why india did not play fifa world cup : 11 जून 2026 से दुनिया के सबसे बड़े खेल आयोजनों में से एक, फीफा वर्ल्ड कप 2026 का आगाज़ हो चुका है. इस बार का टूर्नामेंट कई मायनों में ऐतिहासिक है. पहली बार तीन देश अमेरिका, मेक्सिको और कनाडा मिलकर इसकी मेजबानी कर रहे हैं. 16 शहरों में खेले जाने वाले 104 मुकाबलों के बाद दुनिया को नया फुटबॉल चैंपियन मिलेगा. इस बार टूर्नामेंट का स्वरूप भी बदला हुआ है. पहली बार 48 देशों की टीमें विश्व कप में हिस्सा ले रही हैं. इससे पहले 32 टीमों के बीच मुकाबला होता था. यानी दुनिया भर के 16 नए देशों को फुटबॉल के सबसे बड़े मंच पर अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिला है. लेकिन भारतीय फुटबॉल प्रेमियों के लिए एक बार फिर निराशा की खबर यही है कि भारत इस महाकुंभ का हिस्सा नहीं है. और इससे भी बड़ी बात यह है कि भारत आज तक फीफा वर्ल्ड कप में एक भी मैच नहीं खेल पाया है.
जब बिना खेले वर्ल्ड कप के लिए क्वालिफाई कर गया था भारत
हालांकि बहुत कम लोगों को पता है कि भारत कभी फीफा वर्ल्ड कप खेलने के बेहद करीब पहुंच चुका था. बात है साल 1950 की जब ब्राजील में आयोजित होने वाले फीफा वर्ल्ड कप के लिए भारत ने आधिकारिक रूप से क्वालिफाई कर गया था. दरअसल उस समय दूसरे विश्व युद्ध के कारण 1942 और 1946 के विश्व कप आयोजित नहीं हो सके थे और 12 साल बाद टूर्नामेंट की वापसी हो रही थी. क्वालिफिकेशन के दौरान भारत को बर्मा (वर्तमान म्यांमार) और फिलीपींस के साथ ग्रुप-10 में रखा गया था. लेकिन दोनों देशों ने अपना नाम वापस ले लिया, जिसके कारण भारत बिना कोई मैच खेले ही विश्व कप के लिए क्वालिफाई कर गया. इसके बाद फाइनल ड्रॉ में भारत को पूल-3 में रखा गया था, जहां उसका मुकाबला स्वीडन, इटली और पराग्वे जैसी टीमों से होना था. लेकिन भारतीय टीम ने अपना नाम वापस ले लिया.
क्या भारत इतिहास रच सकता था?
जाने माने फुटबॉल पत्रकार और इतिहासकार Novy Kapadia, वर्ल्ड कप फुटबॉल की गाइड बुक में लिखते है कि उस समय पराग्वे की टीम बहुत मजबूत नहीं थी, और इटली भी कई कारणों से कमजोर स्थिति में थी. उनके अनुसार भारत के पास ग्रुप में सम्मानजनक प्रदर्शन करने और संभवतः दूसरे स्थान के लिए चुनौती पेश करने का अवसर था. लेकिन ऐसा नहीं हो सका.विशेषज्ञ मानते हैं कि विश्व कप में भागीदारी नहीं लेने से भारतीय खिलाड़ियों को जो अमूल्य अंतरराष्ट्रीय अनुभव मिलता, वो आगे चलकर भारतीय फुटबॉल के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता था. लेकिन ऐसा नहीं हो सका.
आखिर भारत ने नाम क्यों वापस लिया?
हालांकि यह सवाल आज भी भारतीय फुटबॉल इतिहास के सबसे बड़े रहस्यों में गिना जाता है कि आखिर भारत ने नाम क्यों वापस लिया? उस समय All India Football Federation (एआईएफएफ) ने आधिकारिक रूप से कहा था कि टीम चयन को लेकर मतभेद और पर्याप्त तैयारी समय की कमी के कारण भारत ने विश्व कप से नाम वापस ले लिया. उसके बाद वर्षों तक यह चर्चा भी होती रही कि भारतीय खिलाड़ी नंगे पैर खेलना चाहते थे और फीफा ने इसकी अनुमति नहीं दी. लेकिन कई खेल इतिहासकार इस दावे को मिथक मानते हैं.
वरिष्ठ खेल पत्रकार Jaideep Basu अपनी पुस्तक Box to Box: 75 Years of the Indian Football Team में लिखते है कि भारतीय खिलाड़ियों के पास स्पाइक बूट उपलब्ध थे और कई खिलाड़ी उनका इस्तेमाल भी करते थे. इसलिए उनके अनुसार फीफा द्वारा नंगे पैर खेलने पर प्रतिबंध भारत के हटने का वास्तविक कारण नहीं था. ज्ञात हो कि उस दौर में दुनिया के कई देशों के खिलाड़ी पैरों पर मोटी पट्टियां बांधकर खेलते थे और यह प्रथा 1950 के दशक तक आम थी.
आज भी क्यों नहीं पहुंच पाया भारत?
1950 के बाद से भारत कभी भी फीफा वर्ल्ड कप के मुख्य दौर के लिए क्वालिफाई नहीं कर पाया. दरअसल, विश्व कप तक पहुंचने के लिए भारतीय टीम को एशियाई फुटबॉल परिसंघ (AFC) के कठिन क्वालिफिकेशन दौर से गुजरना पड़ता है, जहां उसका सामना जापान, दक्षिण कोरिया, ऑस्ट्रेलिया, सऊदी अरब, ईरान और कतर जैसी मजबूत टीमों से होता है. हालिया वर्षों में भी भारत का प्रदर्शन उम्मीदों के अनुरूप नहीं रहा. फीफा वर्ल्ड कप 2026 क्वालिफायर्स के दूसरे चरण में भारत अपने समूह में तीसरे स्थान पर रहा और अगले दौर में पहुंचने में असफल रहा. लगातार खराब अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शन और फीफा रैंकिंग में गिरावट ने भी टीम की चुनौतियों को बढ़ाया है. ऐसे में जब दुनिया 2026 फीफा वर्ल्ड कप के रोमांच में डूबी हुई है, तब भारत के करोड़ों फुटबॉल प्रेमी उस दिन का इंतजार कर रहे हैं जब तिरंगा पहली बार फीफा वर्ल्ड कप के मैदान पर लहराएगा और भारत विश्व फुटबॉल की बादशाह बनेगी. फिलहाल, दुनिया की 48 सर्वश्रेष्ठ टीमें विश्व फुटबॉल की बादशाहत के लिए संघर्ष कर रही हैं.
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