सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (UPA) मामले में दिल्ली पुलिस द्वारा गिरफ्तार न्यूज़क्लिक संपादक Prabir Purkayastha की याचिका पर सुनवाई के बाद उन्हें रिहा करने का आदेश दिया। सुप्रीम कोर्ट की न्यायमूर्ति बीआर गवई और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने कहा कि संपादक के गिरफ्तारी का क्या आधार था इसका जिक्र किए बगैर उनकी गिरफ़्तारी की गई और रिमांड कॉपी भी उपलब्ध नहीं कराई गई इसलिए उन्हें रिहा किया जाना चाहिए।
गिरफ़्तारी के लिए पुलिस को फटकार
अदालत ने कहा कि जमानत बांड भरने पर ट्रायल कोर्ट अपने शर्त रख सकता हैं। शीर्ष अदालत ने Prabir Purkayastha की गिरफ्तारी और रिमांड को अमान्य कर दिया जिन्हें पिछले साल दिल्ली पुलिस ने यूएपीए के तहत गिरफ्तार किया था। शीर्ष अदालत ने दिल्ली पुलिस से पूछा कि रिमांड को लेकर पहले पुरकायस्थ के वकील को सूचित क्यों नहीं किया, न्यूज़क्लिक संपादक को मजिस्ट्रेट के सामने पेश करने में उसकी “जल्दबाजी” के लिए भी कोर्ट ने उसकी खिंचाई की। सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने पूछा, “आपने उसके वकील को पहले से सूचित क्यों नहीं किया? आपने उसे पिछले दिन शाम को गिरफ्तार कर लिया। आपके पास उसे सूचित करने के लिए पूरा दिन था। सुबह 6 बजे उसे पेश करने की इतनी जल्दी क्या थी?
Prabir Purkayastha पर क्या थे आरोप ?
इससे पहले दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल ने प्रबीर पुरकायस्थ के खिलाफ अपने आरोपपत्र में आतंकवादी कृत्यों, गैरकानूनी गतिविधियों, आतंकवादी गतिविधियों के लिए धन जुटाने और साजिश में शामिल होने के सबूत दिए थे। न्यूज़क्लिक संपादक पर नेविल रॉय सिंघम और अन्य के साथ मिलकर भारत सरकार के प्रयासों की आलोचना करने और भारतीय दवा कंपनियों द्वारा निर्मित टीकों के खिलाफ लेख प्रकाशित करने की साजिश रचने का भी आरोप लगाया गया था।
कौन हैं Prabir Purkayastha
प्रबीर पुरकायस्थ 74 वर्ष के हैं और डिजिटल मीडिया न्यूज़क्लिक के संपादक हैं। पिछले छह महीने से ज़्यादा समय से वो देश विरोधी गतिविधि में शामिल होने के,दिल्ली पुलिस द्वारा लगाए गए आरोप में गिरफ्तार, जेल में बंद थे। उन पर डिजिटल मीडिया के ज़रिए ‘राष्ट्र-विरोधी प्रोपगैंडा’ करने के आरोप है और चीन से फंडिंग लेने के भी आरोप लगे थे।
अब जानिए क्या है पूरा मामला?
डिजिटल मीडिया पोर्टल न्यूजक्लिक पर आरोप लगे की कंपनी को विदेशों से फंडिंग मिल रही है। जिसके बाद इंफोर्समेंट डायरेक्ट्रेट (ED)ने तीन साल पहले जांच में पाया कि अमेरिकी करोड़पति नेविल रॉय सिंघम की ओर से कंपनी को फंडिंग दी गई। ED के जांच में इस बात का भी खुलासा हुआ कि तीन साल में न्यूजक्लिक को अलग लग जगहों से करीब 38 करोड़ रुपए की फंडिंग मिली जिसे कंपनी ने तीस्ता सीतलवाड़ समेत अन्य लोगों में बांटा। इसके बाद मामले में दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने अगस्त 2023 को न्यूजक्लिक और इसके संस्थापक के खिलाफ UAPA के तहत एफआईआर दर्ज की। और मामले में संपादक प्रबीर पुरकायस्थ को गिरफ्तार कर लिया गया। इस आरोप में न्यूजक्लिक के संपादक समेत कई पत्रकारों, समाजसेवियों के ठिकानों पर ED की स्पेशल सेल ने रेड भी की थी।