क्या आर्थिक संकट का सामना कर रही है बिहार सरकार ! समाप्त होने जा रही नीतीश सरकार की महत्वाकांक्षी योजना…

Bihar Financial Crisis : मीडिया रिपोर्ट की मानें तो वित्तीय स्थिति को लेकर बिहार सरकार की लेकर चिंताएं बढ़ती जा रही हैं. रिपोर्ट सरकारी सूत्रों और वित्तीय विशेषज्ञों के हवाले से दावा किया जा रहा है कि राज्य सरकार को चालू वित्तीय वर्ष के समापन से पहले ही नकदी संकट का सामना करना पड़ रहा है. बताया जा रहा है कि विकास कार्यों से जुड़े ठेकेदारों और निवेदकों के भुगतान में देरी हो रही है. आमतौर पर मार्च के मध्य के बाद दिखने वाला वित्तीय दबाव इस बार फरवरी से ही महसूस किया जा रहा है.

भुगतान पर चरणबद्ध रोक

रिपोर्ट के अनुसार पहले एक करोड़ रुपये से अधिक के बिलों के भुगतान पर रोक की सलाह दी गई, जिसे बाद में घटाकर 50 लाख और फिर 25 लाख रुपये तक कर दिया गया. इससे निर्माण और विकास कार्यों की गति पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है. विशेषज्ञों का मानना है कि हालिया चुनावी वादों और कल्याणकारी योजनाओं पर बढ़े व्यय ने राजकोषीय दबाव को बढ़ाया है. चुनाव पूर्व कई योजनाओं की घोषणा की गई थी, जिनमें महिलाओं के लिए आर्थिक सहायता, सामाजिक सुरक्षा पेंशन में वृद्धि और 200 यूनिट तक मुफ्त बिजली जैसी योजनाएं शामिल हैं. इन योजनाओं के लिए बड़े पैमाने पर वित्तीय संसाधनों की आवश्यकता है.

राजस्व बढ़ाने के संभावित उपाय

वित्तीय संकट से उबरने के लिए सरकार जिन विकल्पों पर विचार कर सकती है, उनमें निम्नलिखित शामिल हैं:

  • सर्किल रेट में बढ़ोतरी

राज्य सरकार जमीन के सरकारी सर्किल रेट में उल्लेखनीय वृद्धि कर सकती है. विशेषकर पटना और अन्य प्रमुख शहरों की समीक्षा पूरी होने की खबर है. सर्किल रेट बढ़ने से जमीन की खरीद-बिक्री पर स्टांप शुल्क के माध्यम से राजस्व में वृद्धि हो सकती है. हालांकि, इससे आम नागरिकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ने की आशंका है. सरकार औद्योगिक निवेश को प्रभावित होने से बचाने के लिए औद्योगिक इकाइयों को रियायत देने का विकल्प भी अपना सकती है.

  • पेट्रोल-डीजल पर वैट बढ़ाने की संभावना

Uttar Pradesh और Jharkhand की तुलना में बिहार में पेट्रोल-डीजल पहले से महंगा बताया जाता है. यदि राज्य करों में वृद्धि की जाती है तो कीमतें और बढ़ सकती हैं. सीमावर्ती इलाकों के पेट्रोल पंप संचालकों का कहना है कि दूसरे राज्यों से सस्ता ईंधन भरवाने की प्रवृत्ति पहले से मौजूद है.

  • बिजली दरों में संशोधन

125 यूनिट तक मुफ्त बिजली योजना लागू है, लेकिन 125 यूनिट से अधिक खपत करने वाले उपभोक्ताओं के लिए दरों में बढ़ोतरी की संभावना से इनकार नहीं किया जा रहा है. इससे अतिरिक्त राजस्व जुटाने का प्रयास किया जा सकता है.

शराबबंदी पर फिर चर्चा

राज्य में लागू पूर्ण शराबबंदी को लेकर भी बहस तेज हो गई है. मुख्यमंत्री Nitish Kumar लंबे समय से शराबबंदी के पक्षधर रहे हैं और इसे अपनी प्रमुख नीतिगत उपलब्धियों में गिनाते रहे हैं. हालांकि, वित्तीय विशेषज्ञों का अनुमान है कि यदि शराबबंदी समाप्त की जाती है तो राज्य को सालाना हजारों करोड़ रुपये का अतिरिक्त राजस्व मिल सकता है. शराबबंदी कानून की वैधता को लेकर मामला Supreme Court of India में लंबित है. पूर्व में Patna High Court ने भी कानून के क्रियान्वयन को लेकर कड़ी टिप्पणियां की हैं. कानूनी जानकारों का कहना है कि यदि उच्चतम न्यायालय से कोई निर्णायक आदेश आता है तो सरकार के लिए नीति में बदलाव का रास्ता खुल सकता है.

अब आगे क्या हो सकता है

राजकोषीय दबाव, बढ़ते व्यय और सीमित आय स्रोतों के बीच राज्य सरकार के सामने चुनौतीपूर्ण स्थिति है. आने वाले वित्तीय वर्ष से पहले लिए जाने वाले निर्णय यह तय करेंगे कि सरकार राजस्व के लिए कर वृद्धि, दर संशोधन या नीतिगत बदलाव के माध्यम के जरिए संतुलन कैसे स्थापित करती है.

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