जेडीयू में किसका कटेगा पत्ता तो भाजपा किसको देगी मौका..? राज्यसभा सीट को लेकर NDA में क्या हो रहा चर्चा

Bihar politics : मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की कार्यशैली को लेकर अक्सर कहा जाता है कि वे किसी भी नेता को लंबे समय तक एक ही पद पर टिके रहने का मौका कम ही देते हैं. खासकर राज्यसभा के मामले में उनकी पार्टी Janata Dal United (जेडीयू) में यह एक अनकहा नियम जैसा ही है. इसलिए माना जाता है कि कोई भी नेता अधिकतम दो कार्यकाल तक ही उच्च सदन में भेजा जाता है. दरअसल आगामी राज्यसभा चुनाव को लेकर बिहार की राजनीति में अटकलें तेज हो गई हैं.

जेडीयू में किसका कटेगा पत्ता?

अप्रैल में जेडीयू के दो वरिष्ठ नेताओं Ram Nath Thakur और Harivansh Narayan Singh का कार्यकाल समाप्त हो रहा है. दोनों पिछले करीब 12 वर्षों से राज्यसभा में पार्टी का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या पार्टी इस बार नए चेहरों को मौका देगी? रामनाथ ठाकुर पूर्व मुख्यमंत्री Karpoori Thakur के पुत्र हैं. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उन्हें पूरी तरह किनारे करना जेडीयू नेतृत्व के लिए आसान नहीं होगा. पार्टी के भीतर एक फॉर्मूला चर्चा में है, जिसके तहत ठाकुर को संगठन में बड़ी जिम्मेदारी, संभवतः कार्यकारी अध्यक्ष पद दी जा सकती है. ताकी यह अनकहा नियम भी रह जाए. वर्तमान कार्यकारी अध्यक्ष Sanjay Jha का प्रदर्शन संगठनात्मक दृष्टि से मजबूत माना जा रहा है, खासकर भाजपा के साथ तालमेल बनाए रखने में. अटकलें हैं कि यदि हरिवंश को दोबारा मौका नहीं मिलता, तो संजय झा को राज्यसभा भेजकर उपसभापति पद के लिए आगे बढ़ाया जा सकता है. हालांकि, पार्टी के एक धड़े की ओर से पूर्व आईएएस मनीष वर्मा के नाम की भी चर्चा है.

बिहार की अन्य सीटों का गणित

सिर्फ जेडीयू ही नहीं बल्कि Rashtriya Janata Dal (आरजेडी) और भाजपा खेमे में भी हलचल है. आरजेडी के Amarendra Dhari Singh और Prem Chand Gupta का कार्यकाल भी समाप्त हो रहा है. इसके अलावा Upendra Kushwaha का टेन्योर भी खत्म हो रहा है, जो भाजपा के समर्थन से राज्यसभा पहुंचे थे. विधानसभा में मौजूदा संख्या बल के आधार पर जेडीयू और Bharatiya Janata Party (भाजपा) दो-दो उम्मीदवार आसानी से जिता सकते हैं. आरजेडी के लिए अपने दम पर सीट जीतना मुश्किल माना जा रहा है. ऐसे में पांचवीं सीट को लेकर एनडीए की रणनीति अहम होगी.

भाजपा में किसे मिलेगा मौका?

भाजपा की ओर से कई नाम चर्चा में हैं. प्रदेश अध्यक्ष Nitin Nabin को लेकर कयास लगाए गए कि उन्हें राज्यसभा भेजा जा सकता है, लेकिन पार्टी सूत्रों का कहना है कि उन्हें बिना संसद सदस्य बने संगठन की जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है,कुछ वैसा ही मॉडल जैसा कभी Amit Shah के साथ अपनाया गया था, जब वे विधायक रहते हुए पार्टी अध्यक्ष बने थे. इसी तरह Nitin Gadkari भी राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के समय विधान परिषद सदस्य थे. भोजपुरी फिल्म अभिनेता और नेता Pawan Singh का नाम भी चर्चा में है. उन्होंने हालिया चुनाव प्रचार में सक्रिय भूमिका निभाई है, जिससे उनके राज्यसभा भेजे जाने की संभावनाओं को बल मिला है.

10 राज्यों की 37 सीटों के लिए चुनाव की अधिसूचना जारी

राज्यसभा की यह हलचल सिर्फ बिहार तक सीमित नहीं है. कुल 10 राज्यों की 37 सीटों के लिए चुनाव की अधिसूचना जारी हो चुकी है. नामांकन की अंतिम तिथि 5 मार्च निर्धारित है, जबकि जिन सीटों पर आवश्यकता होगी, वहां 16 मार्च को मतदान कराया जाएगा. बिहार में यह चुनाव न केवल सीटों के बंटवारे का सवाल है, बल्कि यह भी संकेत देगा कि जेडीयू और भाजपा अपने-अपने संगठनों में किस तरह की पीढ़ीगत और रणनीतिक बदलाव की तैयारी कर रहे हैं. आने वाले दिनों में नामों की औपचारिक घोषणा के साथ तस्वीर और साफ होगी.

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *