अमेठी में सेंध लगाने के बाद अब रायबरेली में बीजेपी Congress के गढ़ को ढहाने की कोशिश में लगी हुई है। इसके लिए अमेठी से स्मृति ईरानी भी प्रचार करने पहुंची। लेकिन सारी मेहनत अब खराब होती हुई दिखाई दे रही है। इसलिए नहीं क्योंकि यहां प्रियंका गांधी वाड्रा ने राहुल गांधी और कांग्रेस के लिए प्रचार का कमान संभाला हुआ है। बल्कि अपने ही बागी होते हुए दिखाई दे रहे हैं।
क्या है रायबरेली में बीजेपी का प्लान ?
दरअसल दिनेश प्रताप सिंह को लेकर अदिति सिंह बीजेपी नाराज दिखाई दे रहे हैं। ये वही दोनों नेता हैं। जिन्हें बीजेपी ने रायबरेली में Congress को तोड़ने के लिए अपने पार्टी में शामिल करवाया था। ताकि बीजेपी मजबूत हो सके और कांग्रेस के गढ़ में उसे मात दे सके,लेकिन 24 के रण में उलटी गंगा बहती दिख रही है। सबसे पहले दिनेश प्रताप सिंह को बीजेपी में लाया गया। दिनेश सिंह का पूरा परिवार रायबरेली की स्थानीय राजनीति में है। उनके एक भाई विधायक रहे। एक भाई जिला पंचायत अध्यक्ष हैं। रायबरेली में कहा जाता है कि इनके आवास पंचवटी से ही पूरे जिले की राजनीति नियंत्रित होती है। बिल्कुल ऐसे ही रायबरेली में अखिलेश सिंह का नाम चलता था। सात बार के विधायक अखिलेश भी दबंग थे और जिले की राजनीति में उनका दबदबा था। ये दोनों सोनिया गांधी के प्रति वफादार होते थे और इन दोनों ही वफदारों को बीजेपी ने Congress और सोनिया गांधी से छीन लिया।
नए उम्मीदवार से नाराज हैं कार्यकर्ता
2019 लोकसभा चुनाव में दिनेश प्रताप सिंह ने बीजेपी के टिकट पर सोनिया गांधी को कड़ी टक्कर भी दी लेकिन 2024 में राहुल गांधी को टक्कर देने के लिए फिर से दिनेश प्रताप सिंह पर भरोसा जताया गया है क्योंकि बहुत कम अंदर से सोनिया गांधी जीती थी। ऐसे में अदिति सिंह को लेकर खबरे हैं। आपको बता दें कि अखिलेश सिंह की मृत्यु होने के बाद उनकी बेटी अदिति सिंह उनकी उत्तराधिकार बनी और रायबरेली से वो पहले कांग्रेस की विधायक बनी पर अब बीजेपी में हैं। 2022 में बीजेपी के टिकट पर चुनी गईं हैं। लेकिन दिनेश को रायबरेली में 24 के रण में उतारने से अदिति नाराज है। उनके साथ-साथ पूर्व विधायक मनोज पांडेज भी खफा दिखाई दे रहे हैं।
बीजेपी नेताओं में आपसी मतभेद
दरअसल रायबरेली में कुछ ऐसा हुआ कि ये मतभेद खुलकर सबके सामने आ गया। कुछ दिनों पहले रायबरेली सदर से बीजेपी विधायक अदिति सिंह और ऊंचाहार से बागी सपा विधायक मनोज कुमार पांडे अपने निर्वाचन क्षेत्रों में दिनेश प्रताप सिंह के लिए प्रचार नहीं कर रहे हैं। मीडिया सूत्रों की माने तो केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अपने रायबरेली दौरे के दौरान दोनों को मनाने की भरपूर कोशिश की लेकिन सफलता मिली या नहीं ये कहना अभी थोड़ा मुश्किल है। रविवार को रायबरेली में अपने चुनाव प्रचार के बाद शाह दिनेश प्रताप सिंह को लेकर मनोज पांडे के घर गए और उनके लिए समर्थन मांगा। हालांकि कुछ बीजेपी नेताओं का कहना है कि वो औपचारिक रूप से बीजेपी में शामिल नहीं हुए है। ऐसे में उन्हें कोई पद देने का मतलब ही नहीं बनता है। लेकिन अगर उन्होंने दिनेश प्रताप सिंह के लिए प्रचार करते हुए दिखाई दिए तो बीजेपी उन्हें विधायक बना सकती है।
BJP के लिए रायबरेली की डगर मुश्किल
वहीं अदिति कही भी दिनेश के लिए प्रचार करते या वोट मांगते नहीं दिखाई दे रही है। शाह ने उनसे मुलाकात की उसके बाद उन्होंने एक्स पर अपने पिता के साथ फोटो शेयर करते हुए पोस्ट में लिखा कि उनके लिए अपने ‘उसूल’ से समझौता करना मुश्किल था। इस पोस्ट के अब कई मायने निकाले जा रहे हैं। ज्ञात हो कि 2019 के लोकसभा चुनावों के बीच तत्कालीन कांग्रेस विधायक अदिति सिंह ने आरोप लगाया था कि उनकी कार पर दिनेश प्रताप सिंह के भाई ने हमला किया था। बीजेपी में शामिल होने पर भी दिनेश के साथ उनके मतभेद दूर नहीं हो सके जिसकी तस्वीर अब सबको दिखाई दे रही है। वहीं अगर रायबरेली सीट पर बीजेपी की स्थिति की बात करें तो जीत अभी भी काफी दूर दिखाई दे रही है क्योंकि जातीय समीकरण के तहत बीजेपी कमजोर लग रही है। रायबरेली में 11 प्रतिशत राजपूत और 18 प्रतिशत के करीब ब्राह्मण मतदाता हैं और ब्राह्रण Congress के परंपरागत वोटर्स रहे हैं। इसलिए बीजेपी के लिए डगर मुश्किल लग रही है।