Prashant Kishor : प्रशांत किशोर (पीके) ने सुप्रीम कोर्ट की हालिया टिप्पणी पर तंज कसते हुए कहा कि चुनाव हारने के बाद अदालत जाने पर सवाल उठाना उचित नहीं है. उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जिस व्यक्ति को अन्याय महसूस होता है, वही न्यायालय का दरवाजा खटखटाता है.
क्या है मामला
दरअसल सुप्रीम कोर्ट ने हाला ही में दायर एक याचिका पर सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने टिप्पणी की थी कि याचिकाकर्ता चुनाव हारने के बाद अदालत पहुंचे हैं. इस पर प्रतिक्रिया देते हुए किशोर ने कहा कि हारा हुआ व्यक्ति ही न्याय की उम्मीद में अदालत जाता है. यदि किसी को लगता है कि उसके साथ गलत तरीके से चुनाव हराया गया है तो वह न्यायालय ही जाएगा. उन्होंने कहा कि यह मामला सुप्रीम कोर्ट के बजाय हाई कोर्ट के अधिकार क्षेत्र का बताया गया है और वे अब हाई कोर्ट में याचिका दायर करेंगे.
शराबबंदी पर केंद्र और यूपी में लागू करने की मांग
किशोर ने बिहार में लागू शराबबंदी कानून को लेकर भी सरकार पर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि यदि बिहार में शराबबंदी से महिलाओं का सशक्तिकरण हो रहा है, तो इसे उत्तर प्रदेश सहित पूरे देश में लागू किया जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि अगर यह योजना इतनी सफल है तो देशभर की महिलाओं को इसका लाभ मिलना चाहिए. उन्होंने यह भी कहा कि केंद्र में और बिहार में दोनों जगह राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की सरकार है, ऐसे में प्रधानमंत्री को इसे राष्ट्रीय स्तर पर लागू करना चाहिए.
बढ़ते अपराध पर सरकार को घेरा
बिहार में बढ़ते अपराधों का मुद्दा उठाते हुए किशोर ने कहा कि जहां भी जघन्य अपराध होते हैं, जन सुराज के लोग पीड़ितों की आवाज बनने की कोशिश करते हैं. उन्होंने जहानाबाद की एक छात्रा के मामले का जिक्र करते हुए कहा कि शुरुआत में पुलिस ने इसे आत्महत्या बताया था, लेकिन जन स्वराज के हस्तक्षेप के बाद एसआईटी का गठन हुआ और संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई की गई.
स्वरोजगार और पेंशन पर सरकार को घेरने की तैयारी
किशोर ने राज्य सरकार की ओर से घोषित स्वरोजगार सहायता और पेंशन राशि को लेकर भी टिप्पणी की. उन्होंने कहा कि पहले ₹2000 पेंशन की मांग की गई थी, जिसे सरकार ने बढ़ाकर ₹1100 कर दिया. उनका दावा है कि जन स्वराज की ओर से आर्थिक सहायता की बात उठाने के बाद सरकार ने सीमित राशि की घोषणा की. उन्होंने कहा कि यदि सरकार वास्तव में प्रत्येक परिवार को स्वरोजगार के लिए ₹2 लाख देने का वादा पूरा करती है तो उन्हें खुशी होगी, लेकिन यदि छह महीने बाद शेष राशि नहीं दी जाती है तो जन स्वराज आंदोलन करेगा. किशोर ने कहा कि उनकी पार्टी का उद्देश्य सत्ता पाना नहीं, बल्कि राज्य के परिवारों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है. उन्होंने आरोप लगाया कि यदि वादे पूरे नहीं किए गए तो यह जनता के साथ धोखा होगा और इसके खिलाफ आवाज उठाई जाएगी.