Bihar Assembly Elections 2025: गुरुवार को महागठबंधन की अहम बैठक में तेजस्वी यादव (Tejashwi Yadav) को को-ऑर्डिनेशन कमेटी का चेयरमैन नियुक्त किया गया। लगभग तीन घंटे तक चली इस बैठक के बाद यह स्पष्ट संकेत मिल रहा है कि आगामी विधानसभा चुनाव में तेजस्वी ही महागठबंधन की अगुवाई करेंगे। हालांकि, प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जब महागठबंधन के मुख्यमंत्री चेहरे को लेकर सवाल उठे, तो नेताओं के बयानों में स्पष्टता की बजाय भ्रम की स्थिति नजर आई।
Tejashwi Yadav को मिली को-ऑर्डिनेशन कमेटी की कमान
पटना स्थित आरजेडी कार्यालय में गुरुवार को महागठबंधन की बड़ी बैठक में आरजेडी, कांग्रेस, वीआईपी पार्टी और वाम दलों, सीपीआई, सीपीएम, और सीपीआई-एम के नेता शामिल हुए। बैठक के बाद यह निर्णय लिया गया कि राज्य से लेकर प्रखंड स्तर तक को-ऑर्डिनेशन कमेटियां गठित की जाएंगी जो महागठबंधन की रणनीतियों और कार्यक्रमों को एकजुट होकर आगे बढ़ाएंगी। तेजस्वी यादव को राज्य स्तरीय को-ऑर्डिनेशन कमेटी का चेयरमैन बनाए जाने की घोषणा की गई, जो उन्हें गठबंधन का एक तरह से नेतृत्वकर्ता बना देता है। यह निर्णय महागठबंधन की एकजुटता को दर्शाता है, लेकिन सीएम फेस के सवाल पर तस्वीर उतनी साफ नहीं रही।
कांग्रेस के बयान से उठे सवाल
जब प्रेस वार्ता में तेजस्वी (Tejashwi Yadav) को चेयरमैन बनाए जाने के बाद उनसे महागठबंधन के मुख्यमंत्री चेहरे को लेकर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने जवाब देने की बजाय पास बैठे बिहार कांग्रेस प्रभारी कृष्णा अल्लावरु की ओर इशारा कर दिया। अल्लावरु ने जवाब देने से पहले ही स्पष्ट किया कि वह एक ही सवाल का बार-बार जवाब नहीं देंगे। उन्होंने कहा कि महागठबंधन में चेहरे को लेकर कोई कन्फ्यूजन नहीं है, यहां सब कुछ क्लियर है। अगर कहीं कंफ्यूजन है तो वह एनडीए में है। लेकिन जब उनसे दोबारा पूछा गया कि महागठबंधन का सीएम चेहरा कौन होगा, तो उन्होंने सीधा जवाब देने से परहेज किया। इस स्थिति ने यह संकेत दिया कि तेजस्वी को पूरी तरह से मुख्यमंत्री उम्मीदवार घोषित करने को लेकर कांग्रेस अब भी असमंजस में है।
तेजस्वी यादव ने पत्रकारों से बातचीत में कहा, सभी बातों पर सहमति बन चुकी है, थोड़े इंतजार का मजा लीजिए, एक ही दिन में सब बता दें क्या? इसके अलावा पशुपति पारस के महागठबंधन में शामिल होने के सवाल पर उन्होंने कहा कि इस पर फैसला आने वाली बैठक में लिया जाएगा।
आरजेडी हां, कांग्रेस की ना?
तेजस्वी और कांग्रेस के बयानों में जिस तरह से विरोधाभास सामने आया, उससे यह स्पष्ट संकेत मिलते हैं कि महागठबंधन में फिलहाल तेजस्वी के नाम पर अंतिम मुहर नहीं लग पाई है। आरजेडी और लेफ्ट पार्टियों ने जहां तेजस्वी को नेतृत्व देने का समर्थन किया है, वहीं कांग्रेस की तरफ से कोई ठोस समर्थन नहीं दिखा।
Tejashwi Yadav के सीएम फेस पर कैसा संशय
बिहार में इस साल के अंत में विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में महागठबंधन की यह कवायद संगठनात्मक मजबूती की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है। को-ऑर्डिनेशन कमेटी के गठन से यह साफ है कि गठबंधन अपनी तैयारियों को धार देने में जुट गया है। लेकिन मुख्यमंत्री चेहरे को लेकर अस्पष्टता चुनावी रणनीति पर असर डाल सकती है। महागठबंधन ने भले ही एक मजबूत और संगठित चेहरा देने की कोशिश की हो, लेकिन अंदरूनी मतभेदों की झलक इस बैठक के बाद साफ तौर पर दिखी है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या आने वाले दिनों में तेजस्वी यादव को आधिकारिक तौर पर महागठबंधन का मुख्यमंत्री उम्मीदवार घोषित किया जाएगा या नहीं।