सम्राट चौधरी पर हत्या का केस, अशोक चौधरी की 100 करोड़ की प्रॉपर्टी पर सवाल

Prashant Kishor Press Conference: जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर (पीके) ने सोमवार को पटना में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बिहार की राजनीति में हलचल मचा दी है. उन्होंने डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी और ग्रामीण निर्माण मंत्री अशोक चौधरी पर गंभीर आरोप लगाए. पीके ने सम्राट चौधरी को छह लोगों की हत्या का अभियुक्त बताते हुए उन्हें पद से हटाने और गिरफ्तार करने की मांग की. पीके ने कहा कि सम्राट चौधरी 6 लोगों की हत्या के आरोपी हैं. बिहार के राज्यपाल, राज्य सरकार और केंद्र सरकार से मेरा अनुरोध है कि उन्हें पद से हटाकर गिरफ्तार किया जाए. तारापुर केस नंबर 44/1995 के तहत यह मामला दर्ज हुआ था. सुप्रीम कोर्ट के दस्तावेज़ में भी इसका उल्लेख है. उस समय इन्हें नाबालिग बताकर जेल से रिहा किया गया था. लेकिन उनके 2020 के चुनावी दस्तावेज़ के मुताबिक, उस समय उनकी उम्र 26 साल होनी चाहिए थी.

उन्होंने चेतावनी दी कि अगर पुलिस कार्रवाई नहीं करती है, तो वे अदालत का दरवाजा खटखटाएंगे. प्रशांत किशोर के आरोपों को डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी ने बेबुनियाद करार दिया. उन्होंने कहा कि 1997-98 में ही कोर्ट ने मुझे बरी कर दिया था. पीके के पास कोई मुद्दा नहीं है. वे सिर्फ परसेप्शन का खेल खेल रहे हैं. इसके साथ साथ प्रशांत किशोर ने ग्रामीण निर्माण मंत्री अशोक चौधरी और उनके परिजनों की संपत्तियों पर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि अशोक चौधरी की बेटी शांभवी चौधरी की शादी के बाद 100 करोड़ की प्रॉपर्टी न्यास बोर्ड की ओर से खरीदी गई है. वैभव विकास ट्रस्ट ने पिछले एक साल में इतनी बड़ी संपत्ति कैसे खरीदी, यह बताना होगा. जियालाल आर्य, अनीता कुणाल (किशोर कुणाल की पत्नी) और प्रत्यय अमृत की सासू मां के नाम भी इस प्रॉपर्टी में जुड़े हैं.

प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रशांत किशोर ने राजद पर भी निशाना साधा. तेजस्वी यादव द्वारा भ्रष्ट नेताओं की सूची तैयार करने पर पीके ने तीखा तंज कसा. उन्होंने कहा कि तेजस्वी को सबसे पहले अपने मामा और फिर अपने माता-पिता का नाम उस सूची में लिखना चाहिए. सबको पता है कि उनके माता-पिता ने कितने लोगों की जमीन पर कब्जा किया. आरजेडी तो जानी-पहचानी चोर पार्टी है, इसीलिए हम इसपर ज्यादा कुछ नहीं कहते.

इस दौरान पार्टी फंडिंग को लेकर उठे सवालों पर पीके ने कहा कि हमारे पास लक्ष्मी हमारी सरस्वती की वजह से आती है. जिनकी मदद की, उन्होंने हमें फीस दी. पिछले तीन साल में मैंने अपनी सेवाओं की फीस के तौर पर 241 करोड़ रुपये जुटाए हैं. इस रकम पर 30 करोड़ 95 लाख रुपये जीएसटी और 20 लाख रुपये इनकम टैक्स चुकाया है.

इस प्रेस कॉन्फ्रेंस से बिहार की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है. अब देखना होगा कि आरोपों और जवाबी हमलों के बीच यह मामला कितना आगे बढ़ता है.

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