TMC में फूट से मोदी सरकार में घटेगा जदयू-टीडीपी का कद..! क्या नीतीश ने पहले ही भांप लिया था समीकरण?

Politics : ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) में लगातार टूट जारी है. 8 जून को काकोली घोष ने दावा किया था कि उन्होंने 20 लोकसाभा सांसदों के समर्थन वाला पत्र स्पीकर ओम बिरला को भेजा है. पिछले 4 दिनों में TMC के 3 राज्यसभा सांसद पार्टी छोड़ चुके हैं. इसके बाद TMC के लोकसभा में 28 में से 20 सांसद और राज्यसभा में 13 में से 3 सांसद यानी कुल 23 सांसद टूट चुके हैं. वहीं 3 जून को बंगाल के 80 में से 58 विधायक अलग गुट बना चुके हैं. इन सबके बीच एक चर्चा यह भी है कि क्या बंगाल की राजनीति का असल खेला बिहार में देखने को मिल सकता है.

14 अप्रैल को नीतीश ने दिया था मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा

खासकर तब, जब केंद्र की मोदी सरकार में जनता दल (यूनाइटेड) और तेलुगु देशम पार्टी की अहम भूमिका है. इसके अलावा हाल ही मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने वाले नीतीश कुमार के राजनीतिक मूव की चर्चा भी हो रही…दरअसल बिहार की राजनीति में मुख्यमंत्री पद छोड़ने के फैसले को लेकर कई तरह के सवाल उठे थे, लेकिन मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए अब यह चर्चा तेज हो गई है कि नीतीश कुमार ने शायद समय रहते बड़ा राजनीतिक फैसला लिया. मार्च में नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की खबरों के बाद यह संकेत मिलने लगे थे कि वह मुख्यमंत्री पद से हट सकते हैं. आखिरकार 14 अप्रैल को उन्होंने मुख्यमंत्री पद छोड़ दिया. इसके बाद राजनीतिक गलियारों में कई तरह की अटकलें लगाई गईं. विपक्ष और सोशल मीडिया पर यह दावा भी किया गया कि नीतीश कुमार ने किसी दबाव में यह कदम उठाया है. हालांकि उनके करीबी नेताओं का कहना रहा कि नीतीश कुमार को किसी भी फैसले के लिए मजबूर करना आसान नहीं है. उनका राजनीतिक इतिहास बताता है कि वह अपने फैसले खुद लेते रहे हैं और परिस्थितियों के हिसाब से रणनीति बदलते रहे हैं.

केंद्र की राजनीति में बदलते समीकरण

वर्तमान में केंद्र की सरकार राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के समर्थन पर टिकी हुई है, जिसमें भारतीय जनता पार्टी के साथ जनता दल (यूनाइटेड) और तेलुगु देशम पार्टी की अहम भूमिका है. लोकसभा चुनाव 2024 के बाद एनडीए के पास बहुमत के लिए जरूरी संख्या से ऊपर का समर्थन है. बीजेपी के अपने 240 सांसद हैं, जबकि सहयोगी दलों में टीडीपी के 16 और जेडीयू के 12 सांसद हैं. इसके अलावा अन्य सहयोगी दलों के सांसद भी सरकार के साथ हैं. राजनीतिक चर्चाओं में यह दावा सामने आया है कि तृणमूल कांग्रेस के कुछ सांसद एनडीए के संपर्क में हो सकते हैं. हालांकि इस तरह के दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है. अगर ऐसा कोई बदलाव होता है तो केंद्र की राजनीति में जेडीयू और टीडीपी जैसे दलों की निर्भरता और प्रभाव पहले की तुलना में कम हो सकता है.

जेडीयू की भूमिका पर असर

2024 के लोकसभा चुनाव में जेडीयू ने उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन किया था. चुनाव से पहले कई राजनीतिक विश्लेषक जेडीयू के कमजोर होने की बात कर रहे थे, लेकिन पार्टी ने 12 लोकसभा सीटें जीतकर अपनी मौजूदगी दर्ज कराई. इसके बाद जेडीयू केंद्र की राजनीति में एक महत्वपूर्ण सहयोगी बनकर उभरी. बिहार को केंद्र से ज्यादा महत्व मिलने की उम्मीद भी बढ़ी थी. लेकिन अगर एनडीए के पास अतिरिक्त समर्थन आता है तो जेडीयू की राजनीतिक सौदेबाजी की क्षमता पहले जैसी नहीं रह सकती है.

बिहार में सत्ता हस्तांतरण की रणनीति?

बिहार विधानसभा की मौजूदा स्थिति में बीजेपी और जेडीयू के बीच सीटों का अंतर बहुत बड़ा नहीं है. बीजेपी के पास अधिक विधायक हैं, जबकि जेडीयू भी मजबूत स्थिति में है. ऐसी स्थिति में कुछ राजनीतिक जानकार मानते हैं कि नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री पद छोड़कर भविष्य की संभावित परिस्थितियों को देखते हुए एक संतुलित कदम उठाया. सत्ता हस्तांतरण अगर विवाद के साथ होता तो बीजेपी-जेडीयू गठबंधन पर असर पड़ सकता था, लेकिन फिलहाल दोनों दलों के बीच तालमेल बना हुआ है.

नीतीश कुमार की बड़ी राजनीतिक उपलब्धि

राजनीतिक विश्लेषकों का यह भी मानना है कि तमाम चर्चाओं के बावजूद जेडीयू का संगठन अभी तक मजबूत बना हुआ है. यहां तक कि विपक्षी दलों में टूट-फूट की खबरों के बीच जेडीयू अपने गठबंधन में स्थिर दिखाई दे रही है. बीजेपी और जेडीयू का गठबंधन करीब तीन दशक पुराना राजनीतिक रिश्ता माना जाता है. दोनों दल कई बार साथ आए और अलग हुए, लेकिन मौजूदा दौर में यह गठबंधन बिहार और केंद्र दोनों जगह महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है. कुल मिलाकर नीतीश कुमार का मुख्यमंत्री पद छोड़ना उस समय भले ही कई सवालों के घेरे में रहा हो, लेकिन बदलते राष्ट्रीय और बिहार के राजनीतिक समीकरणों को देखते हुए यह फैसला एक रणनीतिक कदम के रूप में देखा जा रहा है. अब आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि एनडीए के भीतर सहयोगी दलों की भूमिका कितनी बदलती है और बिहार की राजनीति में बीजेपी-जेडीयू गठबंधन किस दिशा में आगे बढ़ता है.