल एक सुंदर नजारा नहीं बल्कि गहरा आध्यात्मिक रहस्य है जो सदियों से भारतीय संस्कृति का हिस्सा रहा है। इसी दिन को देव दीपावली भी कहा जाता है।
कार्तिक पूर्णिमा मोक्ष के द्वारा का रास्ता है, शास्त्रों में कहा गया है कि कार्तिक पूर्णिमा की रात पवित्र नदियों गंगा यमुना नर्मदा गोदावरी या किसी भी प्रवाहमान जल में दीपदान करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है यह दीपक आपकी आत्मा को परमात्मा से जोड़ती है। कहा जाता है कि हर दीपक जीवन में आने वाले उजाले का प्रतीक है, जब आप दीपक प्रवाहित करते हैं तो आप अपने जीवन के सभी अंधकार चाहे वह अज्ञानता हो दुख हो या नकारात्मकता सबको खुद से दूर कर देतेहैं।
कहा जाता है कि दीपदान करने से घर में सुख शांति समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है। मां लक्ष्मी प्रकाश से आकर्षित होती है, इस लिए दीपदान उनकी कृपा पाने का भी माध्यम है, कहा जाता है कि दीपदान से पितरों को भी शांति मिलती हैं।
कार्तिक पूर्णिमा को देव दीपावली या त्रिपुरारी पूर्णिमा भी कहते हैं। पौराणिक कथा के अनुसार इस दिन भगवान शिव ने त्रिपुरासुर नामक दैत्य का वध किया था। इस विजय की खुशी में देवताओं ने आकाश में दीपक जलाए और धरती पर भी दिवाली मनाई गई। वाराणसी में इस दिन देव दीपावली विश्व प्रसिद्ध है। 84 घाटों पर लाखों दीपक जलाए जाते हैं। कहते हैं इस रात भगवान शिव स्वयं काशी में विराजते हैं।
ज्योतिष और धर्मशास्त्र के अनुसार कार्तिक पूर्णिमा पर विषम संख्या में दीपक जलाने अत्यंत शुभ माना जाता है, जैसे 5 7 11 21 51 101 365 बाती वाला दीपक। वैदिक परंपरा में विषम संख्याओं को शुभ और पवित्र माना गया है, क्योंकि इन्हें पूर्ण नहीं किया जा सकता ठीक वैसे ही जैसे ईश्वर अपूर्ण है।