बिहार में कोचिंग संस्थानों पर प्रशासन की पैनी नजर…अब अनिवार्य होगा सिक्योरिटी ऑडिट और काउंसलिंग, जानें क्या है नया दिशा-निर्देश

New Guidelines for Coaching Institutes : Bihar Police ने राज्य में संचालित सभी कोचिंग संस्थानों के लिए व्यापक दिशा-निर्देश जारी किए हैं. इन निर्देशों में अनिवार्य रजिस्ट्रेशन से लेकर सुरक्षा, स्वास्थ्य, आपदा प्रबंधन और छात्र-छात्राओं के मानसिक कल्याण तक के कई महत्वपूर्ण प्रावधान शामिल किए गए हैं. बिहार पुलिस के आधिकारिक फेसबुक पेज पर साझा की गई जानकारी के अनुसार, अब राज्य में संचालित प्रत्येक कोचिंग संस्थान का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य होगा. संस्थान को अपनी रजिस्ट्रेशन संख्या रिसेप्शन पर स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करनी होगी. साथ ही सभी कर्मचारियों का पुलिस वेरिफिकेशन भी अनिवार्य कर दिया गया है.

सुरक्षा व्यवस्था पर विशेष जोर

निर्देशों के तहत कोचिंग संस्थानों में सीसीटीवी कैमरे लगाना अनिवार्य होगा. परिसर में पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था, बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली, आपातकालीन निकास द्वार और प्राथमिक उपचार की सुविधा उपलब्ध करानी होगी. छात्राओं की सुरक्षा के लिए विशेष प्रबंध करने के भी निर्देश दिए गए हैं. संस्थानों को अग्निशमन विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) लेना अनिवार्य होगा. आग, भूकंप और बाढ़ जैसी आपदाओं से निपटने के लिए आवश्यक तैयारी रखने और समय-समय पर स्टाफ व छात्रों के लिए मॉक ड्रिल आयोजित करने का भी निर्देश दिया गया है.

स्वास्थ्य और स्वच्छता संबंधी प्रावधान

दिशा-निर्देशों के अनुसार, कोचिंग संस्थानों में स्वच्छ पेयजल, साफ-सुथरे शौचालय और पुरुष एवं महिला छात्रों के लिए अलग-अलग शौचालय की व्यवस्था सुनिश्चित करनी होगी. बीमार छात्रों के लिए अलग बैठने की सुविधा भी उपलब्ध करानी होगी. इसके अतिरिक्त, असामान्य व्यवहार या अवसाद जैसी समस्याओं से जूझ रहे छात्रों की पहचान कर उनके अभिभावकों को सूचित करने की व्यवस्था भी अनिवार्य की गई है.

इमरजेंसी हेल्पलाइन के पोस्टर लगाना जरूरी

प्रत्येक संस्थान के रिसेप्शन पर स्थानीय थाना, वरीय पुलिस पदाधिकारी तथा आपातकालीन हेल्पलाइन नंबर 112 के पोस्टर लगाना अनिवार्य होगा. छात्राओं और स्टाफ को 112 इंडिया ऐप के वूमेन सेफ्टी फीचर्स की जानकारी भी दी जाएगी. कोचिंग संस्थानों को यह सुनिश्चित करना होगा कि कक्षा में अनुपस्थित रहने वाले छात्रों की जानकारी अभिभावकों को दी जाए. मॉक टेस्ट में छात्रों के प्रदर्शन की सूचना देने के लिए स्पष्ट मेकैनिज्म तैयार करना होगा. यदि ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है, तो अभिभावकों के मोबाइल पर मैसेज नोटिफिकेशन भेजने की प्रणाली लागू करनी होगी. संस्थान को यह भी बताना होगा कि छात्रों की बायोमेट्रिक उपस्थिति दर्ज की जाती है या नहीं.

सिक्योरिटी ऑडिट और काउंसलिंग अनिवार्य

यदि संस्थान छात्रों को परिवहन सुविधा प्रदान करते हैं, तो चालक और सहायक चालक का पुलिस वेरिफिकेशन अनिवार्य होगा. नामांकन के लिए दलालों की मदद लेने की स्थिति में संबंधित के खिलाफ विधिसम्मत कार्रवाई की जाएगी. कोचिंग संस्थानों को सिक्योरिटी ऑडिट कराने के संबंध में जानकारी देनी होगी. यदि ऑडिट नहीं हुआ है, तो संचालकों को इसे कराने की सलाह दी जाएगी. इसके अलावा, छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए करियर काउंसलिंग और साइकोलॉजिकल काउंसलिंग की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए हैं. बिहार पुलिस के इन नए दिशा-निर्देशों का उद्देश्य राज्य में संचालित कोचिंग संस्थानों में पारदर्शिता, सुरक्षा और जवाबदेही सुनिश्चित करना है.

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