सीटों के बंटवारे पर महागठबंधन में बढ़ा तनाव..! कांग्रेस और वीआईपी ने राजद के खिलाफ कसे तेवर

Bihar Seat Sharing : बिहार विधानसभा चुनाव से पहले महागठबंधन और एनडीए दोनों ही खेमों में सीट बंटवारे की चर्चाएं तेज हो गई हैं. महागठबंधन खेमे में कांग्रेस और विकासशील इंसान पार्टी (VIP) जैसे सहयोगी दल अपने हिस्से की सीटों के लिए दबाव बढ़ा रहे हैं. स्थिति और पेचीदा इसलिए भी हो गई है क्योंकि महागठबंधन में दो और दल पशुपति कुमार पारस की राष्ट्रीय लोक जनता दल (RLJP) और झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के जुड़ने की संभावना जताई जा रही है.

कांग्रेस का रुख और सीटों की मांग

कांग्रेस इस बार बिहार विधानसभा की कम से कम 70 सीटों की मांग कर रही है. गौरतलब है कि 2020 के विधानसभा चुनाव में भी कांग्रेस ने इतनी ही सीटों पर चुनाव लड़ा था, लेकिन महज 19 सीटों पर जीत दर्ज कर पाई थी. उसी चुनाव में राजद ने 144 सीटों पर किस्मत आजमाई थी और 75 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी. हालांकि एनडीए ने कुल 125 सीटें जीतकर सत्ता में वापसी की थी. पिछली हार का ठीकरा कांग्रेस के खराब स्ट्राइक रेट पर फोड़ा गया था, लेकिन इस बार पार्टी अपने लिए सम्मानजनक हिस्सेदारी की मांग कर रही है. सूत्रों के मुताबिक,राहुल गांधी की वोटर अधिकार यात्रा से मिली भीड़ और उत्साह ने कांग्रेस को नए आत्मविश्वास से भर दिया है.

कांग्रेस नेताओं का कहना है कि उनका प्रदर्शन सिर्फ 2020 को आधार बनाकर नहीं आंका जा सकता. कांग्रेस नेताओं ने यह भी याद दिलाया कि 2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने बिहार से तीन सीटें जीती थीं,जबकि राजद के खाते में केवल चार सीटें आई थीं.

कांग्रेस की राजद पर दबाव की रणनीति

राजद एक ओर जहां मुख्यमंत्री पद पर दावा जता रही है, वहीं कांग्रेस उसे खुलकर चुनौती देने से परहेज नहीं कर रही. दिल्ली में कांग्रेस के बिहार प्रभारी कृष्णा अल्लावरु ने बुधवार को कहा कि बिहार की जनता ही मुख्यमंत्री का फैसला करेगी. राजनीतिक हलकों में इस बयान को राजद को सतर्क रखने की कांग्रेस की रणनीति माना जा रहा है. कांग्रेस चाहती है कि राजद तेजस्वी यादव को महागठबंधन का सर्वमान्य मुख्यमंत्री चेहरा घोषित करने में जल्दबाजी न करे.

कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि हमारे अभियानों ने बिहार संगठन को नई ऊर्जा दी है. राजद को हमारे साथ एक राष्ट्रीय पार्टी के रूप में सम्मानजनक व्यवहार करना चाहिए. नई पार्टियों को शामिल करने की स्थिति में सबको अपनी सीटों से समझौता करना होगा और अच्छी-बुरी सीटों का संतुलन भी बनाना होगा.

वीआईपी भी बना रही राजद पर दबाव

कांग्रेस के बाद वीआईपी प्रमुख मुकेश सहनी ने भी राजद पर दबाव बढ़ा दिया है. सहनी ने खुद को उपमुख्यमंत्री बनाने की मांग के साथ-साथ 60 सीटों की दावेदारी ठोंकी है. हालांकि राजनीतिक पर्यवेक्षक मानते हैं कि सहनी अंततः 20–25 सीटों पर राजी हो सकते हैं. राजद खेमे के एक नेता ने बताया कि 2024 लोकसभा चुनाव में वीआईपी को तीन सीटें दी गई थीं. ऐसे में विधानसभा चुनाव में उसकी हिस्सेदारी 18–20 सीटों तक सीमित होनी चाहिए. लेकिन कांग्रेस और वीआईपी दोनों की आक्रामक मांगों ने स्थिति जटिल बना दी है.

क्या होगा राजद का अगला कदम

महागठबंधन की एक अहम बैठक अगले हफ्ते होने वाली है, जिसमें सीट बंटवारे पर अंतिम फैसला होने की उम्मीद है. लेकिन कांग्रेस और वीआईपी के बढ़े तेवरों ने साफ कर दिया है कि महागठबंधन के लिए आपसी तालमेल बैठाना आसान नहीं होगा. अब देखना यह होगा कि राजद कैसे अपने सहयोगियों को साध पाती है और सीटों का समीकरण किस रूप में सामने आता है.

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