Jitan Ram Manjhi: बिहार की सियासत में एक बार फिर हलचल मच गई है. एनडीए गठबंधन का हिस्सा होने के बावजूद हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (सेकुलर) के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी ने नीतीश सरकार की कार्यशैली पर जमकर निशाना साधा. समस्तीपुर जिले के मोरवा विधानसभा क्षेत्र के मालपुर मैदान में आयोजित एक मिलन समारोह में मांझी ने मंच से सरकार की कई कमियों को बेबाकी से उजागर किया.
इस मौके पर उन्होंने बीरजेन्दु कुमार उर्फ बीके सिंह को अपनी पार्टी में शामिल किया. समारोह में उनके बेटे और पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष संतोष सुमन भी मौजूद रहे. लेकिन मांझी का भाषण सरकार की आलोचना में तब्दील हो गया, जिससे यह सवाल उठने लगे हैं कि क्या एनडीए में सब कुछ सही नहीं चल रहा?
जो होना चाहिए, वह सरकार नहीं कर रही है :Jitan Ram Manjhi
मांझी ने अपने भाषण में सबसे पहले नारी सशक्तिकरण के मुद्दे पर सरकार को घेरा. उन्होंने कहा कि सरकार बेटियों की शिक्षा के लिए जितना दावा करती है, ज़मीनी हकीकत उससे काफी अलग है. उन्होंने कहा कि जब मैं मुख्यमंत्री था, तो सभी समाज की बेटियों को पहली क्लास से लेकर एमए तक मुफ्त शिक्षा देने की योजना लागू की थी. आज भी वह नीति सैद्धांतिक रूप से लागू है, लेकिन सरकार की लापरवाही के कारण इसका लाभ समय पर नहीं मिल पा रहा है.
उन्होंने आगे बताया कि छात्राओं को डिग्री और सर्टिफिकेट लेने में देरी हो रही है क्योंकि विश्वविद्यालयों को समय पर डेट शीट नहीं मिलती. इससे गरीब तबके की बेटियां प्रभावित होती हैं, जबकि अमीर घरों की लड़कियां फीस देकर समय पर सर्टिफिकेट हासिल कर लेती हैं और आगे बढ़ जाती हैं.
पुल ढहने और भ्रष्टाचार पर भी उठाए सवाल
नीतीश सरकार की आलोचना करते हुए मांझी ने पुलों की गुणवत्ता पर भी सवाल उठाया. उन्होंने कहा कि आज दो महीने में पुल ढह जाते हैं क्योंकि निर्माण में भारी भ्रष्टाचार है. जब मैं मुख्यमंत्री था तो सीमेंट कोल घोटाले की चर्चा होती थी. जो सीमेंट 10 रुपये में बनता है, वह 1000 में आता है. उसमें से 990 रुपये भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाते हैं. उन्होंने कहा कि काम की गुणवत्ता को सुधारना होगा, नहीं तो बिहार विकास नहीं कर सकेगा. सरकार को चाहिए कि वह इस पर सख्त कार्रवाई करे.
वोकेशनल शिक्षा में आरक्षण चाहिए :Jitan Ram Manjhi
मांझी ने शिक्षा और रोजगार के मुद्दे पर भी अपनी बात रखी. उन्होंने कहा कि सिर्फ सामान्य शिक्षा में ही नहीं, बल्कि वोकेशनल शिक्षा में भी आरक्षण होना चाहिए, ताकि गरीब बेटियां डॉक्टर, इंजीनियर, एमबीए, एमसीए जैसी प्रोफेशनल डिग्री हासिल कर सकें. उन्होंने कहा कि उनके पास सिर्फ चार विधायक हैं, इसलिए सरकार पर उतना दबाव नहीं बना पाते. लेकिन यदि संख्या बल बढ़ा, तो गरीबों के हक की लड़ाई को और मजबूत किया जाएगा.
पूर्व मुख्यमंत्री ने बेरोजगारी भत्ता की पुरानी योजना को भी याद किया. उन्होंने कहा कि जब वे मुख्यमंत्री थे, तो सभी डिग्रीधारी बेरोजगारों को 5000 रुपये प्रति माह देने का प्रस्ताव रखा था, लेकिन सरकार ने इसे अमल में नहीं लाया. उन्होंने कहा कि आज डिग्रीधारी युवा सड़क पर घूम रहे हैं लेकिन उनके लिए कोई योजना नहीं है.
नीतीश कुमार की भी तारीफ की
हालांकि मांझी ने अपने भाषण में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की कुछ उपलब्धियों की तारीफ भी की. उन्होंने कहा कि बिजली की स्थिति में भारी सुधार हुआ है और आज राज्य में 22 घंटे बिजली मिल रही है, जो नीतीश कुमार की बड़ी उपलब्धि है. उन्होंने यह भी कहा कि अब राज्य में सड़कें बेहतर हो गई हैं और पांच घंटे में एक कोने से दूसरे कोने तक पहुंचा जा सकता है. मांझी का यह बयान ऐसे समय आया है जब 2025 के विधानसभा चुनावों की रणनीतियां बननी शुरू हो रही हैं.
हालांकि उन्होंने एनडीए से अलग होने की बात नहीं कही, लेकिन उनके बयान से यह साफ है कि वे गठबंधन से संतुष्ट नहीं हैं और दबाव की राजनीति कर रहे हैं. उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि उनकी पार्टी का संख्या बल बढ़ता है, तो वे सरकार से और ज्यादा अधिकार और योजनाएं लागू करवाने की स्थिति में होंगे.
बिहार एनडीए में दरार?
जीतनराम मांझी(Jitan Ram Manjhi) के इस बयान ने बिहार की राजनीतिक सरगर्मी को फिर से तेज कर दिया है. जहां एक ओर वे नीतीश सरकार की आलोचना कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर प्रधानमंत्री मोदी और नीतीश कुमार की कुछ नीतियों की तारीफ कर गठबंधन से पूरी तरह अलग होने के संकेत नहीं दे रहे. अब देखना यह होगा कि एनडीए इस बयान को कैसे लेता है और क्या मांझी की मांगों को गंभीरता से लिया जाएगा.