नई दिल्ली। संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने केंद्र सरकार में विभिन्न वरिष्ठ पदों पर भर्ती के लिए एक विज्ञापन जारी किया था । इन पदों में अलग अलग 24 मंत्रालयों में संयुक्त सचिव, निदेशक और उप सचिव के कुल 45 पदों के लिए आवेदन आमंत्रित किए गए थे। इन पदों पर Lateral Entry के जरिए भर्ती होनी थी। जिसे अब रद्द कर दिया गया है।
विपक्ष का सरकार पर हमला
केंद्र सरकार के इस विज्ञापन के बाद देश में राजनीतिक उठापटक की स्थिति बन गई है। NDA सरकार के इस विज्ञापन के बाद जहां एक तरफ गठबंधन में शामिल पार्टियों की नराजगी झलक रही हैं। तो कांग्रेस ने एक बार फिर से बीजेपी को जारी विज्ञापन के आधार पर आरक्षण को लेकर हमला किया। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने इसको लेकर कहा कि लेटरल एंट्री के जरिए भर्ती कर सरकार SC,ST और OBC वर्ग का आरक्षण छीन रही है। नेता विपक्ष के बातों का समर्थन करते हुए लालू, अखिलेश और मायावती भी सुर में सुर मिलाते नजर आए हैं। विपक्ष इस फैसले को बीजेपी की साजिश के तहत संविधान का उल्लंघन बता रही है।
किसे मिलती है Lateral Entry
नौकरशाही में शुरू हुए लेटरल एंट्री पर बहस से पहले यह जानना जरूरी है कि लेटरल एंट्री क्या होता है। लेटरल एंट्री के जरिए सरकार नौकरशाही में सीधे भर्ती करती है। इसके लिए निर्धारित योग्यता है।
- उम्र 45 साल
- निजी क्षेत्र में काम करने का 15 साल का एक्सपीरिएंस
- किसी भी मान्यता प्राप्त यूनिवर्सिटी और इंस्टीट्यूट से ग्रैजुएशन की डिग्री
- शैक्षणिक निकायों और विश्वविद्यालयों में काम करने वाले लोगों को नहीं मिलता है फायदा
- जॉइंट सेक्रेट्री, डायरेक्टर और डिप्टी सेक्रेट्री के पदों पर भर्ती
लेटरल एंट्री क्या है?
नौकशाही या अफसरशाही में Lateral Entry से तात्पर्य सरकारी विभागों खासकर मंत्रालयों में मध्य और वरिष्ठ स्तर के पदों को भरने के लिए पारंपरिक सरकारी सेवा संवर्गों, जैसे भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के बाहर से व्यक्तियों की भर्ती से है। इसके लिए निर्धारित चयन प्रक्रिया के तहत लोगों को चयन कर उन्हें सीधे तौर पर भर्ती की जाती है। यह एक प्रशासनिक और व्यावसायिक प्रक्रिया है जिसमें किसी व्यक्ति को एक संगठन में निचले या मध्य स्तर की भूमिका से सीधे एक उच्च स्तर की भूमिका में नियुक्त किया जाता है, या उसे संगठन के भीतर एक नई भूमिका में लाया जाता है। इस प्रक्रिया का उद्देश्य संगठन में अनुभव और विशेषज्ञता की कमी को पूरा करना, और नई विचारधारा और दृष्टिकोण को शामिल करना होता है। इन आधार पर लेटरल एंट्री होती है।
- संगठनात्मक स्तर-व्यक्ति को निचले स्तर की भूमिका से सीधे उच्च स्तर की भूमिका में ले जाना, जो कि पदोन्नति की प्रक्रिया की तुलना में भिन्न होता है।
- प्रोफेशनल पर्सपेक्टिव-एक व्यक्ति को अपनी मौजूदा विशेषज्ञता के आधार पर एक नई भूमिका में शामिल किया जाता है, बजाय इसके कि वह पहले संगठन में क्रमिक रूप से पदोन्नति प्राप्त करे।
Upsc Lateral Entry Controversy की शुरुआत
लेटरल एंट्री की प्रक्रिया का औपचारिक या व्यापक रूप से अपनाया जाने वाला समय तय करना मुश्किल हो सकता है, क्योंकि यह अवधारणा धीरे-धीरे विकसित हुई है और विभिन्न संगठनों और क्षेत्रों में अलग-अलग समय पर लागू की गई है।
- सरकारी सेवाओं में लेटरल एंट्री
भारतीय सिविल सेवा में लेटरल एंट्री की अवधारणा को पहली बार 2001 में लोक सेवा आयोग द्वारा पेश किया गया था, हालांकि यह एक सीमित आधार पर लागू किया गया था। 2016 में, भारतीय सरकार ने विभिन्न सरकारी विभागों में लेटरल एंट्री के लिए व्यापक नीतियों की घोषणा की थी, जैसे कि रक्षा, विज्ञान और तकनीकी क्षेत्रों में।
- कॉर्पोरेट क्षेत्र में लेटरल एंट्री
यह अवधारणा व्यावसायिक क्षेत्र में काफी पहले से अपनाई जा रही थी। कंपनियां विशेष रूप से ऐसे पेशेवरों को नियुक्त करती हैं जिनके पास विशिष्ट विशेषज्ञता और अनुभव होता है जो संगठन के विकास में योगदान कर सकता है। यह प्रक्रिया अक्सर उच्च प्रबंधन और वरिष्ठ नेतृत्व स्तर पर देखने को मिलती है।
लेटरल एंट्री के लाभ
- नई विचारधारा-नई पृष्ठभूमि वाले पेशेवरों से संगठन को नए दृष्टिकोण और विचार मिलते हैं।
- विशेषज्ञता-वे पेशेवर, जो पहले से ही किसी विशिष्ट क्षेत्र में विशेषज्ञता रखते हैं, संगठन की क्षमता को बढ़ाते हैं।
- तेजी से सुधार- मौजूदा समस्याओं को नए और अनुभवी दृष्टिकोण से देखने से त्वरित सुधार संभव होता है।
Lateral Entry एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है जो संगठनों को नई विशेषज्ञता, विचारधारा और अनुभव प्राप्त करने में मदद करती है। इसकी शुरुआत सरकारी और कॉर्पोरेट क्षेत्रों में अलग-अलग समय पर हुई थी, और इसका प्रभाव संगठनात्मक सुधार और विकास में स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है।