Calcutta High Court : लोकतंत्र में अदालत की भूमिका काफी महत्वपूर्ण होती है. भारत में मुख्य रूप से चार प्रकार के न्यायालय हैं. हालांकि इसके अलावा भी कई प्रकार के कोर्ट है लेकिन यह मुख्य श्रेणी में नहीं आते है. मुख्य श्रेणी में सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court), उच्च न्यायालय (High Court),जिला न्यायालय (District Court) और अधीनस्थ न्यायालय (Subordinate Courts) आते हैं. अन्य श्रेणी में ट्रिब्यूनल (न्याधिकरण), लोक अदालतें, और मोबाइल कोर्ट आदि की गिनती होती है.
भारत का सबसे पुराना उच्च न्यायालय
इनमें जैसा की नाम से जाहीर है सबसे बड़ा सुप्रीम कोर्ट होता है और फिर हाई कोर्ट होता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारत का सबसे पुराना हाई कोर्ट कौन सा है? नहीं तो इसका उत्तर है,कलकत्ता हाई कोर्ट,जिसकी स्थापना 1862 में हुई थी. यह न केवल भारत का सबसे पुराना हाई कोर्ट है, बल्कि यह ब्रिटिश शासन के दौरान न्यायिक व्यवस्था की दिशा को भी बदलने वाला महत्वपूर्ण मील का पत्थर है.
ब्रिटिश काल में हुई थी सुप्रीम कोर्ट की स्थापना
भारत में अदालतों की शुरुआत की बात करें तो सबसे पहले 1774 में ब्रिटिश सरकार ने कोलकाता (तत्कालीन कलकत्ता) में सुप्रीम कोर्ट ऑफ ज्यूडिकेटर की स्थापना की थी. यह अदालत रेगुलेटिंग एक्ट 1773 के तहत बनाई गई थी. इस सुप्रीम कोर्ट में एक चीफ जस्टिस और तीन जज होते थे. यह अदालत दीवानी और फौजदारी दोनों तरह के मामलों की सुनवाई करती थी.
भारत में पहली बार कब हुआ हाई कोर्ट्स का गठन
इसके बाद ब्रिटिश सरकार ने 1861 में इंडियन हाई कोर्ट्स एक्ट पारित किया, जिसके तहत तीन प्रमुख हाई कोर्ट की स्थापना की गई,कलकत्ता, मद्रास और बॉम्बे. इन तीन हाईकोर्टों में कलकत्ता हाई कोर्ट ने 1 जुलाई 1862 को सबसे पहले अपनी कार्यवाही शुरू की थी. इसके बाद मद्रास (26 जून 1862) और बॉम्बे (14 अगस्त 1862) हाई कोर्ट का भी गठन हुआ.
कलकत्ता हाई कोर्ट का महत्व
कलकत्ता हाई कोर्ट ने भारतीय न्यायिक व्यवस्था में कई महत्वपूर्ण योगदान दिए हैं और यह न केवल एक ऐतिहासिक धरोहर है, बल्कि आज भी न्याय व्यवस्था की सशक्त इकाई के रूप में कार्य कर रहा है. भारत के न्यायिक इतिहास में यह हाई कोर्ट एक मील का पत्थर बना हुआ है, जो हमारे न्यायिक ढांचे की शुरुआत को दर्शाता है. आज भी इस अदालत में उच्चतम न्यायिक निर्णय लिए जाते हैं और यह भारत की न्यायिक स्वतंत्रता का प्रतीक बना हुआ है.