नई दिल्ली।अमेरिका के राष्ट्रपति उम्मीदवार डोनाल्ड ट्रंप ने अपने पुराने चुनावी वादों को दोहराते हुए फिर से आक्रामक टैरिफ नीति (US Trade War) अपनाने की घोषणा की है. ट्रंप ने 1.4 ट्रिलियन डॉलर के इम्पोर्टेड सामान पर टैरिफ लगाने का प्रस्ताव रखा है, जो उनके पिछले कार्यकाल के मुकाबले तीन गुना ज्यादा है. इस कदम को लेकर दुनियाभर के आर्थिक विशेषज्ञ चिंता जता रहे हैं.
ट्रंप की नई टैरिफ नीति और संभावित असर
ट्रंप ने पद संभालते ही मेक्सिको, कनाडा और चीन के खिलाफ टैरिफ (US Trade War) बढ़ाने का निर्णय लिया है. उन्होंने मेक्सिको और कनाडा से आने वाले सामान पर 25% और चीन के उत्पादों पर 10% टैरिफ लगाने की घोषणा की है. इसके अलावा, कनाडा से आयातित फ्यूल पर भी 10% तक का शुल्क लगाने का फैसला लिया गया है.
उनका दावा है कि इस कदम से अमेरिका में अवैध आप्रवासन पर लगाम लगेगी, व्यापार घाटा कम होगा और अवैध ड्रग्स की तस्करी पर अंकुश लगाया जा सकेगा. हालांकि, कई अर्थशास्त्रियों और व्यापार विशेषज्ञों का मानना है कि यह नीति अमेरिका की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचा सकती है.
US Trade War : आर्थिक विशेषज्ञों की चेतावनी
पीटरसन इंस्टीट्यूट फॉर इंटरनेशनल इकोनॉमिक्स की सीनियर फेलो मैरी लवली के अनुसार कि यह अमेरिका के लिए अब तक का सबसे आत्मघाती आर्थिक फैसला हो सकता है. इससे देश में महंगाई बढ़ेगी और अर्थव्यवस्था की विकास दर धीमी पड़ जाएगी.
‘वॉल स्ट्रीट जर्नल’ में प्रकाशित एक लेख में इस नीति को “इतिहास का सबसे मूर्खतापूर्ण ट्रेड वॉर” करार दिया गया है. रिपोर्ट के अनुसार, कनाडा और मेक्सिको के खिलाफ टैरिफ लगाने की रणनीति अमेरिका के लिए आर्थिक आपदा साबित हो सकती है. कई विशेषज्ञों का मानना है कि इससे महंगाई और बेरोजगारी बढ़ सकती है, जिससे अमेरिका की आंतरिक स्थिति कमजोर हो सकती है.
अमेरिका में बढ़ती महंगाई और व्यापार संकट
ट्रंप के पहले कार्यकाल के दौरान महंगाई उतना बड़ा मुद्दा नहीं (US Trade War) था, लेकिन वर्तमान समय में स्थिति काफी अलग है. अमेरिका में पहले से ही रोजमर्रा की जरूरतों की कीमतें बढ़ी हुई हैं. किराने का सामान, वाहन और अन्य आवश्यक वस्तुएं पहले से ही महंगी हैं, और इन नए टैरिफों के कारण इनकी कीमतें और बढ़ सकती हैं.
अमेरिका में औसत नागरिक पहले से ही आर्थिक दबाव में है, और यदि टैरिफ लागू होते हैं, तो रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतें बढ़ेंगी, जिससे आम जनता की परेशानियां और बढ़ सकती हैं. साथ ही, इन टैरिफों का असर अमेरिकी कंपनियों और व्यापार पर भी पड़ेगा, क्योंकि कई व्यवसाय आयातित कच्चे माल पर निर्भर हैं.
US trade war :क्या यह चुनावी रणनीति का हिस्सा है?
कुछ राजनीतिक विश्लेषकों (US Tariff On Different Country) का मानना है कि ट्रंप की यह नीति आगामी राष्ट्रपति चुनावों के मद्देनजर उनकी प्रचार रणनीति का हिस्सा हो सकती है. वह अपने समर्थकों को दिखाना चाहते हैं कि वह अमेरिका की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और बाहरी देशों पर निर्भरता को कम करने के लिए प्रतिबद्ध हैं. हालांकि, विपक्षी दल और कुछ आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह नीति दीर्घकालिक रूप से अमेरिका की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचा सकती है. डेमोक्रेटिक पार्टी ने इस कदम की कड़ी आलोचना करते हुए इसे ‘अमेरिकी नागरिकों पर महंगाई का बोझ बढ़ाने वाला निर्णय’ बताया है.
ट्रंप की नई टैरिफ नीति अमेरिका और वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकती है. जहां एक ओर यह नीति अमेरिकी व्यापार संतुलन और औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने के प्रयास के रूप में देखी जा रही है, वहीं दूसरी ओर इससे महंगाई और बेरोजगारी की समस्या भी गंभीर रूप से बढ़ सकती है. आने वाले महीनों में इस नीति के प्रभाव स्पष्ट होंगे, लेकिन फिलहाल, आर्थिक विशेषज्ञ और व्यापार जगत के लोग इसे अमेरिका के लिए आर्थिक संकट की चेतावनी मान रहे हैं.