Nalanda Woman Assault case : …जब दुनिया शुरू हुई ना तो औरत की बहुत रिस्पेक्ट थी. शास्त्रों में लिखा जाता रहा नारी सर्वत्र पूजते…रावण ने नारी को हाथ लगाया तो भगवान जी ने लंका जला दी. फिर ना जाने कब सिस्टम बदल गया. पहले कहानी गई फिर अधिकार गए..शशांत शाह द्वारा निर्देशित और दिव्या दत्ता व संजय मिश्रा अभिनीत वेब सीरीज चिरैया इन दिनों ओटीटी पर स्ट्रीमिंग हो रही है. ऊपर वाला डायलॉग इसी चिरैया वेब सीरीज की है. यह पूरी सीरीज मर्दों को मिर्ची लगाने वाली है. खैर अगर नहीं आपने चिरैया नहीं देखी है तो जरूर देखिए…लेकिन यह राय चिरैया के लिए नहीं है. बल्कि उस चिड़िया के लिए है जो शायद परिवार नहीं बल्कि उस समाज से परेशान है. जो परिवार और समाज के बीच चुनने की आजादी का दिखावा करता है. वैसे तो कई सारी घटनाएं रोज घटित होती है. लेकिन कुछ ऐसी भी होती है जो खुले तौर पर समाज के इस कलंकित चेहरे को उजागर कर जाता है. नया घटना है बिहार के नालंदा का.
नालंदा, जिसकी पहचान भले ही आज मुख्यमंत्री के गृह जिले तक सीमित करने की कोशिश की जा रही हो लेकिन नालांदा सिर्फ इतना भर नहीं है. अतीत से वर्तमान तक बिहार का यह भू-भाग बिहार के अस्मिता की पहचान रही है. इन दिनों खासकर बीते दो चार दिनों से यह जिला खबरों की सुर्खियों में है. कारण यह है कि भारत के राष्ट्रपति माननीय द्रौपदी मुर्मु नालंदा विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में शामिल हुईं, इसी दिन जिले के शीतला माता मंदिर में भगदड़ मच गई और हादसे में 9 लोगों की मौत हो गई. इसके साथ साथ एक और खबर सोशल मीडिया के जरिए सामने आई. जो सबसे ज्यादा ट्रेंड में रहा…लोगों ने इन तीनों खबरों में सबसे ज्यादा तीसरे के बारे में जानना चाहा. क्या थी तीसरी खबर..?
सोशल मीडिया के अलग अलग प्लेटफॉर्म पर एक वीडियो वायरल हो रहा है. आपने भी देखी होगी.नहीं देखी होगी तो किसी से सुना होगा. वीडियो में एक महिला के साथ कुछ लोग छेड़खानी करते नजर आ रहे हैं. मीडिया रिपोर्ट में दावा किया जा रहा है कि वीडियो नालंदा के नूरसराय का है. जिसमें लोग उस स्त्री को उसके कथित अपराधों की सजा दे रहे है. जानकारी के अनुसार महिला का पति बिहार से बाहर काम करता है. महिला घर में रहती है. जहां वो अपने तीन बच्चे और बीमार सास की देखभाल करती है. अकेले रह रही महिला पर गांव में बदचलनी का आरोप भी कई लोग लगाते हैं.
हालांकि यह न तो पहला है और ना ही आखिरी..जब किसी महिला के साथ समाज ने इस तरीके का न्याय किया हो. हर दिन देश के किसी न किसी कोने हो ऐसी खबरें अखबारों में स्थान पा ही जाती है. लेकिन सवाल है कब तक ? अगर मान लिया जाए दोनों आपत्तिजनक स्थिति में पाए गए तो क्या उस स्त्री के शरीर को नोचना खसोटना जायज और उचित न्याय है ? उस भीड़ में शामिल लोगों को वैसा करने का अधिकार किसने दिया ? इस बात का क्या प्रमाण है कि भीड़ में शामिल लोग खुद अपराधी नहीं है ? दरअसल समाज को दिक्कत इस बात से है कि कोई उनके बनाए हुए दीवार को लांध क्यों रहा. उसके बनाए नियमों को बिना किसी सवाल जवाब के अपना क्यों नहीं ले रहा ? ऐसे कई घटनाओं के अध्ययन से आपको पता चलेगा की हमारा समाज नैतिकता के नाम पर कितना कुंठित हो चुका है. सामाजिक रूप से पिछड़ा हुआ है और नैतिक रूप से गिरा हुआ है. सीनियर जर्नलिस्ट और लेखक पुष्यमित्र कहते है कि नैतिकता की दीवार पर खड़ा हमारा समाज न्याय के लिए हमेशा इस तरह के जंगली और हिंसक तरीकों को अपनाया है. इसमें लोगों की अपनी कुंठाओं का भी समावेश होता है. खासकर प्रेम करती स्त्री को देखकर पुरुषों की यौन भूख जाग उठती है और वह न्याय के नाम पर अपने शरीर की भूख मिटाना चाहता है.
ऐसी घटनाओं को लेकर मुझे समाज का दोहरापन साफ साफ दिखता है. क्योंकि एक तरफ जहां लोग इस घटना की कड़ी निंदा कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कुछ लोग ऐसे भी हैं जो यह जानने की कोशिश में लगे हैं कि वह महिला कौन थी, उसके साथ क्या हुआ, यहां तक कि उसकी आपत्तिजनक वीडियो कहां मिलेगी. महिला के निजी जीवन और उसके संबंधों को लेकर तरह-तरह के तर्क और कयास लगाए जा रहे हैं. कुल मिलाकर कहें तो ऐसे सवालों के जवाब खोजे जा रहे हैं जिनकी कोई आवश्यकता नहीं है. इस तरीके के घटनाओं को लेकर हर बार सोशल मीडिया पर लोग प्रतिक्रिया देते हैं, निंदा करते हैं, सहानुभूति जताते हैं, प्रार्थना करते हैं और यह वकालत करते नहीं थकते कि ऐसी घटनाएं नहीं होनी चाहिए. महिलाओं के अधिकारों और उनके सम्मान की बात भी होती है. लेकिन असली सवाल यह है कि जब हर कोई विरोध कर रहा है, हर कोई ऐसी घटनाओं की निंदा कर रहा है, तो फिर हमारे समाज में ऐसे लोग क्यों मौजूद हैं? आखिर कौन हैं वे लोग जो ऐसी घटनाओं के बहाने अपनी कुंठित मानसिकता और विकृत सोच को खुलकर सामने लाते हैं? यह सिर्फ एक घटना नहीं, बल्कि समाज के भीतर छिपी उस सोच का आईना है, जिसे बदलने की सबसे ज्यादा जरूरत है.