12 वोटो से तय हुआ था पिछला चुनाव 2025 में किसका होगा यहां जलवा?

Hilsa vidhanshabha seat: बिहार में स्थित हिल्सा विधानसभा क्षेत्र में केवल राज्य की राजनीति में बल्कि ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान रखती है. राजधानी पटना से मात्र 43 किलोमीटर दूर और जिला मुख्यालय बिहारशरीफ से 32 किलोमीटर की दूरी पर स्थितियां क्षेत्र सोन और फल्गु नदी के निकट बस हुआ है. प्राचीन काल में इसे हलधरपुर के नाम से भी जाना जाता था जिसका संबंध द्वापर युग तक बताया जाता है.

हिलसा नाम को लेकर आम धारणा यह है कि यह मछली से जुड़ा है, लेकिन वास्तविकता कुछ और है. इसकी उत्पत्ति के बारे में दो प्रमुख मत है, पहले धारणा के अनुसार प्राचीन नाम हलधरपुर समय के साथ अपभ्रंश होकर हिल्सा बन गया, दूसरी मान्यता यह है यह नाम हरिनंदन प्रसाद उर्फ हिल्सा बाबू के नाम पर पड़ा है.

हिलसा विधानसभा क्षेत्र की स्थापना 1957 में हुई थी, और यह नालंदा लोकसभा क्षेत्र के साथ विधानसभा क्षेत्र में से एक है इस क्षेत्र में हिलसा, करायपरसुरया, थरथरी और परवलपुर प्रखंड भी शामिल हैं यह मुख्यता ग्रामीण क्षेत्र है जहां केवल 12.45% मतदाता शहरी हैं 2020 के चुनाव में यहां अनुसूचित जाति के मतदाता 18.37 प्रति परसेंट और मुस्लिम मतदाता लगभग 1.99 परसेंट द 2020 में यहां 54% मतदान हुआ था जो बिहार के औसत मतदान प्रतिशत के अनुरूप संतोषजनक माना जाता है.

2000 से 2020 तक के 6 चुनाव में समता पार्टी/जेडीयू ने पांच बार जीत दर्ज की है,केवल 2015 में यह सीट राजद के खाते में गई थी. जब जेडीयू ने बीजेपी से गठबंधन तोड़कर महागठबंधन (राजद, जेडीयू और कांग्रेस) में शामिल होने का निर्णय लिया था, इस दौरान राजद, जनता पार्टी, इंडियन पीपल फ्रंट और जनता दल ने भी एक-एक बार जीत हासिल की है.

2020 का विधानसभा चुनाव हिंसा की इतिहास में सबसे रोमांचक और विवाद पर चुनाव रहा इस चुनाव में जेडीयू के कृष्ण मुरारी शरण उर्फ प्रेम मुखिया ने राजद के अत्रि मुनि उर्फ शक्ति यादव को मात्र 12 वोटो के अंतर से हराया था, यह बिहार के चुनावी इतिहास में सबसे करीबी मुकाबले में से एक था, वहीं 2015 के विधानसभा चुनाव में महागठबंधन के तहत राजद की शक्ति सिंह यादव ने जदयू के प्रत्याशी को हराकर जीत हासिल की थी.

2020 और 2024 के करीबी मुकाबले स्पष्ट संकेत देते हैं की 2025 का विधानसभा चुनाव भी कड़े संघर्ष का साक्षी होगा जदयू और राजद के बीच यह प्रतिस्पर्धा अत्यंत रोमांचक होने की संभावना रखती है. पिछले 5 से 4 चुनाव में गेरियन की जीत नीतीश कुमार का स्थानीय प्रभाव और विकास कार्यों का रिकॉर्ड जेडीयू के पक्ष में आता है. वहीं वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य में गठबंधन की राजनीति भी महत्वपूर्ण भूमिका निभैगी दोनों गठबंधनों की रणनीति और वोट हस्तांतरण निर्णायक साबित हो सकता है.

हिलसा विधानसभा क्षेत्र बिहार की राजनीति में एक महत्वपूर्ण युद्ध क्षेत्र बन चुका है. इसका ऐतिहासिक महत्व सांस्कृतिक विरासत और राजनीतिक रूप से संवेदनशील स्थिति से विशेष बनती है. 2020 में केवल 12 वोटो के अंतर से हुई जीत और 2024 में 188 वोटो का अंतर यह साबित करता है, कि हिंसा में हर वोट की कीमत है. 2025 का चुनाव भी इस तरह के रोमांचक और अनिश्चित मुकाबले की संभावना रखता है.

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