बिहार में बाढ़ का कहर; Kosi  तटबंध टूटने से कई इलाके जलमग्न, SDRF की टीमें राहत कार्य में जुटीं

पटना। बिहार में Kosi  और गंडक नदियों ने बाढ़ का कहर बरपाना शुरू कर दिया है। रविवार को नेपाल से छोड़े गए भारी पानी और लगातार बारिश के चलते सीतामढ़ी, पश्चिम चंपारण, अररिया, सुपौल समेत कई जिलों में बाढ़ की स्थिति गंभीर हो गई है। कई नदियों के तटबंध टूटने से नेपाल सीमा से सटे इलाके जलमग्न हो गए हैं, और वाल्मीकि टाइगर रिजर्व तक पानी भर चुका है। कोसी और गंडक नदियों में जलस्तर बढ़ने से 16 लाख लोग प्रभावित हैं। नेपाल से छोड़े गए पानी ने बिहार में बढ़ाई मुसीबत।

Kosi तटबंध टूटने से स्थिति गंभीर

सीतामढ़ी के मधकौल गांव में बागमती नदी का तटबंध टूटने के बाद बाढ़ का पानी तेजी से फैला। इसी तरह, पश्चिम चंपारण में गंडक नदी के बाएं तटबंध के टूटने से पानी वाल्मीकि टाइगर रिजर्व में प्रवेश कर गया। अधिकारियों ने बताया कि बागमती नदी के तेज बहाव के कारण बेलसंड, परसौनी और शिवहर के तटबंधों में दरारें आ गई हैं, जिन्हें इंजीनियरों ने त्वरित मरम्मत कर रोकने का प्रयास किया।

Kosi  बैराज से रिकॉर्ड पानी छोड़ा गया

कोसी बैराज से 6.61 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया, जो पिछले 56 सालों में सबसे ज्यादा है। इसके साथ ही, गंडक नदी पर वाल्मिकीनगर बैराज से 5.62 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। इन दोनों बैराजों से छोड़े गए पानी के कारण बिहार के कई जिलों में बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है।

SDRF की टीमें राहत कार्य में जुटीं

पश्चिमी चंपारण के 200 गांवों में बाढ़ का पानी घुस चुका है, और दर्जनों नदियां उफान पर हैं। प्रशासन ने इलाके में लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के लिए SDRF की टीमों को तैनात किया है। चखनी और रतवल के रिंग बांध टूटने से कई गांवों का संपर्क कट गया है, और एनएच 727 पर पानी आने का खतरा बढ़ गया है।

बारिश और बाढ़ की चेतावनी

पिछले दो-तीन दिनों की बारिश ने राज्य की नदियों, गंडक, Kosi , बागमती और गंगा के जलस्तर को खतरे के निशान तक पहुंचा दिया है। मौसम विभाग ने पश्चिमी और पूर्वी चंपारण, सीतामढ़ी, शिवहर, मुजफ्फरपुर, गोपालगंज और पटना समेत कई जिलों में भारी बारिश की चेतावनी दी है, जिससे बाढ़ की स्थिति और बिगड़ने की संभावना है।

अधिकारियों का समन्वय और राहत प्रयास

बाढ़ नियंत्रण के लिए जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी ने कहा कि राज्य भर में टीमें 24/7 तटबंधों की निगरानी कर रही हैं और किसी भी आपात स्थिति में त्वरित कार्रवाई के लिए तैयार हैं। प्रशासन और राज्य सरकार के बीच समन्वय से स्थिति पर काबू पाने की कोशिश की जा रही है।

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