Chaitra Navratri : आज से चैत्र नवरात्रि के अवसर पर देशभर के मंदिरों और घरों में श्रद्धालु मां दुर्गा की आराधना में जुट गए हैं. नौ दिनों तक चलने वाले इस पर्व में देवी के नौ स्वरूपों नवदुर्गा की विधिवत पूजा की जाती है. इस बार भी पूजा के साथ-साथ देवी के वाहनों (सवारी) को लेकर धार्मिक और प्रतीकात्मक महत्व पर चर्चा तेज है. धार्मिक विद्वानों के अनुसार, दुर्गा सप्तशती सहित अन्य ग्रंथों में देवी के प्रत्येक रूप के साथ उनके वाहन का उल्लेख मिलता है, जो उनके गुण, शक्ति और स्वभाव को दर्शाता है.
नवदुर्गा और उनके वाहन
नौ दिनों तक चलने वाले इस पर्व में देवी के प्रत्येक स्वरूप की अलग-अलग पूजा की जाती है, जिनका विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व बताया गया है. धार्मिक ग्रंथों, विशेषकर दुर्गा सप्तशती में नवदुर्गा के स्वरूपों के साथ उनके वाहनों का भी विस्तृत वर्णन मिलता है. ये वाहन केवल सवारी नहीं, बल्कि देवी की शक्तियों, स्वभाव और प्रतीकों का प्रतिनिधित्व करते हैं.
पहले दिन से शुरू हुआ पूजन क्रम
नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है. मान्यता है कि वे हिमालय की पुत्री हैं और उनका वाहन नंदी बैल है, जो स्थिरता और धैर्य का प्रतीक माना जाता है. दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की आराधना होती है, जिन्हें तप और ज्ञान की देवी माना जाता है. तीसरे दिन मां चंद्रघंटा का पूजन किया जाता है, जिनका वाहन बाघ बताया जाता है और यह रूप साहस और युद्ध शक्ति से जुड़ा है. चौथे दिन मां कुष्मांडा की पूजा होती है, जिन्हें सृष्टि की रचयिता माना जाता है और उनका वाहन सिंह बताया गया है. पांचवें दिन मां स्कंदमाता की पूजा होती है, जो मातृत्व और संरक्षण का प्रतीक हैं, और सिंह पर सवार मानी जाती हैं. छठे दिन मां कात्यायनी की आराधना की जाती है, जिन्हें दानवों के विनाश की शक्ति के रूप में देखा जाता है. उनका वाहन बाघ बताया गया है.
सातवें दिन मां कालरात्रि की पूजा होती है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, उनका वाहन गधा है, जो अंधकार और अज्ञान के नाश का प्रतीक है. आठवें दिन मां महागौरी की पूजा होती है, जिनका वाहन बैल माना जाता है और यह शांति व संतुलन का प्रतीक है. नौवें दिन मां सिद्धिदात्री की आराधना की जाती है, जिन्हें कमल पर विराजमान बताया गया है.
क्या कहते हैं विशेषज्ञ
धर्माचार्यों का कहना है कि देवी के वाहन केवल पौराणिक विवरण नहीं, बल्कि गहरे प्रतीक हैं. सिंह और बाघ जहां शक्ति और साहस को दर्शाते हैं, वहीं बैल धैर्य और स्थिरता का प्रतीक है. गधा नकारात्मकता के अंत और कमल पवित्रता का संकेत माना जाता है. स्थानीय मंदिरों में पुजारियों के अनुसार, नवरात्रि के दौरान इन रूपों की पूजा करने से भक्तों में आत्मविश्वास, संयम और आध्यात्मिक ऊर्जा का विकास होता है.