Bihar politics : बिहार के मुख्यमंत्री और Janata Dal (United) (JDU) के अध्यक्ष Nitish Kumar ने सोमवार (30 मार्च) को बिहार विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया. उनका इस्तीफा परिषद के सभापति Awadhesh Narayan Singh को सौंपा गया, जिसे स्वीकार कर लिया गया है. इससे पहले इसी महीने Nitish Kumar राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए थे, जिसके बाद उनके इस्तीफे की अटकलें तेज हो गई थीं. हालांकि उन्होंने अभी तक मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा नहीं दिया है, लेकिन राजनीतिक हलकों में यह चर्चा है कि वह जल्द ही यह पद भी छोड़ सकते हैं और राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय भूमिका निभा सकते हैं.
सत्ता परिवर्तन के संकेत
Nitish Kumar के इस कदम से बिहार की राजनीति में बड़े बदलाव के संकेत मिल रहे हैं. 2005 से राज्य की राजनीति के केंद्र में रहे नीतीश कुमार के सक्रिय राजनीति से हटने की संभावना ने सत्ता संतुलन को नया मोड़ दे दिया है. मीडिया सूत्रों के अनुसार उनके उत्तराधिकारी को लेकर चर्चा तेज है. कुछ अटकलें उनके बेटे Nishant Kumar के नाम को लेकर भी लगाई जा रही हैं, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है. उधर बिहार की राजनीति में हो रहे ये बदलाव भाजपा के लिए निर्णायक साबित हो सकता है. लंबे समय तक गठबंधन में छोटे भाई की भूमिका निभाने वाली भाजपा अब राज्य की सत्ता में प्रमुख भूमिका में आ सकती है. पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 89 सीटें जीती थीं, और अब यह संभावना बढ़ गई है कि पार्टी का कोई नेता मुख्यमंत्री पद संभाल सकता है.
OBC–EBC समीकरण में बदलाव
नीतीश कुमार के हटने का सबसे बड़ा असर उनके कोर वोट बैंक पर पड़ सकता है, जिसमें अति पिछड़ा वर्ग (EBC) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) शामिल हैं. प्रधानमंत्री Narendra Modi के नेतृत्व में भाजपा अन्य राज्यों में इन वर्गों को अपने साथ जोड़ने में सफल रही है. बिहार में अब तक ये वर्ग नीतीश के साथ रहे, लेकिन उनके हटने के बाद इनका पुन ध्रुवीकरण संभव है. हालांकि विशेषज्ञ मानते हैं कि इन वर्गों का एक हिस्सा राजद और दूसरा भाजपा की ओर जा सकता है.
जेडीयू पर संकट के बादल
Janata Dal (United) के लिए यह स्थिति चुनौतीपूर्ण हो सकती है. पार्टी में नीतीश कुमार के अलावा कोई मजबूत जनाधार वाला नेता फिलहाल सामने नहीं दिखता. ऐसे में पार्टी के कमजोर पड़ने की आशंका जताई जा रही है, जिससे बिहार की राजनीति में उसकी भूमिका सीमित हो सकती है. मौजुदा स्तिथि को लेकर राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बिहार अब त्रिकोणीय राजनीति से निकलकर द्विध्रुवीय राजनीति की ओर बढ़ सकता है. अब मुकाबला मुख्य रूप से भाजपा और राजद के बीच देखने को मिल सकता है, जबकि जेडीयू की भूमिका कम होती नजर आ रही है.
तेजस्वी यादव के लिए अवसर
इस बदलते राजनीतिक परिदृश्य में Tejashwi Yadav के लिए बड़ा अवसर उभर सकता है. राजद नेता के सामने चुनौती होगी कि वे यादव-मुस्लिम समीकरण से आगे बढ़कर EBC, अन्य OBC और दलित वर्गों को अपने साथ जोड़ सकें. अगर वे ऐसा करने में सफल होते हैं, तो बिहार की सत्ता तक उनकी राह मजबूत हो सकती है. नीतीश कुमार के विधान परिषद से इस्तीफे ने बिहार की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है. आने वाले समय में सत्ता समीकरण, जातीय गठजोड़ और राजनीतिक नेतृत्व में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं.