इस जनरेशन को हुआ क्या…कहीं फेक वेडिंग तो कभी अजनबियों के साथ सैर-सपाटा….क्यों बदल रहा है Gen-Z का मूड

Gen z social Events: सोशल मीडिया पर हजारों फ्रेंड्स, लेकिन असली में कोई नहीं? आज की युवा पीढ़ी इस दर्द को अच्छी तरह समझ सकती है. व्हाट्सएप, फेसबुक इंस्टाग्राम और न जाने कितने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सब एक दूसरे से एड है, लेकिन मिलने बैठने का समय किसी के पास नहीं है. नौकरी की भाग दौड़, लेट नाइट मीटिंग सुबह की ऑफिस कॉल्स के बीच कहीं खो गई है असली दोस्ती.

भाग दौड़ वाली जीवन में लगातार डिजिटल मीटिंग और जूम कॉल्स की थकान ने युवाओं को अकेलेपन का रोगी बना दिया है. इसी अकेलेपन को दूर करने के लिए, युवा ने तरकीबें अपना रहे है जैसे डिनर विद स्ट्रेंजर, यह एक नया ट्रेंड है. अध्ययन बताते हैं कि 18 से 25 वर्ष के युवाओं की भावनात्मक परेशानी का एक बड़ा कारण करीबी दोस्तों से दूर होना है, जो अपनी नौकरी, शादी या अन्य जिम्मेदारियों में व्यस्त हो गए हैं. इस दौर में, आमने-सामने का जुड़ाव ही इस डिजिटल थकान को दूर करने का सबसे बड़ा जरिया बन रहा है.

अभी युवा पीढ़ी ने इस समस्या का हल ढूंढ लिया है, वे सोशल मीडिया से लॉगआउट करके असली जिंदगी में लौट रहे हैं. शहरो में तरह-तरह की इवेंट हो रहे है, जहां अजनबी लोग मिलते है, बातें करते हैं और दोस्ती करते हैं. दिल्ली की साइकोलॉजिस्ट डॉक्टर उपासना चड्ढा कहती है, इंस्टाग्राम की लाइफ और स्नैपचैट के फिल्टर से दिल नहीं भरता युवाओं को असली कनेक्शन चाहिए, इसलिए वे जान बूझकर ऐसी जगह बना रहे हैं जहां आमने-सामने बैठकर बातें हो सके, जहां किसी की मौजूदगी अपने आप में एक सुकून देती है.

भारतीय शहरों में कई तरह के क्लब्स और ग्रुप बने हैं जहां युवा मिलते हैं बातें करते हैं और साथ में बैठते हैं.

वॉक विद स्ट्रेंजर 

क्या होता है:– अनजान लोगो के साथ शाम की सैर, फिर कैफे में चिल

कहां:– दिल्ली,एनसीआर, पुणे, मुंबई

कितना खर्च:– ₹800 –1200

कितने लोग:– 50 से 70 लोग

गेम्स नाइट विद स्ट्रेंजर

क्या होता है:– बोर्ड गेम्स और कार्ड गेम्स खेलते हुए नए दोस्त बनना

कहां:– दिल्ली,एनसीआर, हैदराबाद, चेन्नई

कितना खर्च:– ₹500–1000

कितने लोग:– 40 से 80

फेक वेडिंग्स

क्या होता है:– शादी का नाटक, और नए दोस्त बनाओ

कहां:– दिल्ली, एनसीआर, बेंगलुरु, पुणे

कितना खर्च:– ₹2000–3500

कितने लोग:– 100 से 250 लोग

साइलेंट रीडिंग क्लब

क्या होता है:– शांति से बैठ कर किताबें पढ़े, या बुक एक्सचेंज

कहां:– दिल्ली,एनसीआर, पुणे, मुंबई, हैदराबाद

कितना खर्च:– फ्री से ₹300 तक

कितने लोग:–30 से 80 लोग

ह्यूमन लाइब्रेरी 

क्या होता है:– अनुभवी की किताबें बोरो करो और कहानियां सुनो

कहां:– दिल्ली,एनसीआर, पुणे, मुंबई, कोच्चि m, चंडीगढ़

कितना खर्च:– ₹200–600

कितने लोग:– 60 से 150 लोग

 

आज की युवा पीढ़ी जिन्हें Gen z कहते हैं , पर बहुत प्रेशर है. ऑफिस का काम, पैसों की चिंता, करियर सब कुछ एक साथ ऐसे में दोस्ती और अपनेपन की कमी हमेशा खलती है. वर्चुअल दुनिया में तो सब कुछ परफेक्ट दिखता है, लेकिन असली जिंदगी में लोग अकेले हैं इसलिए यह नए ट्रेंड सिर्फ मनोरंजन नहीं मानसिक सेहत के लिए भी बहुत जरूरी है.

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