Bihar politcs : नीतीश कुमार के समृद्धि यात्रा का समापन पटना स्थित सम्राट अशोक कन्वेंशन सेंटर के ज्ञान भवन और बापू सभागार में हुआ. 16 जनवरी को शुरू हुई यह यात्रा राज्य के सभी 38 जिलों का दौरा करने के बाद गुरुवार को समाप्त हुई. समापन कार्यक्रम का आयोजन भव्य बापू सभागार में किया गया, जिसमें कई प्रमुख नेता शामिल हुए. इनमें रवि शंकर प्रसाद, उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और विजय सिन्हा समेत अन्य गणमान्य लोग उपस्थित थे. समापन दिवस का विशेष महत्व इसलिए भी रहा क्योंकि यह सम्राट अशोक की जयंती के साथ मेल खाता था.
यात्रा का राजनीतिक और प्रतीकात्मक महत्व
बिहार की राजनीति में नीतीश कुमार ने अपनी पहचान यात्रा के जरिए ही मजबूत की है. सत्ता में आने से पहले और फिर शासन के दौरान यात्रा से उपजी कई योजनाओं के सफल कार्यान्वयन के चलते ही नीतीश लंबे समय तक याद किए जाने वाले राजनेता रहेंगे. जानकार बाताते है कि नीतीश कुमार की समृद्धि यात्रा का अंतिम समय दो जिले नालंदा (मुख्यमंत्री की जन्मभूमि) और पटना (कर्मभूमि) में होना इसे प्रतीकात्मक रूप से खास बनाता है. ज्ञात हो कि नीतीश ने नालंदा से राजनीतिक यात्रा की शुरूआत की और फिर पटना में अपनी पहचान साबित की. इस दौरान उन्होंने कई ऐसे कार्य किए जो आज उनकी पहचान है. 24 नवंबर 2005 से बिहार की राजनीति का प्रमुख चेहरा रहे नीतीश कुमार राज्य के सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले मुख्यमंत्री बन चुके हैं. उन्होंने डॉ. श्रीकृष्णा सिंह के रिकॉर्ड को भी पीछे छोड़ दिया है.
विकास और योजनाओं पर जोर
समृद्धि यात्रा का समापन समारोह में अपने संबोधन के दौरान मुख्यमंत्री ने तीन प्रमुख मुद्दों पर जोर दिया. जिसमें पूर्व सरकारों, विशेषकर लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी के शासनकाल की आलोचना, अपने कार्यकाल में हुए विकास कार्य और केंद्र सरकार के प्रति आभार मुख्य रहा. उन्होंने एक बार फिर दोहराया कि 2005 में सत्ता संभालने के समय राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति खराब थी, जबकि अब इसमें बड़ा सुधार हुआ है. नीतीश कुमार ने अपनी सरकार की प्रमुख योजनाओं का जिक्र करते हुए बताया कि साइकिल और स्कूल यूनिफॉर्म योजनाओं से शिक्षा को बढ़ावा मिला, 5 लाख से अधिक शिक्षकों की नियुक्ति हुई और स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार हुआ, जहां पीएचसी में मरीजों की संख्या 39 से बढ़कर 11,600 प्रति माह हो गई. उन्होंने बताया कि राज्य में मेडिकल कॉलेजों की संख्या 6 से बढ़कर 11 हो गई है और जल्द ही 18 जिलों में मेडिकल कॉलेज स्थापित होंगे. मुख्यमंत्री ने सात निश्चय और कृषि रोडमैप का उल्लेख करते हुए कहा कि हर घर तक बिजली पहुंचाई गई, सोलर पैनल पर 50% सब्सिडी दी जा रही है और 94 लाख गरीब परिवारों को आर्थिक सहायता मिल रही है
केंद्र सरकार की सराहना
अपने भाषण में उन्होंने नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार का भी आभार जताया और कहा कि केंद्र से मिले सहयोग से बिहार में विकास कार्यों को गति मिली है. अपने संबोधन के अंत में नीतीश कुमार ने जनता से समर्थन की अपील करते हुए कहा कि आप याद रखिए, बिहार बहुत आगे बढ़ेगा.
नीतीश को कितने नंबर
सार्वजनिक तौर पर यह कहा जा रहा है कि यह नीतीश कुमार का आखिरी बड़ा संबोधन हो सकता है. अपने इस भाषण में उन्होंने भले ही राज्य की वर्तमान व्यवस्थाओं और अपनी सरकार की उपलब्धियों को गिनाया हो, लेकिन सबसे बड़ा सवाल अब भी अनुत्तरित है कि बिहार की राजनीति से दूर दिल्ली और राज्यसभा की राजनीति की ओर बढ़ रहे नीतीश कुमार के 25 साल के शासन का स्पष्ट रोडमैप क्या है? रोजगार, स्वास्थ्य, शिक्षा और पलायन जैसे अहम मुद्दों पर सरकार की उपलब्धियों का दावा जरूर किया जाता है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे अलग नजर आती है. अपने इस अंतिम संबोधन में उन्होंने यह भी स्पष्ट नहीं किया कि बिहार की जिम्मेदारी वे किसके भरोसे और किन कंधों पर छोड़कर जा रहे हैं.
यह सवाल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पिछले चुनाव में जनता ने उनके नेतृत्व में एनडीए सरकार को भारी समर्थन दिया था. नीतीश कुमार के चेहरे और उनके मुख्यमंत्री बनने पर जनता ने भरोसा जताया था. लेकिन चुनाव के कुछ ही महीनों बाद उनका राज्य की राजनीति से दूरी बनाना और राष्ट्रीय राजनीति को प्राथमिकता देना कई सवाल खड़े करता है. 2005 में जब उन्होंने सत्ता संभाली थी, तब बिहार विशेष राज्य के दर्जे और केंद्र की सहायता की उम्मीदों पर खड़ा था. आज, इतने वर्षों बाद भी रोजगार, उद्योग, पलायन, स्वास्थ्य, शिक्षा और बुनियादी ढांचे जैसे मुद्दे पूरी तरह संतोषजनक स्थिति में नहीं पहुंच पाए हैं. ऐसे में उनकी गैरमौजूदगी इन मुद्दों पर कितना असर डालेगी, यह आने वाला समय बताएगा. फिलहाल इतना तय है कि नालंदा से शुरू होकर पटना के रास्ते दिल्ली तक पहुंची उनकी राजनीतिक यात्रा एक बार फिर दिल्ली की ओर बढ़ती दिखाई दे रही है.