सोशल मीडिया ट्रोलिंग के बीच बदला अंदाज़.. इमेज मैनेजमेंट के लिए नीतीश कुमार की राह पर चले निशांत ?

Bihar Politics : निशांत कुमार(Nishant Kumar) इन दिनों सोशल मीडिया पर जबरदस्त ट्रोलिंग का सामना कर रहे हैं. उनके हावभाव, बोलने के तरीके, कपड़े पहनने की शैली और सार्वजनिक व्यवहार को लेकर इंटरनेट पर मीम्स और रील्स की बाढ़ आई हुई है. राजनीतिक गलियारों से लेकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म तक हर तरफ उनकी चर्चा हो रही है. इसी बीच बुधवार को एक ऐसा घटनाक्रम सामने आया जिसने राजनीतिक हलकों में नई बहस छेड़ दी. जनता दरबार कार्यक्रम में पहुंचे निशांत कुमार ने पहली बार मीडिया से लगभग पूरी दूरी बना ली.

जेडीयू कार्यालय में जनता दरबार लेकिन मीडिया से दूरी

जनता दल यूनाइटेड द्वारा हाल ही में एक नया कार्यक्रम तय किया गया है, जिसके तहत पार्टी कोटे के मंत्री सोमवार से शुक्रवार तक बारी-बारी से पार्टी कार्यालय में बैठकर जनता की शिकायतें सुनेंगे. बुधवार को इस कार्यक्रम में निशांत कुमार की ड्यूटी थी. उनके साथ दो अन्य मंत्री भी मौजूद थे, लेकिन पूरा मीडिया फोकस सिर्फ उन्हीं पर रहा. जैसे ही खबर फैली कि निशांत कुमार जनता दरबार में आने वाले हैं, बड़ी संख्या में पत्रकार और कैमरा टीमें जेडीयू कार्यालय पहुंच गईं. हालांकि इस बार तस्वीर बदली हुई दिखी. मीडिया सूत्रों के अनुसार जेडीयू कार्यालय में निशांत कुमार के कार्यक्रम से मीडिया को दूर रखा गया. कैमरों को अंदर जाने की अनुमति नहीं दी गई और जनता दरबार के दौरान कोई मीडिया इंटरैक्शन भी नहीं हुआ.कार्यक्रम खत्म होने के बाद भी निशांत कुमार बिना बयान दिए सीधे गाड़ी में बैठकर निकल गए.

क्या ट्रोलिंग का असर दिखने लगा है?

यह रवैया इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि पिछले कई महीनों से निशांत कुमार मीडिया से खुलकर बातचीत करते रहे हैं. छोटे-बड़े यूट्यूब चैनलों से लेकर राष्ट्रीय मीडिया तक वे अक्सर इंटरव्यू देते दिखाई देते थे. लेकिन सोशल मीडिया ट्रोलिंग के बीच उन्होंने अपना अंदाज़ बदल लिया है. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि हाल के वायरल वीडियो और मीम्स के बाद निशांत कुमार की टीम अब डैमेज कंट्रोल मोड में नजर आ रही है. सोशल मीडिया पर वायरल हुए कुछ बयानों के बाद उनकी छवि को लेकर लगातार चर्चाएं हो रही थीं. ऐसे में माना जा रहा है कि उनकी पीआर टीम ने फिलहाल लो प्रोफाइल रणनीति अपनाने का फैसला किया है. राजनीतिक पर्यवेक्षकों के मुताबिक यह रणनीति कुछ हद तक डिफेंस इज द बेस्ट डिफेंस जैसी दिखाई देती है,यानी विवाद से बचने के लिए सार्वजनिक और मीडिया एक्सपोजर कम करना.

क्या नीतीश कुमार की राह पर चल पड़े हैं निशांत?

इस पूरे घटनाक्रम के बाद एक और बड़ा सवाल उठने लगा है कि क्या निशांत कुमार अब अपने पिता नीतीश कुमार की राजनीतिक शैली अपनाने लगे हैं? राजनीतिक जानकार याद दिलाते हैं कि एक समय नीतीश कुमार के जनता दरबार में मीडिया की पूरी मौजूदगी रहती थी. पत्रकार खुलकर कवरेज करते थे और मुख्यमंत्री सवालों के जवाब भी देते थे. लेकिन पिछले कुछ वर्षों में उनकी सार्वजनिक मौजूदगी और मीडिया इंटरैक्शन काफी सीमित हो गए. कई मौकों पर उनकी टीम ने उन्हें मीडिया से दूर रखा, खासकर उन विवादित बयानों के बाद जो सोशल मीडिया पर वायरल हुए थे. अब वैसा ही पैटर्न निशांत कुमार के साथ भी दिखाई देने लगा है.

स्वास्थ्य मंत्री होने के नाते बढ़ सकती है चुनौती

निशांत कुमार फिलहाल बिहार के स्वास्थ्य मंत्री हैं. ऐसे में विपक्ष और मीडिया दोनों उनसे स्वास्थ्य व्यवस्था, अस्पतालों की स्थिति, डॉक्टरों की कमी और अन्य मुद्दों पर जवाब की अपेक्षा रखते हैं. हालांकि राजनीतिक विश्लेषकों का यह भी कहना है कि अगर वे लगातार मीडिया से दूरी बनाए रखते हैं, कठिन सवालों से बचते दिखाई देते हैं,या सार्वजनिक संवाद कम करते हैं, तो इससे उनकी राजनीतिक छवि पर नकारात्मक असर पड़ सकता है.

सोशल मीडिया युग में इमेज मैनेजमेंट की चुनौती

आज के दौर में किसी भी नेता की सार्वजनिक छवि सिर्फ भाषणों से नहीं, बल्कि सोशल मीडिया क्लिप्स, मीम्स और वायरल पलों से भी तय होती है. निशांत कुमार के सामने फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती यही है कि ट्रोलिंग के बीच अपनी राजनीतिक पहचान कैसे मजबूत रखें, सार्वजनिक संवाद को कैसे संतुलित करें और आलोचना से बचने के बजाय उसे कैसे संभालें.

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